DRDO MPATGM Test 2026

स्वदेशी शक्ति का शंखनाद: डीआरडीओ ने किया तीसरी पीढ़ी की एंटी-टैंक मिसाइल (MPATGM) का सफल परीक्षण

“2026 भारत की रक्षा प्रणाली ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक और ऐतिहासिक मील का पत्थर पार कर लिया है”

अहिल्या नगर (महाराष्ट्र) | 13 जनवरी, 2026, संतोष सेठ की रिपोर्ट 

11 जनवरी, 2026 को महाराष्ट्र के अहिल्या नगर (पूर्व नाम अहमदनगर) स्थित केके रेंज में स्वदेशी रूप से विकसित ‘फायर एंड फॉरगेट’ मैन पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (MPATGM) का सफल उड़ान परीक्षण किया गया। इस सफल परीक्षण के साथ ही यह अत्याधुनिक हथियार प्रणाली भारतीय सेना में शामिल होने के अंतिम चरण में पहुँच गई है।

तकनीकी श्रेष्ठता: दुश्मन के टैंकों के लिए काल

हैदराबाद स्थित रक्षा अनुसंधान और विकास प्रयोगशाला (DRDL) द्वारा तैयार की गई यह मिसाइल तीसरी पीढ़ी की मारक क्षमता से लैस है। इसकी कुछ प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • दिन-रात ऑपरेशन: इसमें लगा इमेजिंग इन्फ्रारेड (IIR) सीकर दिन के उजाले और रात के अंधेरे, दोनों में सटीक निशाना लगाने में सक्षम है।

  • अत्याधुनिक तकनीक: इसमें ऑल इलेक्ट्रिक कंट्रोल एक्चुएशन, टैंडम वारहेड और उच्च प्रदर्शन लक्ष्यीकरण प्रणाली जैसी स्वदेशी तकनीकें शामिल हैं।

  • विनाशकारी वारहेड: इसका वारहेड आधुनिक युग के सबसे मजबूत मुख्य युद्धक टैंकों (Main Battle Tanks) को नेस्तनाबूद करने की क्षमता रखता है।

  • बहुमुखी लॉन्च: इस मिसाइल को ट्राइपॉड या किसी भी सैन्य वाहन लॉन्चर से आसानी से दागा जा सकता है।

प्रयोगशालाओं का साझा प्रयास

इस सफलता के पीछे डीआरडीओ की कई सहयोगी प्रयोगशालाओं का योगदान है:

  • RCI (हैदराबाद) और TBRL (चंडीगढ़): तकनीकी विकास और बैलिस्टिक परीक्षण।

  • HEMRL (पुणे): उच्च ऊर्जा सामग्री और प्रणोदन प्रणाली।

  • IRDE (देहरादून) और रक्षा प्रयोगशाला (जोधपुर): लक्ष्यीकरण प्रणाली और थर्मल टारगेट सिस्टम का विकास।

राजनाथ सिंह ने बताया ‘आत्मनिर्भरता’ का प्रतीक

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफलता के लिए डीआरडीओ और इसके उत्पादन भागीदारों—भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL)—की सराहना की।

उन्होंने कहा कि यह परीक्षण भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता को नई मजबूती प्रदान करता है। वहीं, डीआरडीओ अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने पुष्टि की कि मिसाइल ने लक्ष्य के विरुद्ध शानदार प्रदर्शन किया है और अब यह सेना की शक्ति बढ़ाने के लिए तैयार है।

The Politics Again विश्लेषण (Strategy Insight):

यह परीक्षण ऐसे समय में हुआ है जब भारत अपनी सीमाओं पर सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है। टैंक रोधी मिसाइलों की स्वदेशी उपलब्धता से न केवल आयात पर निर्भरता कम होगी, बल्कि युद्ध क्षेत्र में भारतीय पैदल सेना (Infantry) की मारक क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी। यह ‘मेक इन इंडिया’ के तहत निजी और सरकारी रक्षा उद्योगों के सफल समन्वय का भी बड़ा उदाहरण है।

PREMIUM NEWS

अपनी Premium Membership चुनें

Premium articles बिना restriction पढ़ें।

Monthly

₹99/month

30 days Premium access

You have successfully subscribed to the newsletter

There was an error while trying to send your request. Please try again.

The Politics Again will use the information you provide on this form to be in touch with you and to provide updates and marketing.