बंगाल: घुसपैठ रोकने के लिए सीमा पर तैनात होंगे मगरमच्छ और ज़हरीले सांप!
बंगाल में ‘Detect-Delete-Deport’ नीति लागू : घुसपैठियों में मची भगदड़, सीमा पर तैनात होंगे मगरमच्छ और जहरीले सांप !
कोलकाता /स्वरूपनगर: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के साथ ही राज्य की राजनीति और प्रशासनिक कार्यप्रणाली में एक बड़ा और सख्त बदलाव देखने को मिल रहा है।
मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी के नेतृत्व वाली नवगठित भाजपा सरकार ने राज्य को अवैध घुसपैठ से मुक्त करने के लिए अपनी बहुचर्चित “डिटेक्ट-डिलीट-डिपोर्ट” (Detect-Delete-Deport) नीति पर तेजी से काम शुरू कर दिया है।
इस सख्त अभियान के शुरू होते ही सीमा पार बैठे घुसपैठियों और उन्हें राजनीतिक संरक्षण देने वालों में भारी दहशत फैल गई है।
सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि बंगाल के संसाधनों पर पहला अधिकार भारतीय नागरिकों का है, और अवैध तरीके से भारत में रहने वालों को तुरंत वापस लौटना होगा।
हाकिमपुर सीमा पर मची भगदड़, वापस लौट रहे घुसपैठिए
उत्तर 24 परगना के स्वरूपनगर स्थित हाकिमपुर जांच चौकी (Hakimpur Checkpost) पर इस सख्ती का सीधा असर देखने को मिल रहा है।
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सीमा पर भारी भीड़: वर्षों से बिना किसी वैध दस्तावेज के बंगाल के अलग-अलग इलाकों में रह रहे सैकड़ों बांग्लादेशी नागरिक (पुरुष, महिलाएं और बच्चे) बैग और ट्रॉलियों के साथ सीमा पर जमा हो गए हैं, ताकि गिरफ्तारी से पहले किसी तरह वापस लौट सकें।
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दस्तावेजों की गहन जांच: सीमावर्ती क्षेत्रों में पुलिस, प्रशासनिक एजेंसियों और सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने अपनी निगरानी कई गुना बढ़ा दी है।
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राजनीतिक संरक्षण का खुलासा: पकड़े गए कई लोगों ने खुद स्वीकार किया कि वे वर्षों से बिना दस्तावेजों के बंगाल में रह रहे थे और यदि पिछली सरकार (TMC) सत्ता में बनी रहती तो उन्हें कभी लौटने की जरूरत नहीं पड़ती।
हर जिले में बन रहे ‘होल्डिंग सेंटर’
राज्य सरकार ने अवैध रूप से रह रहे लोगों की पहचान कर उन्हें डिपोर्ट (Deport) करने से पहले रखने के लिए होल्डिंग सेंटरों (Holding Centers) का निर्माण तेज कर दिया है।
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स्वरूपनगर: इस क्षेत्र में पहले से तीन होल्डिंग सेंटर संचालित हो रहे हैं, जहां वर्तमान में करीब 350 घुसपैठियों को रखा गया है।
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नए सेंटर: उत्तर बंगाल के सिलीगुड़ी, माटीगाड़ा और नक्सलबाड़ी क्षेत्रों में भी नए होल्डिंग सेंटर बनाए जा रहे हैं ताकि पकड़े गए लोगों को वहां रखा जा सके।
सीमा सुरक्षा का नया और खतरनाक प्लान: मगरमच्छ और जहरीले सांप
इस पूरे घटनाक्रम के बीच भारत-बांग्लादेश सीमा को अभेद्य बनाने के लिए एक बेहद चौंकाने वाले और कड़े प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है।
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प्राकृतिक अवरोध (Natural Deterrents): नदी और दलदली इलाकों (Riverine gaps) में जहां फेंसिंग (बाड़) लगाना भौगोलिक रूप से बेहद कठिन है, वहां पानी में मगरमच्छ और जहरीले सांप जैसे खतरनाक जीवों को तैनात करने की योजना है।
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BSF का अध्ययन: रिपोर्ट्स के अनुसार, सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने इन संवेदनशील इलाकों में प्राकृतिक अवरोध खड़े करने की व्यवहारिकता पर अपना आधिकारिक अध्ययन शुरू कर दिया है।
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यद्यपि कुछ मानवाधिकार कार्यकर्ता इस कदम का विरोध कर रहे हैं, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि है और लगातार हो रही तस्करी व घुसपैठ को रोकने के लिए ऐसे अप्रत्याशित कदम आवश्यक हैं।
मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी की सरकार ने अपने कड़े तेवरों से यह साबित कर दिया है कि अब बंगाल भारत की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने वालों और वोट बैंक की राजनीति का अड्डा नहीं बनेगा।











