महंगे हो सकते हैं पेट्रोल-डीजल: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल, तेल कंपनियों को भारी घाटा
पेट्रोल-डीजल पर फिर से मंडराया महंगाई का खतरा: अंतरराष्ट्रीय तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से तेल कंपनियों को भारी घाटा
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आए भारी उछाल और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बाद, भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों (Retail Prices) में जल्द ही बड़ी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
सरकारी सूत्रों ने स्पष्ट संकेत दिया है कि लगभग चार साल से खुदरा कीमतों को स्थिर रखने के कारण तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को जो भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है, उसे देखते हुए आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों में इजाफा होना लगभग तय है।
कच्चे तेल में उबाल: होर्मुज जलडमरूमध्य का बंद होना मुख्य कारण
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें इस सप्ताह 126 डॉलर प्रति बैरल के चार साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं।
हालांकि, इसमें बाद में मामूली नरमी आई, लेकिन कीमतें अभी भी 110 डॉलर प्रति बैरल के पार बनी हुई हैं। इस अभूतपूर्व उछाल के पीछे मुख्य कारण हैं:
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तनाव:
28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमले और उसके बाद तेहरान की जवाबी कार्रवाई ने वैश्विक आपूर्ति को संकट में डाल दिया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य का बंद होना:
इस संघर्ष के कारण ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को प्रभावी रूप से बंद कर दिया है।
यह मार्ग दुनिया के 20% तेल व्यापार और तरल प्राकृतिक गैस (LNG) के लिए सबसे महत्वपूर्ण ‘चोकपॉइंट’ है।
पिछले साल कच्चे तेल का औसत 70 डॉलर प्रति बैरल था, जो इस महीने 114 डॉलर प्रति बैरल को पार कर चुका है।
तेल कंपनियों को हो रहा भारी घाटा
भारत में अप्रैल 2022 की शुरुआत से पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार:
वैश्विक कीमतों में उछाल के बावजूद घरेलू दरें न बढ़ने के कारण सरकारी ईंधन खुदरा विक्रेताओं (Indian Oil, BPCL, HPCL) को पेट्रोल पर लगभग 20 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर लगभग 100 रुपये प्रति लीटर का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
हालांकि, अतीत में जब कच्चा तेल सस्ता हुआ था, तब इन कंपनियों ने मुनाफा कमाया था, जिसका इस्तेमाल अब तक इस नुकसान की भरपाई के लिए किया जा रहा था, लेकिन अब यह बफर (Buffer) खत्म हो रहा है।
कमर्शियल ईंधन की दरें पहले ही बढ़ीं
इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) ने पहले ही कमर्शियल और इंडस्ट्रियल इस्तेमाल वाले ईंधन की कीमतें बढ़ा दी हैं।
इनमें अंतरराष्ट्रीय एयरलाइनों को बेचा जाने वाला जेट ईंधन (ATF), कमर्शियल एलपीजी, इंडस्ट्रियल डीजल और 5 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर शामिल हैं।
आम आदमी के इस्तेमाल वाले पेट्रोल, डीजल और घरेलू LPG (14.2 किलो) को फिलहाल इस महंगाई से बाहर रखा गया है।
बंगाल चुनाव के बाद कीमतों में तेज उछाल की थी आशंका
बाजार विश्लेषकों ने पहले ही यह अनुमान लगाया था कि 29 अप्रैल को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के मतदान संपन्न होने के बाद देश में पेट्रोल और डीजल के दामों में 25 से 28 रुपये प्रति लीटर तक की बड़ी मूल्य वृद्धि हो सकती है।
वर्तमान स्थिति:
दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 94.77 रुपये और डीजल की कीमत 87.67 रुपये प्रति लीटर बनी हुई है।
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतें और कंपनियों का लगातार बढ़ता वित्तीय घाटा इस बात का स्पष्ट संकेत है कि आम उपभोक्ताओं के लिए मौजूदा राहत अब लंबे समय तक टिकने वाली नहीं है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि अमेरिका-ईरान तनाव कम नहीं हुआ और होर्मुज जलडमरूमध्य जल्द नहीं खुला, तो घरेलू बाजार में ईंधन की खुदरा कीमतों में संशोधन अनिवार्य हो जाएगा।
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