“बुद्ध धम्म की उत्पति और बौद्ध विरासत के वैश्विक केंद्र के रूप में अपनी अद्वितीय स्थिति की पुष्टि करते हुए भारत एक बार फिर दक्षिण पूर्व एशिया के सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय बौद्ध आयोजन की मेजबानी करेगा”
नई दिल्ली 16 / 11 / 2025 संतोष सेठ की रिपोर्ट
यह देश का सबसे बड़ा आयोजन कार्यक्रम होगा। इस आयोजन में बिहार के बोधगया में अंतर्राष्ट्रीय तिपिटक जप समारोह के साथ-साथ जेठियन घाटी से राजगीर में वेणुवन के पवित्र बांस के उपवन तक बुद्ध के पदचिह्नों का अनुसरण करने वाली स्मारक पदयात्रा शामिल है।
इस 12 दिवसीय आध्यात्मिक समागम का आयोजन ज्ञानोदय के पवित्र स्थल बोधगया में अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ (आईबीसी) द्वारा भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय और अमेरिका के लाइट ऑफ बुद्ध धर्म फाउंडेशन इंटरनेशनल (एलबीडीएफआई) के सहयोग से किया जाएगा। यह आयोजन दुनिया के समक्ष कालातीत बौद्ध विरासत के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
इस वर्ष के महोत्सव को अंतर्राष्ट्रीय तिपिटक जप समिति (आईटीसीसी) की अगुवाई में देश के कई बौद्ध संगठनों का सहयोग प्राप्त है।इसमें 20,000 से अधिक संघ सदस्यों और आम श्रद्धालुओं के भाग लेने की उम्मीद है, जिनमें निम्नलिखित प्रतिष्ठित मठवासी प्रतिनिधिमंडल शामिल हैं:
पूरे भारत से 1,000 से अधिक समर्पित स्वयंसेवक इस कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे जो पूरे देश में बुद्ध की शिक्षाओं के प्रति गहरी श्रद्धा को दर्शाता है।
पवित्र तिपिटक का उत्सव मनाना
बुद्ध की शिक्षाओं का अनुकरणीय संग्रह तिपिटक प्राचीन भारत की एक विस्तृत आध्यात्मिक, साहित्यिक और दार्शनिक विरासत है। जिस बोधि वृक्ष के नीचे सिद्धार्थ गौतम को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी, वहीं पर इन ग्रंथों का पाठ वैश्विक बौद्ध परंपरा में निरंतरता और भक्ति का एक शक्तिशाली प्रतीक बना हुआ है।
इस 12 दिवसीय कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार है:
एक विशेष भेंट: बुद्ध की 220 स्वर्ण प्रतिमाएं
इस वर्ष का एक प्रमुख आकर्षण ओडिशा में उत्कृष्ट रूप से हस्तनिर्मित चार फुट ऊंची 220 स्वर्ण बुद्ध प्रतिमाओं का अभिषेक और दान है। ज्ञान, करुणा और शांति की प्रतीक ये प्रतिमाएं पूरे भारत में भक्तों और समुदायों को भेंट की जाएंगी।
ये पवित्र चित्र निम्नलिखित के लिए आध्यात्मिक आधार का काम करेंगे:
यह राष्ट्रव्यापी भेंट, अपनी पवित्र मातृभूमि में बुद्ध धम्म के महत्वपूर्ण पुनरुत्थान और पुनरोद्धार का प्रतीक है। इस वैश्विक आयोजन की मेज़बानी करके भारत शांति, करुणा और ज्ञानोदय के बुद्ध के संदेश को संरक्षित और प्रचारित करने की अपनी स्थायी ज़िम्मेदारी दोहराता है।
अंतर्राष्ट्रीय तिपिटक जप समारोह और स्मारक पदयात्रा राष्ट्रों के बीच एकता, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और आध्यात्मिक जागृति को प्रेरित करती रहेगी।
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