चंद्रयान-3 को अमेरिका का सर्वोच्च ‘गोडार्ड एस्ट्रोनॉटिक्स अवॉर्ड’ 2026 मिला
अंतरिक्ष में भारत का डंका: चंद्रयान-3 को अमेरिका का सर्वोच्च ‘गोडार्ड एस्ट्रोनॉटिक्स अवॉर्ड’, राजदूत विनय क्वात्रा ने किया ग्रहण”
वॉशिंगटन डीसी/नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
भारत के ऐतिहासिक चंद्र मिशन चंद्रयान-3 (Chandrayaan-3) ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का गौरव बढ़ाया है।
अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र की जानी-मानी संस्था, अमेरिकन इंस्टीट्यूट ऑफ एरोनॉटिक्स एंड एस्ट्रोनॉटिक्स (AIAA) ने चंद्रयान-3 मिशन को वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित ‘गोडार्ड एस्ट्रोनॉटिक्स अवॉर्ड’ से सम्मानित किया है।
यह सर्वोच्च सम्मान 21 मई को वॉशिंगटन डीसी में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान प्रदान किया गया।
राजदूत विनय क्वात्रा ने ग्रहण किया अवॉर्ड, बताया ‘स्पेस विजन 2047’ भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की ओर से यह ऐतिहासिक पुरस्कार अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा ने ‘AIAA ASCEND 2026’ सम्मेलन में स्वीकार किया।
अपने संबोधन में राजदूत क्वात्रा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘स्पेस विजन 2047’ का विशेष रूप से जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि भारत गहरे अंतरिक्ष की खोज, मानव अंतरिक्ष उड़ान (गगनयान) और तेजी से बढ़ते कमर्शियल स्पेस सेक्टर की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने भारत और अमेरिका की सरकारों, उद्योगों और शोध संस्थानों के बीच अंतरिक्ष सहयोग को और अधिक मजबूत करने पर भी जोर दिया।
चंद्रयान-3 मिशन: जिसने रचा था इतिहास
23 अगस्त 2023 को चंद्रयान-3 ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास सफल सॉफ्ट लैंडिंग कर इतिहास रच दिया था।
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पहला देश बना भारत: चंद्रमा के रणनीतिक और वैज्ञानिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने वाला भारत दुनिया का पहला देश बना।
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वैज्ञानिक आंकड़े और खोज: इस मिशन ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र की मिट्टी में कई महत्वपूर्ण रासायनिक तत्वों की मौजूदगी की पुष्टि की, जो भविष्य में चंद्रमा की सतह पर निर्माण और अन्य गतिविधियों के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं।
क्या है ‘गोडार्ड एस्ट्रोनॉटिक्स अवॉर्ड’ और क्यों है खास?
‘गोडार्ड एस्ट्रोनॉटिक्स अवॉर्ड’ AIAA का अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान माना जाता है।
यह पुरस्कार अंतरिक्ष अनुसंधान में उल्लेखनीय उपलब्धियों के लिए किसी व्यक्ति या टीम को प्रदान किया जाता है।
इस पुरस्कार की स्थापना श्रीमती गोडार्ड ने अपने पति रॉबर्ट एच. गोडार्ड की स्मृति में की थी। रॉबर्ट गोडार्ड को रॉकेट विज्ञान का अग्रणी वैज्ञानिक माना जाता है, जिनके शुरुआती तरल ईंधन रॉकेट प्रक्षेपणों ने ही आधुनिक अंतरिक्ष विज्ञान की मजबूत नींव रखी थी।
चंद्रयान-3 को यह सम्मान मिलना वैश्विक अंतरिक्ष बिरादरी में भारत के बढ़ते दबदबे और इसरो के वैज्ञानिकों की मेधा का एक और प्रमाण है।











