दिल्ली-NCR में 21-23 मई तक चक्का जाम, ट्रांसपोर्टर हड़ताल पर
दिल्ली-NCR में 21 से 23 मई तक महा ‘चक्का जाम‘: ECC में भारी बढ़ोतरी और BS-4 बैन के खिलाफ सड़क पर उतरे 68 ट्रांसपोर्ट संगठन”
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
राजधानी दिल्ली और एनसीआर (NCR) में आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई और परिवहन व्यवस्था 21 से 23 मई के बीच बुरी तरह चरमरा सकती है।
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) और दिल्ली सरकार की नई नीतियों के विरोध में ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (AIMTC) के नेतृत्व में 68 से अधिक परिवहन एसोसिएशनों और यूनियनों ने तीन दिवसीय ‘चक्का जाम’ का बड़ा एलान कर दिया है।
संगठनों का सीधा आरोप है कि पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क (ECC) में बेतहाशा बढ़ोतरी और BS-4 कमर्शियल वाहनों पर प्रस्तावित प्रतिबंध ने पूरे परिवहन उद्योग को गहरे आर्थिक संकट में धकेल दिया है।
40 से 55 प्रतिशत तक बढ़ा ईसीसी (ECC), ट्रांसपोर्टरों पर भारी बोझ
एआईएमटीसी (AIMTC) के प्रमुख डॉ. हरीश सभ्रवाल ने नई दरों का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि दिल्ली आने वाले मालवाहक वाहनों पर बिना किसी भेदभाव के टैक्स बढ़ाया गया है:
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हल्के कमर्शियल वाहन (LCV): इन पर ईसीसी शुल्क करीब 1,400 रुपये से बढ़ाकर सीधा 2,000 रुपये कर दिया गया है।
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भारी ट्रक: इन पर यह शुल्क 2,600 रुपये से बढ़ाकर 4,000 रुपये कर दिया गया है।
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संगठन का दावा है कि यह भारी बढ़ोतरी 40 से 55 प्रतिशत तक है, जिससे ट्रांसपोर्ट कारोबारियों की कमर टूट गई है।
सुप्रीम कोर्ट के मूल उद्देश्य की अनदेखी का आरोप
ट्रांसपोर्ट संगठनों ने तर्क दिया है कि सर्वोच्च न्यायालय का मूल उद्देश्य केवल उन ‘ट्रांजिट वाहनों’ को दिल्ली में प्रवेश से रोकना था, जो राजधानी को सिर्फ एक कॉरिडोर की तरह इस्तेमाल करते हैं।
लेकिन प्रशासन की मनमानी के चलते अब आवश्यक वस्तुएं लेकर आने वाले और दिल्ली में लोडिंग के लिए ‘खाली प्रवेश’ करने वाले वाहनों पर भी ईसीसी थोपा जा रहा है, जिन्हें पहले इस शुल्क से छूट प्राप्त थी।
17 लाख ऑपरेटरों पर मंडराया संकट, BS-4 बैन को बताया ‘अवैज्ञानिक’
संगठनों ने BS-4 वाहनों पर ईसीसी लगाए जाने और 1 नवंबर 2026 से इनके दिल्ली प्रवेश पर प्रस्तावित पूर्ण प्रतिबंध का पुरजोर विरोध किया है।
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उनका कहना है कि BS-4 वाहन नवीनतम उत्सर्जन मानकों का पालन करते हैं और ग्रेप-4 (GRAP-4) की पाबंदियों के दौरान भी इन्हें संचालन की अनुमति दी जाती है।
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इस प्रतिबंध को अवैज्ञानिक और गैरकानूनी बताते हुए AIMTC ने कहा है कि इससे दिल्ली-एनसीआर के 17 लाख से अधिक ट्रक ऑपरेटरों और उनके परिवारों की आजीविका सीधे तौर पर छिन जाएगी।
हजारों करोड़ वसूले, फिर भी 55% फंड पड़ा है बेकार
यूनियन ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए हैं। उनका दावा है कि साल 2015 से अब तक ईसीसी के नाम पर करोड़ों रुपये वसूले गए, लेकिन दिल्ली की हवा आज भी जहरीली है।
दिसंबर 2025 तक ईसीसी के जरिए 1,753.2 करोड़ रुपये जुटाए गए थे, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इसमें से 55 प्रतिशत राशि का पर्यावरण सुधार के लिए इस्तेमाल ही नहीं हुआ है।
ट्रांसपोर्ट संगठनों की प्रमुख मांगें:
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बढ़ाई गई ईसीसी (ECC) दरों को तुरंत वापस लिया जाए।
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ईसीसी केवल उन ‘ट्रांजिट वाहनों’ पर लागू हो, जो दिल्ली को पारगमन (Corridor) के रूप में इस्तेमाल करते हैं।
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BS-4 कमर्शियल वाहनों पर 1 नवंबर 2026 से प्रस्तावित प्रतिबंध को तत्काल हटाया जाए।











