जौनपुर कोर्ट में छुट्टियों में बदलाव, 25 मार्च को खुला रहेगा न्यायालय
जौनपुर न्यायालय: रामनवमी और दुर्गा अष्टमी के अवकाश में बड़ा बदलाव, अब 25 मार्च को खुला रहेगा कोर्ट
संतोष सेठ (‘The Politics Again’) | जौनपुर
“जौनपुर जनपद न्यायालय की छुट्टियों के कैलेंडर में अहम बदलाव किया गया है। जिला जज सुशील कुमार शशि ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देश और अधिवक्ता संघ के प्रस्ताव पर रामनवमी और दुर्गा अष्टमी की छुट्टियों की तारीखें बदल दी हैं। अब 25 मार्च को कोर्ट में नियमित कामकाज होगा, जबकि 26 और 27 मार्च को अदालतें बंद रहेंगी”
जौनपुर जनपद न्यायालय और इससे जुड़े सभी ग्राम न्यायालयों के कामकाज और छुट्टियों के रोस्टर में एक महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है।
जनपद न्यायाधीश (District Judge) सुशील कुमार शशि ने एक आधिकारिक आदेश जारी कर रामनवमी और दुर्गा अष्टमी के अवकाश की तिथियों में संशोधन की जानकारी दी है।
यह बदलाव इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देश और दीवानी न्यायालय अधिवक्ता संघ, जौनपुर के प्रस्ताव के आधार पर किया गया है।
रामनवमी की छुट्टी अब 27 मार्च को
माननीय उच्च न्यायालय, इलाहाबाद के पत्र के अनुपालन में रामनवमी के अवकाश में संशोधन किया गया है। पूर्व में जारी किए गए कैलेंडर वर्ष-2026 के अनुसार रामनवमी की छुट्टी 26 मार्च (बृहस्पतिवार) को तय की गई थी।
लेकिन अब इसे बदल दिया गया है। नए आदेश के मुताबिक, अब रामनवमी का अवकाश 27 मार्च 2026 (शुक्रवार) को रहेगा।
दुर्गा अष्टमी का अवकाश 26 मार्च को, 25 को होगा काम
वहीं दूसरी ओर, दीवानी न्यायालय, अधिवक्ता संघ, जौनपुर ने 24 मार्च 2026 को एक प्रस्ताव पारित कर दुर्गा अष्टमी के स्थानीय अवकाश में बदलाव की मांग की थी।
इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए जिला जज ने आदेश दिया है कि पूर्व में 25 मार्च (बुधवार) को घोषित दुर्गा अष्टमी का स्थानीय अवकाश अब निरस्त माना जाएगा। इसकी जगह अब 26 मार्च 2026 (बृहस्पतिवार) को दुर्गा अष्टमी का अवकाश रहेगा।
जनता और वकीलों के लिए नया शेड्यूल:
इस नए आदेश के बाद जौनपुर न्यायालय का नया शेड्यूल इस प्रकार होगा:
- 25 मार्च 2026 (बुधवार): जनपद न्यायालय सहित समस्त ग्राम न्यायालयों में नियमित कार्य दिवस (कोर्ट खुलेगा)।
- 26 मार्च 2026 (बृहस्पतिवार): दुर्गा अष्टमी का स्थानीय अवकाश (कोर्ट बंद)।
- 27 मार्च 2026 (शुक्रवार): रामनवमी का अवकाश (कोर्ट बंद)।
इस आदेश की प्रतिलिपि सभी संबंधित न्यायिक अधिकारियों, बार एसोसिएशन और प्रशासन को भेज दी गई है ताकि वादकारियों (मुकदमा लड़ने वालों) को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।











