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तीन राज्यों की बंपर वोटिंग ने बढ़ाई दलों की धड़कनें, क्या? जनादेश स्पष्ट है!

असम, केरल और पुडुचेरी विधानसभा चुनाव: रिकॉर्ड तोड़ मतदान ने बढ़ाई दलों की धड़कनें, सत्ता परिवर्तन या वापसी का संकेत?

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

असम, केरल और पुडुचेरी में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में जनता ने रिकॉर्ड तोड़ मतदान कर लोकतंत्र की मजबूती की एक नई मिसाल पेश की है।

तीनों राज्यों में लगभग 80 प्रतिशत के औसत मतदान ने स्पष्ट कर दिया है कि मतदाता अपने अधिकारों के प्रति पूरी तरह जागरूक हैं।

इस बंपर वोटिंग ने जहां एक ओर चुनाव आयोग को राहत दी है, वहीं राजनीतिक दलों की धड़कनें तेज कर दी हैं।

हर गठबंधन इस भारी मतदान को अपने पक्ष में बता रहा है। आइए समझते हैं कि इन तीनों राज्यों में इस ऐतिहासिक मतदान के असली मायने क्या हैं।

असम: निचले असम में भारी मतदान, 90% तक पहुंचा आंकड़ा

असम में इस बार मतदान का प्रतिशत पिछले चुनावों से काफी अधिक रहा। राज्य की 126 विधानसभा सीटों पर 85 प्रतिशत से अधिक औसत मतदान दर्ज किया गया।

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि 16 निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान 90 प्रतिशत से ऊपर रहा, जिसमें दलगांव में सर्वाधिक लगभग 95 प्रतिशत वोटिंग हुई।

यहाँ मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ भाजपा नीत गठबंधन (जो तीसरी बार सत्ता में वापसी चाहता है) और कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन के बीच है।

मतदान में भारी क्षेत्रीय असमानता दिखी। निचले असम (बरपेटा, बोंगाईगांव, धुबरी) जहां अल्पसंख्यक मतदाता अधिक हैं, वहां 90% से ज्यादा वोटिंग हुई।

जबकि ऊपरी असम में मतदान अपेक्षाकृत कम रहा। यह दर्शाता है कि कांटे की टक्कर वाले इलाकों में वोटरों का उत्साह चरम पर था।

छुटपुट हिंसा को छोड़कर चुनाव शांतिपूर्ण रहे। भाजपा इसे जनता का विश्वास बता रही है, जबकि कांग्रेस इसे बदलाव की आंधी मान रही है।

केरल: 77% मतदान, मलाबार क्षेत्र करेगा सत्ता का फैसला

केरल में इस बार भी मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) और कांग्रेस नीत संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (UDF) के बीच रहा। वहीं, भाजपा नीत एनडीए तीसरा विकल्प बनने का प्रयास कर रहा है।

राज्य में 77 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ, जिसमें कोझिकोड जिले में सबसे ज्यादा वोट पड़े। केरल की राजनीति का अहम सवाल यही है कि क्या वाम मोर्चा लगातार तीसरी बार इतिहास रचेगा या कांग्रेस सत्ता में वापसी करेगी?

60 सीटों वाला ‘मलाबार क्षेत्र’ (उत्तर केरल) इस बार भी ‘किंगमेकर’ साबित होगा। पिछले चुनाव में यहाँ सत्तारूढ़ दल को बढ़त मिली थी, लेकिन इस बार कई सीटों पर 80% से अधिक मतदान के साथ विपक्ष को अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है।

पुडुचेरी: 90% वोटिंग ने तोड़े सारे रिकॉर्ड

पुडुचेरी में मतदाताओं ने इस बार अभूतपूर्व उत्साह दिखाया। यहाँ लगभग 90 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जिसने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए।

यहाँ मुख्य मुकाबला एनडीए (सत्तारूढ़) और कांग्रेस-नीत गठबंधन के बीच है। पुडुचेरी में पूर्ण राज्य का दर्जा, बेरोजगारी और जल प्रदूषण जैसे स्थानीय मुद्दे हावी रहे। एक नए क्षेत्रीय दल की एंट्री ने मुकाबले को त्रिकोणीय और दिलचस्प बना दिया है।

क्या कहते हैं विश्लेषक?

तीनों राज्यों में कुल 5 करोड़ से अधिक मतदाताओं ने अपने अधिकार का प्रयोग किया, जिसके लिए 1,900 से अधिक उम्मीदवार मैदान में थे।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भारी मतदान को हमेशा सत्ता परिवर्तन (Anti-Incumbency) का संकेत नहीं माना जा सकता।

चुनाव प्रचार के दौरान यह देखा गया कि कुछ मुद्दों पर सरकार से नाराजगी जरूर थी, लेकिन ‘सत्ता पलटने’ जैसी लहर का अभाव था।

असम का ध्रुवीकरण, केरल की पारंपरिक प्रतिद्वंद्विता और पुडुचेरी की सीधी टक्कर ने इन चुनावों को बेहद रोमांचक बना दिया है।

अब सभी की निगाहें मतगणना के दिन पर टिकी हैं, जो स्पष्ट करेगा कि इस ऐतिहासिक जनभागीदारी के पीछे की असली कहानी क्या है।

Santosh SETH

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