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महाराष्ट्र में महा-उलटफेर! NDA में जाएंगे शरद पवार? अजित गुट में कलह

महाराष्ट्र में महा-उलटफेर की तैयारी! NDA में शामिल हो सकते हैं शरद पवार; सुनेत्रा-पार्थ के खिलाफ प्रफुल्ल पटेल ने बगावत कर बढ़ाए संपर्क”

मुंबई/दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर ऐसा भूचाल आने के संकेत मिल रहे हैं जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी।

सूत्रों के हवाले से बेहद चौंकाने वाली जानकारी सामने आ रही है कि शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP-SP) के राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल होने को लेकर बेहद गंभीर स्तर पर चर्चा चल रही है।

माना जा रहा है कि अगले 8 से 15 दिनों के भीतर इस पर कोई बड़ा और अंतिम फैसला हो सकता है।

NDA में शामिल होने के दो प्रमुख फॉर्मूले

सूत्रों के मुताबिक, शरद पवार गुट को एनडीए में लाने के लिए फिलहाल दो मुख्य विकल्पों पर विचार किया जा रहा है:

  1. पहला फॉर्मूला (विलय): अजित पवार की एनसीपी और शरद पवार की एनसीपी का आपस में विलय (मर्जर) करा दिया जाए और फिर एकजुट होकर पूरी पार्टी एनडीए का हिस्सा बन जाए।

  2. दूसरा फॉर्मूला (अलग इकाई): यदि दोनों गुटों का मर्जर संभव नहीं हो पाता है, तो शरद पवार की एनसीपी एक अलग राजनीतिक दल के रूप में एनडीए से जुड़ जाए या फिर सरकार को भीतर/बाहर से समर्थन दे।

बताया जा रहा है कि शरद पवार गुट के अधिकांश विधायक और सांसद सीधे सरकार में शामिल होने के पक्ष में हैं, ताकि केंद्र और राज्य में भागीदारी मिलने से पार्टी का कैडर मजबूत रहे। निर्णय में देरी होने पर विधायकों के टूटने का खतरा भी मंडरा रहा है।

अजित पवार के निधन के बाद ‘पावर’ की जंग, दो धड़ों में बंटी पार्टी

महाराष्ट्र के पूर्व डिप्टी सीएम अजित पवार के विमान हादसे में असमय निधन के बाद उनकी एनसीपी के भीतर भी भारी कलह मची हुई है। सूत्रों के अनुसार, पार्टी अब दो धड़ों में पूरी तरह बंट चुकी है:

  • पहला धड़ा: अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार (जिन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है) और उनके बेटे पार्थ पवार का गुट।

  • दूसरा धड़ा: पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे का गुट।

उपेक्षा से नाराज प्रफुल्ल पटेल खेमा: सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार की कार्यशैली को लेकर पार्टी के भीतर असंतोष चरम पर है।

प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे खुद को पूरी तरह उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। विवाद तब और गहरा गया जब चुनाव आयोग को भेजे गए एक आधिकारिक पत्र से कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल और प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे का नाम ही गायब कर दिया गया।

केंद्रीय मंत्रिमंडल और सुनेत्रा की नियुक्ति पर बढ़ा विवाद

आने वाले समय में संभावित केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर भी दोनों गुटों में ठन गई है। सुनेत्रा पवार गुट चाहता है कि प्रफुल्ल पटेल की जगह उनके बेटे पार्थ पवार को केंद्र में मंत्री बनाया जाए।

इसके अलावा, सुनेत्रा और पार्थ चाहते हैं कि प्रफुल्ल पटेल संगठन या सरकार में से केवल एक ही जिम्मेदारी संभालें।

हाल ही में सचिनानंद सिंह नामक नेता द्वारा लिखे गए एक पत्र में सुनेत्रा पवार की अध्यक्ष पद पर नियुक्ति को अवैध बताया गया है, जिसके पीछे सुनेत्रा गुट प्रफुल्ल पटेल खेमे का हाथ मान रहा है।

प्रफुल्ल पटेल ने शरद पवार से बढ़ाए संपर्क, मर्जर का विरोध क्यों?

इन्हीं परिस्थितियों के बीच प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे की शरद पवार से मुलाकातें और नजदीकियां अचानक बढ़ गई हैं।

दोनों नेता कुछ विधायकों को साथ लेकर पुरानी एनसीपी को फिर से एक करने (मर्जर) की कोशिश में जुटे हैं।

सुनेत्रा-पार्थ को कमान खोने का डर: सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार इस मर्जर का कड़ा विरोध कर रहे हैं। उन्हें डर है कि यदि दोनों गुट एक हो गए, तो प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे, सुप्रिया सुले और शरद पवार के सभी विधायक-सांसद मिलकर संगठन की कमान उनके हाथों से छीन लेंगे।

हालांकि, सुप्रिया सुले ने भी संकेत दिए हैं कि वे अपना सम्मान गिरवी रखकर कोई समझौता नहीं करेंगी।

क्या है बीजेपी (BJP) का गेम प्लान?

सूत्रों की मानें तो भारतीय जनता पार्टी चाहती है कि दोनों एनसीपी गुट एक साथ मिलकर एनडीए में आएं, ताकि राज्य और केंद्र सरकार चलाने में कोई समन्वय की समस्या न हो।

भाजपा के सामने सबसे बड़ी चिंता यह है कि अजित पवार के बाद उनके पास महाराष्ट्र में कोई ऐसा बड़ा ‘सेक्युलर चेहरा’ नहीं है जो कांग्रेस और विपक्ष के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगा सके।

ऐसे में शरद पवार और सुप्रिया सुले का एनडीए से जुड़ना भाजपा के लिए मास्टरस्ट्रोक साबित हो सकता है।

हालांकि, भाजपा सुनेत्रा और पार्थ पवार को भी पूरी तरह अलग-थलग नहीं छोड़ना चाहती, क्योंकि कठिन समय में अजित पवार ने ही शरद पवार से बगावत कर एनडीए का साथ दिया था।

सुप्रिया सुले और जयंत पाटिल को मिल सकती है बड़ी भूमिका

इस संभावित महा-गठबंधन की स्थिति में केंद्र की राजनीति में सुप्रिया सुले और महाराष्ट्र की राजनीति में जयंत पाटिल को बहुत बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है और दोनों ही सरकार का हिस्सा बन सकते हैं।

इससे पहले शरद पवार गुट के एकनाथ शिंदे की शिवसेना के साथ जाने की चर्चा भी उठी थी, जिसे वैचारिक मतभेद के कारण खारिज कर दिया गया। अब सबकी नजरें दिल्ली में होने वाली एनडीए की बैठकों पर टिकी हैं।

Santosh SETH

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