ठाकरे ब्रांड पर संकट? महाराष्ट्र निकाय चुनावों में उद्धव की शिवसेना पस्त, राज ठाकरे की MNS का सूपड़ा साफ

“महाराष्ट्र की स्थानीय राजनीति में खुद को ‘मराठी मानुष’ और असली विरासत का हकदार बताने वाले ठाकरे बंधुओं के लिए रविवार का दिन किसी राजनीतिक दुःस्वप्न से कम नहीं रहा”

मुंबई | 22 दिसंबर, 2025 संतोष सेठ की रिपोर्ट 

288 नगर परिषदों और नगर पंचायतों के नतीजों ने साफ कर दिया है कि राज्य की छोटी शहरी सत्ता पर अब महायुति (BJP-शिंदे-अजित पवार) का पूरी तरह कब्जा हो चुका है।

शिवसेना (UBT): साख बचाने की चुनौती

कभी पूरे महाराष्ट्र में डंका बजाने वाली शिवसेना का उद्धव गुट (UBT) इस चुनाव में बेहद कमजोर नजर आया।

  • नगर परिषद: पार्टी को 246 परिषदों में से मात्र 7 से 9 अध्यक्ष पदों पर ही जीत मिली।

  • नगर पंचायत: यहाँ भी स्थिति निराशाजनक रही और पार्टी केवल 4 सीटें ही जीत सकी। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने उद्धव गुट के मुकाबले 5 गुना से भी ज्यादा (करीब 53 सीटें) सफलता हासिल की है। यह साबित करता है कि शिवसेना का जमीनी कार्यकर्ता और मतदाता अब शिंदे गुट की ओर शिफ्ट हो रहा है।

राज ठाकरे (MNS): शून्य पर सिमटा ‘इंजन’

राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के लिए ये नतीजे सबसे ज्यादा चौंकाने वाले और निराशाजनक रहे।

  • पार्टी नगर परिषद और नगर पंचायत, दोनों ही चुनावों में अपना खाता खोलने में भी नाकाम रही।

  • खेड जैसी कुछ सीटों पर कड़ी टक्कर देने के बावजूद राज ठाकरे का ‘इंजन’ सत्ता की पटरी पर नहीं चढ़ सका। यह परिणाम राज ठाकरे की उस रणनीति पर सवाल उठाता है जिसमें वे खुद को महायुति और MVA के बीच एक मजबूत विकल्प के रूप में पेश कर रहे थे।


BMC चुनाव से पहले लगा ‘झटका’

ये चुनाव नतीजे ऐसे समय में आए हैं जब 15 जनवरी 2026 को मुंबई महानगरपालिका (BMC) के चुनाव होने वाले हैं। चर्चा है कि उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे पर्दे के पीछे हाथ मिलाने या गठबंधन करने की तैयारी कर रहे थे। लेकिन इन नतीजों ने विपक्षी खेमे में खलबली मचा दी है:

  1. शिंदे गुट का बढ़ता कद: एकनाथ शिंदे ने साबित किया है कि उनकी शिवसेना केवल ठाणे तक सीमित नहीं है।

  2. वोट बैंक में सेंध: महायुति की ‘लाडकी बहिन योजना’ और विकास कार्यों ने ठाकरे बंधुओं के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगा दी है।

विपक्ष की दलील: “यह लोकतंत्र की हार है”

हार के बाद शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, “यह हार नहीं, बल्कि सत्ता और धनबल का नंगा नाच है। विधानसभा चुनाव की तरह ही यहाँ भी मशीनों की सेटिंग की गई है।” वहीं, राज ठाकरे की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन पार्टी के भीतर अब ‘आत्ममंथन’ की मांग उठने लगी है।


मुख्य बिंदु (Bullet Points):

  • शिवसेना (UBT): नगर परिषद में 7-9 सीटें, नगर पंचायत में 4 सीटें।

  • MNS: दोनों ही चुनावों में 0 सीटें (खाता नहीं खुला)।

  • शिंदे गुट: उद्धव गुट से 5 गुना बेहतर प्रदर्शन (53+ सीटें)।

  • अगली लड़ाई: 15 जनवरी को 29 नगर निगमों (BMC सहित) के लिए मतदान।

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