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मॉनसून सत्र: वन नेशन-वन इलेक्शन नहीं, परिसीमन पर फंसा पेंच

मॉनसून सत्र: ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ बिल अभी नहीं, परिसीमन बिल पर दक्षिण भारतीय दलों ने खोला मोर्चा”

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

सोमवार से शुरू हो रहे संसद के मॉनसून सत्र (Monsoon Session) में इस बार कई अहम विधेयकों पर चर्चा होने की उम्मीद है।

हालांकि, सूत्रों के हवाले से यह साफ हो गया है कि इस सत्र में मोदी सरकार का बहुचर्चित ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ (One Nation, One Election) बिल पेश नहीं किया जाएगा।

सरकार का मानना है कि इस बिल के लिए अभी समय है, क्योंकि इसका मुख्य लक्ष्य 2029 के चुनाव हैं।

फिलहाल सरकार का पूरा फोकस ‘महिला आरक्षण’ और ‘परिसीमन बिल’ (Delimitation Bill) पर है, जिसे लेकर विपक्ष, खासकर दक्षिण भारतीय पार्टियों ने अभी से कड़ा विरोध शुरू कर दिया है।

मॉनसून सत्र के लिए सरकार की रणनीति

संसद के इस अहम सत्र की रूपरेखा तय करने के लिए शुक्रवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में ‘ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स’ (GoM) की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई।

  • इस बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू, जेडीयू नेता ललन सिंह, टीडीपी नेता राम मोहन नायडू और आरएलडी प्रमुख जयंत चौधरी शामिल हुए।

  • सूत्रों के अनुसार, सरकार को उम्मीद है कि महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पर कई विपक्षी दल भी सरकार के पक्ष में वोट करेंगे, जिससे कांग्रेस अलग-थलग पड़ जाएगी। परिसीमन बिल इसी सत्र में आएगा या नहीं, इसकी स्थिति एक-दो दिन में पूरी तरह साफ हो जाएगी।

DMK और स्टालिन ने परिसीमन बिल पर दी चेतावनी

एक तरफ सरकार रणनीति बना रही है, तो दूसरी तरफ विपक्षी पार्टियां भी सरकार को घेरने की तैयारी में जुट गई हैं।

  • तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और डीएमके (DMK) अध्यक्ष एमके स्टालिन इन दिनों लंदन में हैं। उन्होंने वहीं से पार्टी नेताओं के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक की।

  • डीएमके नेताओं ने स्पष्ट किया है कि यदि डिलिमिटेशन (परिसीमन) बिल अपने मौजूदा प्रारूप में ही संसद में लाया जाता है, तो पार्टी इसका कड़ा विरोध करेगी।

  • डीएमके नेता सरवनन अन्नादुरई का कहना है कि यह बिल तमिलनाडु के हितों के खिलाफ है। यदि इसे मौजूदा स्वरूप में पास किया गया, तो दक्षिण भारतीय राज्यों की लोकसभा सीटें कम हो जाएंगी।

दक्षिण भारतीय पार्टियां क्यों कर रही हैं विरोध?

परिसीमन बिल का सबसे अधिक विरोध दक्षिण भारत के पांच राज्यों की पार्टियों द्वारा किया जा रहा है।

इन राज्यों के नेताओं को डर है कि जनसंख्या नियंत्रण में उनके अच्छे प्रदर्शन की सजा उन्हें लोकसभा सीटों में कटौती के रूप में मिलेगी।

  • उत्तर-दक्षिण का फासला: तमिलनाडु की शिवगंगा सीट से कांग्रेस सांसद कार्ती चिदंबरम ने चिंता जताते हुए कहा कि परिसीमन बिल से उत्तर (North) और दक्षिण (South) भारत के बीच का राजनीतिक फासला और बढ़ जाएगा।

  • मूक दर्शक बन जाएंगे सांसद: चिदंबरम ने एक और बड़ी समस्या की ओर इशारा करते हुए कहा कि वर्तमान में लोकसभा में 543 सांसद हैं, फिर भी कई सांसदों को बोलने का पर्याप्त मौका नहीं मिल पाता।

  • ऐसे में यदि परिसीमन के बाद लोकसभा में सीटों की संख्या बढ़कर 850 हो जाती है, तो ज्यादातर सांसद सदन में केवल मूक दर्शक बनकर रह जाएंगे।

Santosh SETH

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