यूपीआई (UPI) यूजर्स को बड़ी राहत: दिवाली तक टला MDR शुल्क
यूपीआई (UPI) यूजर्स और दुकानदारों को बड़ी राहत: NPCI ने दिवाली तक टाला MDR शुल्क, जानिए क्या हैं नए नियम”
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
यूपीआई (UPI) से भुगतान करने वाले करोड़ों ग्राहकों और दुकानदारों के लिए एक राहत भरी खबर है।
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने का फैसला दिवाली के बाद तक के लिए टाल दिया है।
UPI MDR on Select Merchant Transactions Shall be Implemented Post Diwali Press Release Link: https://t.co/5KMjOP0tHd https://t.co/pD8IKfN6sR
— NPCI (@NPCI_NPCI) October 13, 2026
एनपीसीआई द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, यूपीआई एंड सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी ने मौजूदा त्योहारी सीजन को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया है।
अब यह शुल्क दिवाली के तुरंत बाद लागू किया जाएगा, जिसकी सटीक तारीख की घोषणा अलग से की जाएगी।
यह स्पष्ट किया गया है कि यह शुल्क सभी यूपीआई भुगतानों पर नहीं लगेगा, बल्कि केवल तय शर्तों के दायरे में आने वाले चुनिंदा कारोबारी लेनदेन पर ही लागू होगा।
क्या है एमडीआर (MDR) और किसे देना होता है?
मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वह निर्धारित शुल्क है, जो डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने के बदले दुकानदार या कारोबारी को बैंक और पेमेंट प्रोसेसर को चुकाना पड़ता है।
-
इस शुल्क का मुख्य उद्देश्य भुगतान व्यवस्था से जुड़े विभिन्न भागीदारों की बुनियादी लागत को पूरा करना और डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को सुचारू रूप से चलाना है।
-
सरकार और NPCI ने यह स्पष्ट कर दिया है कि MDR न तो कोई टैक्स है और न ही यह सरकार या NPCI की ओर से वसूला जाने वाला कोई शुल्क है।
एमडीआर शुल्क के नए नियम और दरें
नई घोषित व्यवस्था के तहत, यूपीआई भुगतानों पर शुल्क की दरें इस प्रकार निर्धारित की गई हैं:
-
2,000 रुपये तक का लेनदेन: 2,000 रुपये तक के मर्चेंट यूपीआई ट्रांजैक्शन पर कोई एमडीआर शुल्क नहीं लगेगा।
-
2,000 रुपये से अधिक का लेनदेन: तय श्रेणियों में आने वाले 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लागू होगा।
-
अधिकतम सीमा (Cap): 75,000 रुपये से ज्यादा के बड़े ट्रांजैक्शन पर इस शुल्क की अधिकतम सीमा (Cap) 300 रुपये तय की गई है।
जरूरी सेवाओं के लिए ‘फ्लैट रेट’ की व्यवस्था
कुछ आवश्यक और उपयोगिता सेवाओं से जुड़े चुनिंदा कारोबारी लेनदेन के लिए एक अलग ‘फ्लैट शुल्क’ व्यवस्था बनाई गई है।
-
रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, ईंधन (पेट्रोल पंप), बिजली-पानी जैसी उपयोगिता सेवाओं और शिक्षा के क्षेत्र में 2,000 रुपये से ज्यादा के पात्र ट्रांजैक्शन पर मात्र 5 रुपये प्रति लेनदेन का एक तय शुल्क लिया जाएगा।
-
इन श्रेणियों में प्रतिशत (0.4%) के हिसाब से शुल्क नहीं कटेगा।
छोटे दुकानदारों के लिए ‘शून्य-MDR’ की सुविधा
सरकार ने छोटे कारोबारियों को डिजिटल पेमेंट अपनाने में किसी भी परेशानी से बचाने के लिए बड़ी राहत दी है।
मौजूदा क्यूआर (QR) कोड के जरिए हर महीने 1 लाख रुपये तक का भुगतान स्वीकार करने वाले पात्र मर्चेंट ‘शून्य-एमडीआर’ (Zero-MDR) व्यवस्था के तहत बने रहेंगे।
इसका सीधा अर्थ है कि इन छोटे दुकानदारों से कोई एमडीआर शुल्क नहीं वसूला जाएगा।
📊 UPI पर MDR शुल्क (एक नज़र में)
|
लेनदेन की श्रेणी (Transaction Category) |
लागू एमडीआर शुल्क (MDR Charges) |
|
₹2,000 तक के सभी भुगतान |
शून्य (कोई शुल्क नहीं) |
|
₹2,000 से अधिक के सामान्य मर्चेंट भुगतान |
0.4 प्रतिशत |
|
₹75,000 से अधिक के बड़े भुगतान |
अधिकतम ₹300 (Cap) |
|
जरूरी सेवाएं (रेलवे, शिक्षा, ईंधन, बीमा, बिजली-पानी) |
₹5 प्रति लेनदेन (₹2000 से अधिक के भुगतान पर) |
|
छोटे दुकानदार (₹1 लाख प्रतिमाह तक की लिमिट) |
शून्य (Zero MDR) |
|
प्रभावी तिथि |
दिवाली के बाद (सटीक तारीख की घोषणा जल्द) |











