Bengal Speaker Rathindra Bose

बंगाल: 42 मंत्रियों की टीम तैयार, रथिंद्र बोस बनेंगे स्पीकर

बंगाल: शुभेंदु सरकार के 42 मंत्रियों ने संभाला जिम्मा, पहली बार के विधायक और पेशे से CA रथिंद्र बोस बनेंगे विधानसभा अध्यक्ष”

कोलकाता: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक ऐतिहासिक अध्याय की शुरुआत हो चुकी है। राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सफलतापूर्वक सरकार का गठन कर लिया है।

शुभेंदु अधिकारी ने राज्य के पहले ‘बीजेपी मुख्यमंत्री’ के रूप में सत्ता की कमान संभाल ली है। प्रशासन को सुचारू रूप से चलाने और चुनावी वादों को जमीन पर उतारने के लिए उनके मंत्रिमंडल में कुल 42 मंत्रियों को शामिल किया गया है, जिसमें 24 कैबिनेट मंत्री और 18 राज्य मंत्री हैं।

इस बीच, सरकार गठन के साथ ही 18वीं विधानसभा की कार्यवाही संचालित करने के लिए नए ‘विधानसभा अध्यक्ष’ (Speaker) के नाम का भी ऐलान कर दिया गया है।

कौन हैं रथिंद्र बोस, जिन्हें BJP ने बनाया है स्पीकर उम्मीदवार?

सदन की गरिमा और कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने के लिए पार्टी ने कूचबिहार दक्षिण (Cooch Behar Dakshin) से विधायक रथिंद्र बोस को विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए अपना आधिकारिक उम्मीदवार नामित किया है।

दिलचस्प बात यह है कि रथिंद्र बोस पहली बार के विधायक हैं। साल 2026 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने कूचबिहार दक्षिण सीट से अपना पहला चुनाव लड़ा और 23 हजार से भी ज्यादा वोटों के भारी अंतर से शानदार जीत हासिल की।

एक नए चेहरे पर दांव खेलकर पार्टी ने यह संदेश दिया है कि संगठन में योग्यता और पेशेवर अनुभव को पूरी तरजीह दी जा रही है।

राजनीति में आने से पहले क्या करते थे रथिंद्र बोस?

रथिंद्र बोस का राजनीतिक जीवन जितना नया है, उनका पेशेवर जीवन उतना ही मजबूत और अनुभवी है। राजनीति में कदम रखने से पहले और वर्तमान में भी वे पेशे से एक प्रैक्टिसिंग चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) हैं।

  • उन्होंने साल 1990 में प्रतिष्ठित ‘इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया’ (ICAI) से अपनी सीए (CA) की डिग्री पूरी की थी।

  • इसके साथ ही वे एक ‘कॉस्ट अकाउंटेंट’ (ICWAI) भी हैं।

वित्त और कानून की उनकी यह गहरी पेशेवर समझ विधानसभा अध्यक्ष के रूप में संवैधानिक और विधायी कार्यों के संचालन में बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि रथिंद्र बोस के अध्यक्ष बनने से विधानसभा की बहसों में तथ्यों और नियमों की प्रमुखता और बढ़ेगी।