साइबर अपराधों के खिलाफ केंद्र की बड़ी तैयारी: निर्भया फंड से 244 करोड़ जारी, 6 शहरों में बनेंगी नई लैब; MP-पंजाब में अब भी सुविधा का इंतजार
“डिजिटल युग में बढ़ते साइबर अपराधों और महिलाओं के खिलाफ ऑनलाइन हिंसा से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने फॉरेंसिक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है”
नई दिल्ली/ब्यूरो: “The Politics Again” santosh seth
सरकार ने संसद को सूचित किया है कि ‘निर्भया निधि’ के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में डीएनए विश्लेषण और साइबर फॉरेंसिक क्षमताओं को बढ़ाने के लिए ₹244.89 करोड़ की परियोजनाएं मंजूर की गई हैं।
हैदराबाद के बाद अब 6 और शहरों में नेशनल लैब
फिलहाल हैदराबाद में केंद्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (CFSL) के तहत राष्ट्रीय साइबर फॉरेंसिक प्रयोगशाला (NCFL) काम कर रही है, जिसे ₹37.34 करोड़ की लागत से बनाया गया था।
सरकार ने अब ‘महिलाओं की सुरक्षा’ योजना के तहत देश के 6 अन्य प्रमुख शहरों में भी ऐसी ही हाई-टेक लैब (NCFL-E) बनाने के लिए ₹126.84 करोड़ स्वीकृत किए हैं।
ये लैब दिल्ली, चंडीगढ़, कोलकाता, गुवाहाटी (कामरूप), भोपाल और पुणे में स्थापित की जा रही हैं।
राज्यों की स्थिति: कहां है लैब और कहां नहीं?
सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, देश के अधिकतर राज्यों में साइबर फॉरेंसिक प्रभाग (Cyber Forensic Division) काम कर रहे हैं।
उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और हरियाणा जैसे बड़े राज्यों में यह सुविधा उपलब्ध है। हालांकि, आंकड़ों में कुछ चौंकाने वाली बातें भी सामने आई हैं:
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मध्य प्रदेश और सिक्किम में साइबर फॉरेंसिक सुविधा को फिलहाल ‘उपलब्ध नहीं’ (Not Available) श्रेणी में रखा गया है।
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पंजाब, नागालैंड और अंडमान-निकोबार में यह सुविधा अभी ‘निर्माणाधीन’ (Under Construction) है।
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लद्दाख और चंडीगढ़ समेत 4 केंद्र शासित प्रदेश अभी अपनी फॉरेंसिक जांच के लिए पड़ोसी राज्यों या केंद्रीय लैब पर निर्भर हैं।
पेंडेंसी और ट्रेनिंग
हैदराबाद स्थित राष्ट्रीय लैब में फिलहाल 181 मामले जांच के लिए लंबित हैं। वहीं, साइबर एक्सपर्ट्स की कमी को पूरा करने के लिए राष्ट्रीय फॉरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय (NFSU) लगातार ट्रेनिंग दे रहा है। पिछले 5 वर्षों में 1852 अधिकारियों को साइबर फॉरेंसिक की ट्रेनिंग दी गई है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि कानून-व्यवस्था राज्य का विषय है, लेकिन साइबर अपराधों की जटिलता को देखते हुए केंद्र तकनीकी और आर्थिक मदद लगातार मुहैया करा रहा है।











