बड़ी राहत: टैक्स बकाया होने पर अब नहीं होगी गिरफ्तारी और सिविल जेल
आयकरदाताओं के लिए बड़ी राहत: CBDT ने बदला नियम, टैक्स बकाया होने पर अब नहीं होगी गिरफ्तारी और जेल”
नई दिल्ली/लखनऊ: संतोष सेठ की रिपोर्ट : (THE POLITICS AGAIN)
उत्तर प्रदेश सहित देश भर के लाखों आयकरदाताओं (Income Taxpayers) के लिए केंद्र सरकार की ओर से एक बड़ी और राहत भरी खबर आई है।
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने आयकर बकाया की वसूली से जुड़े नियमों में ऐतिहासिक बदलाव करते हुए ‘गिरफ्तारी’ और ‘सिविल जेल’ में हिरासत से जुड़े कड़े प्रावधानों को पूरी तरह से हटा दिया है।
CBDT ने अधिसूचना जारी कर आयकर नियमावली-2026 के नियम 225 में यह बड़ा संशोधन किया है, जिसे 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी मान लिया गया है।
इस अधिसूचना के जरिए गिरफ्तारी और हिरासत से जुड़े कई उपनियमों (Sub-rules) को भी तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया गया है।
यूपी के 93 लाख से अधिक करदाताओं पर सीधा असर
इस बड़े फैसले का उत्तर प्रदेश में व्यापक असर देखने को मिलेगा। आंकड़ों के अनुसार, पूरे भारत में दाखिल होने वाले कुल आयकर रिटर्न (ITR) में उत्तर प्रदेश का योगदान लगभग 10% है।
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यूपी से हर साल लगभग 93.3 लाख इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल किए जाते हैं।
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देश में सर्वाधिक ITR दाखिल करने वाले राज्यों की सूची में 1.40 करोड़ रिटर्न के साथ महाराष्ट्र पहले स्थान पर है,
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जबकि उत्तर प्रदेश दूसरे नंबर पर मजबूती से कायम है। (इसके बाद क्रमशः गुजरात, राजस्थान और तमिलनाडु आते हैं।)
गिरफ्तारी हटी, लेकिन वसूली के अन्य अधिकार बरकरार
वरिष्ठ कर सलाहकार आशीष सूद ने इस संशोधन के निहितार्थ स्पष्ट करते हुए बताया कि भले ही नियम 225 से ‘गिरफ्तारी और सिविल हिरासत’ शब्द हटा दिए गए हैं,
लेकिन इसका अर्थ यह कतई नहीं है कि आयकर की बकाया मांग (Outstanding Demand) खत्म हो गई है।
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आयकर विभाग के पास वसूली की बाकी सभी शक्तियां पहले की तरह ही मौजूद रहेंगी।
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बकाया कर की वसूली के लिए बैंक खाते फ्रीज करने, संपत्ति कुर्क करने या सीज (Seize) करने जैसे अधिकार विभाग के पास यथावत बने रहेंगे।
यूपी में हाल के वर्षों में रही है भारी सख्ती
उत्तर प्रदेश में आयकर विभाग लगातार कर चोरों पर नकेल कसता रहा है। हाल के वर्षों में कानपुर, नोएडा, लखनऊ और अन्य प्रमुख शहरों में बड़े कारोबारी समूहों पर सघन तलाशी और सर्वे की कार्रवाई की गई है।
आंकड़े बताते हैं कि यूपी में 2019 से 2025 के बीच पांच वर्षों में आयकर अधिनियम के तहत लगभग 3,025 लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
इनमें सबसे अधिक 1,122 गिरफ्तारियां वर्ष 2023 में की गई थीं। नए नियम के बाद अब बकायेदारों को इस तरह की जेल या गिरफ्तारी का डर नहीं रहेगा।
पंजीकरण की समयसीमा 6 महीने बढ़ी
इस राहत के अलावा, CBDT की इसी अधिसूचना में वैल्यूअर (Valuer) और अधिकृत आयकर प्रैक्टिशनर (Authorized Income Tax Practitioner) से संबंधित पंजीकरण की समयसीमा में भी विस्तार किया गया है।
पहले यह डेडलाइन 30 सितंबर 2026 तय की गई थी, जिसे अब छह महीने बढ़ाकर 31 मार्च 2027 कर दिया गया है।











