Budget 2026: पान मसाला पर लगा ‘हेल्थ और सिक्योरिटी सेस’, सरकार कमाएगी 14,000 करोड़! जानें क्या महंगा होगा और कहां खर्च होगा पैसा?

“पान मसाला के शौकीनों और विनिर्माण कंपनियों के लिए बजट 2026-27 में एक बड़ा अपडेट सामने आया है”

नई दिल्ली ‘The Politics Again’ संतोष सेठ की रिपोर्ट 

सरकार ने 1 फरवरी, 2026 से पान मसाला पर ‘स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर’ (Health and National Security Cess) लागू कर दिया है।

वित्त मंत्रालय के दस्तावेजों के मुताबिक, इस नए सेस से सरकार को अगले वित्त वर्ष में 14,000 करोड़ रुपये की भारी-भरकम कमाई होने की उम्मीद है।

यह फैसला न केवल राजस्व बढ़ाने के लिए है, बल्कि इसका सीधा असर स्वास्थ्य सेवाओं और देश की सुरक्षा पर भी पड़ेगा।

कैसे होगी टैक्स की गणना?

यह नया उपकर मौजूदा 40% जीएसटी (GST) से अलग है। हालांकि, राहत की बात यह है कि जीएसटी और इस नए सेस को जोड़ने के बाद भी पान मसाला पर कुल टैक्स का भार 88% से ज्यादा नहीं होगा।

सबसे अहम बदलाव यह है कि इस सेस की गणना पान मसाला बनाने वाली कंपनियों की ‘उत्पादन क्षमता’ (Production Capacity) के आधार पर की जाएगी, न कि वास्तविक बिक्री पर। इसका मकसद टैक्स चोरी रोकना है।

14,000 करोड़ की कमाई, कहां खर्च होंगे पैसे?

बजट दस्तावेजों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष के बचे हुए दो महीनों (फरवरी और मार्च 2026) में ही सरकार को इससे 2,330 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है। वहीं, पूरे वित्त वर्ष 2026-27 में यह आंकड़ा 14,000 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा। खर्च का प्लान:

  • स्वास्थ्य: इस पैसे का बड़ा हिस्सा राज्यों के साथ साझा किया जाएगा, जिसका इस्तेमाल स्वास्थ्य जागरूकता अभियानों और अस्पतालों की बेहतरी के लिए होगा।

  • सुरक्षा: जैसा कि नाम से स्पष्ट है, इसका एक हिस्सा राष्ट्रीय सुरक्षा (National Security) को मजबूत करने में खर्च किया जाएगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसे “समर्पित और अनुमानित संसाधन प्रवाह” बताया है।

कंपनसेशन सेस खत्म, नया सेस शुरू

जीएसटी काउंसिल ने सितंबर 2025 में ही इसकी नींव रख दी थी। दरअसल, 31 जनवरी 2026 तक कोरोना काल के दौरान लिए गए कर्ज (Compensation Cess Loan) को चुका दिया गया है।

इसके बाद काउंसिल ने तय किया कि पान मसाला जैसे सिन गुड्स (Sin Goods) पर जीएसटी के अलावा एक्साइज ड्यूटी और सेस लगाने का एक नया मैकेनिज्म बनाया जाए, जिसे अब लागू कर दिया गया है।

“सरकार के इस कदम से स्पष्ट है कि वह तंबाकू और पान मसाला जैसे उत्पादों पर सख्ती बरकरार रखेगी। उत्पादन क्षमता पर टैक्स लगने से कंपनियों पर अनुपालन का दबाव बढ़ेगा, लेकिन इससे देश के हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को एक बड़ी आर्थिक मदद मिलने की उम्मीद है”

PREMIUM NEWS

अपनी Premium Membership चुनें

Premium articles बिना restriction पढ़ें।

Monthly

₹99/month

30 days Premium access

You have successfully subscribed to the newsletter

There was an error while trying to send your request. Please try again.

The Politics Again will use the information you provide on this form to be in touch with you and to provide updates and marketing.