संसद भवन के भीतर बैठने की व्यवस्था

लोकसभा में बड़ा बदलाव: TMC बागियों के लिए 39 सांसदों की बदली सीटें

मानसून सत्र से पहले लोकसभा में बड़ा फेरबदल: TMC बागियों के लिए 39 सांसदों की बदली गई सीटें”

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से ठीक पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन के भीतर सांसदों की बैठने की व्यवस्था (Seating Arrangement) में एक बड़ा बदलाव किया है।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों को सदन में एक साथ अलग बैठाने के लिए कुल 39 सांसदों की सीटें बदल दी गई हैं। आज से शुरू हो रहे मानसून सत्र में ये सभी सांसद अपनी नई आवंटित सीटों पर बैठेंगे।

लोकसभा सचिवालय के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि बागी सांसदों को एक साथ जगह देने के लिए यह व्यापक फेरबदल करना पड़ा है।

अभिषेक बनर्जी सहित कई दिग्गजों की सीटें प्रभावित

इस नए सीटिंग प्लान का असर सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई प्रमुख चेहरों पर पड़ा है:

  • अभिषेक बनर्जी: नई व्यवस्था के तहत टीएमसी के लोकसभा नेता अभिषेक बनर्जी की सीट भी बदल दी गई है।

  • अन्य प्रमुख सांसद: वाईएसआर कांग्रेस के सांसद पी. वी. मिधुन रेड्डी और शिरोमणि अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल सहित कई अन्य प्रमुख नेताओं की बैठने की जगह भी बदल गई है।

डिवीजन नंबर भी किए गए अपडेट

संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में प्रत्येक सांसद को एक विशेष ‘डिवीजन नंबर’ दिया जाता है।

  • इसी नंबर के आधार पर सदन में सांसद की सीट तय होती है।

  • विधेयकों पर मतदान (Voting) और महत्वपूर्ण संसदीय दस्तावेजों पर हस्ताक्षर के दौरान भी इसी नंबर का इस्तेमाल किया जाता है।

  • नई व्यवस्था के तहत जिन भी सांसदों की सीटें बदली गई हैं, उन्हें अब मानसून सत्र से अपने नए डिवीजन नंबर का ही उपयोग करना होगा।

शनिवार के ऐतिहासिक फैसले का है यह परिणाम

सीटों में यह बड़ा बदलाव लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा शनिवार को लिए गए फैसलों के बाद किया गया है।

  • स्पीकर ने शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के 6 बागी सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय को आधिकारिक मंजूरी दे दी थी।

  • इसके साथ ही, टीएमसी के 20 बागी सांसदों को भी सदन में अलग बैठने की अनुमति दी गई। इन सांसदों ने दावा किया है कि वे ‘नेशनल सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया’ (NCPI) नामक दल में शामिल हो चुके हैं।

संसद सत्र की शुरुआत से पहले हुए इस भारी फेरबदल ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज कर दी हैं, और विपक्ष ने स्पीकर के इन फैसलों पर कड़ा एतराज भी जताया है।

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