यूपी: बेसिक शिक्षा विभाग के 4 करोड़ घोटाले में CBI का छापा
यूपी में CBI का बड़ा एक्शन: बेसिक शिक्षा विभाग में 4 करोड़ के एरियर घोटाले में 14 ठिकानों पर छापेमारी”
लखनऊ : द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है।
बुधवार को बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों के एरियर भुगतान में हुए लगभग 4 करोड़ रुपये के गबन मामले में सीबीआई ने लखनऊ, अयोध्या, कुशीनगर, प्रतापगढ़ और अमेठी सहित राज्य भर के 14 ठिकानों पर एक साथ ताबड़तोड़ छापेमारी की।
हाई कोर्ट के आदेश पर CBI ने कसा शिकंजा
यह पूरा मामला बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों और अन्य लाभार्थियों के हक के पैसे डकारने से जुड़ा है।
इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ के सख्त निर्देश के बाद सीबीआई ने इस वित्तीय धोखाधड़ी की जांच अपने हाथों में ली है।
केंद्रीय जांच एजेंसी ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है, जिसमें अब तक पांच लोगों को नामजद किया गया है।
अकाउंट क्लर्क ने रची थी 4 करोड़ के गबन की साजिश
सीबीआई की शुरुआती जांच के मुताबिक, इस बड़े घोटाले का मास्टरमाइंड बेसिक शिक्षा विभाग में तैनात एक तत्कालीन जूनियर अकाउंट्स क्लर्क है।
इस आरोपी क्लर्क ने अपने अन्य साथियों और कुछ अज्ञात लोगों के साथ मिलकर एक सुनियोजित आपराधिक साजिश रची।
इस नेटवर्क ने बड़ी ही चालाकी से शिक्षकों के एरियर का करीब 4 करोड़ रुपये सरकारी खाते से डाइवर्ट कर विभिन्न निजी बैंक खातों में ट्रांसफर कर लिया।
अमेठी DM का बयान: ‘रिकवरी के दिए गए थे निर्देश’
इस मामले पर अमेठी के जिलाधिकारी संजय चौहान ने स्पष्ट किया कि, “यह भारी-भरकम धनराशि शिक्षकों और लाभार्थियों के बकाया एरियर के लिए आवंटित की गई थी।
गबन का खुलासा होने पर तुरंत प्रारंभिक जांच कराई गई और पुलिस में एफआईआर दर्ज कर जिम्मेदारों से पैसे वसूलने के निर्देश दिए गए थे।
लेकिन आरोपियों द्वारा हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के बाद, अदालत ने निष्पक्ष जांच के लिए यह मामला सीबीआई को सौंप दिया।”
छापेमारी में मिले अहम दस्तावेज और डिजिटल सुराग
बुधवार को 14 ठिकानों पर एक साथ हुई इस सघन तलाशी में सीबीआई के हाथ कई पुख्ता सबूत लगे हैं।
अधिकारियों ने बताया कि छापेमारी के दौरान गबन की गई रकम को कहां निवेश किया गया और कैसे खर्च किया गया, इससे जुड़े कई अहम और आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद हुए हैं।
इसके अलावा टीमों ने कई डिजिटल डिवाइस और गैजेट्स भी जब्त किए हैं। अब इन उपकरणों की फॉरेंसिक जांच की जाएगी।
जिससे इस 4 करोड़ के घोटाले के पीछे छिपे सफेदपोश चेहरों और पैसों के लेनदेन के पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश होने की उम्मीद है।











