पश्चिम बंगाल: फलता सीट पर मतगणना शुरू, आज आएंगे नतीजे
पश्चिम बंगाल: फलता सीट पर मतगणना शुरू, 86% बंपर वोटिंग के बाद आज आएंगे नतीजे, TMC उम्मीदवार के हटने से मुकाबला हुआ दिलचस्प”
फलता/कोलकाता: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
पश्चिम बंगाल की हाई-प्रोफाइल फलता विधानसभा सीट पर 21 मई को संपन्न हुए पुनर्मतदान (Re-polling) के बाद आज वोटों की गिनती शुरू हो गई है।
इस सीट पर हुए चुनावी घमासान और भारी विवादों के बाद आज आखिरकार यह तय हो जाएगा कि फलता की जनता ने अपना जनादेश किसे सौंपा है।
मतगणना केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और शुरुआती रुझानों का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है।
21 मई को हुई थी 86% की बंपर वोटिंग
चुनाव आयोग के आदेश के बाद 21 मई 2026 को फलता सीट पर कड़ी सुरक्षा के बीच दोबारा मतदान कराया गया था।
इस दौरान मतदाताओं में भारी उत्साह देखने को मिला और शानदार वोटिंग प्रतिशत दर्ज किया गया। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पुनर्मतदान में 86 फीसदी से ज्यादा लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया, जो इस बात का संकेत है कि जनता इस चुनाव को लेकर कितनी जागरूक थी।
TMC उम्मीदवार मैदान से हटे, अब इन 3 दिग्गजों में है मुख्य मुकाबला
फलता सीट का यह चुनाव उस वक्त बेहद दिलचस्प हो गया जब सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के उम्मीदवार जहांगीर खान, जिनकी सबसे ज्यादा चर्चा थी, उन्होंने पुनर्मतदान से ठीक पहले चुनाव मैदान छोड़ने का ऐलान कर दिया।
हालांकि, तकनीकी कारणों से ईवीएम (EVM) में उनका नाम बतौर उम्मीदवार दर्ज रहा। टीएमसी ने उनके इस कदम को उनका निजी फैसला बताया है।
आधिकारिक तौर पर इस सीट से छह उम्मीदवार मैदान में हैं, लेकिन टीएमसी प्रत्याशी के पीछे हटने के बाद अब यहां मुख्य मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है।
यह सीधी टक्कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के देवांशु पांडा, कांग्रेस (Congress) के अब्दुल रजाक मोल्ला और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी CPIM के शंभू नाथ कुर्मी के बीच मानी जा रही है।
क्यों करवानी पड़ी दोबारा वोटिंग? (गड़बड़ी का पूरा सच)
गौरतलब है कि इस सीट पर मूल रूप से 29 अप्रैल को मतदान हुआ था, लेकिन मतदान के तुरंत बाद ही निर्वाचन क्षेत्र में भारी तनाव का माहौल बन गया था।
कई मतदान केंद्रों से गंभीर शिकायतें सामने आईं कि ईवीएम मशीन पर इत्र जैसा कोई पदार्थ और चिपकने वाली टेप (Adhesive Tape) लगाई गई थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जब जांच की गई, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जांच में पता चला कि कई बूथों पर लगे वेब कैमरों के फुटेज से भी छेड़छाड़ करने की कोशिश की गई थी।
इस खुलासे के बाद बूथ अधिकारियों, पीठासीन अधिकारियों, मतदान कर्मियों और चुनाव पर्यवेक्षकों की निष्पक्षता और उनकी भूमिका पर बड़े सवाल खड़े हो गए थे।
इन तमाम गड़बड़ियों और जांच रिपोर्ट के आधार पर ही चुनाव आयोग (Election Commission) ने सख्ती दिखाते हुए फलता की इस सीट के सभी बूथों पर पुनर्मतदान का आदेश दिया था।











