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बंगाल: लाउडस्पीकर और अवैध टोल पर शुभेंदु सरकार का कड़ा एक्शन

बंगाल: शुभेंदु अधिकारी सरकार का बड़ा एक्शन, लाउडस्पीकर और अवैध टोल वसूली पर लगाई सख्त रोक; सभी के लिए नियम एक समान”

कोलकाता: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के साथ ही प्रशासन ने कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक शांति को लेकर सख्त रुख अपनाना शुरू कर दिया है।

राज्य की शुभेंदु अधिकारी सरकार ने दो बड़े फैसले लेते हुए लाउडस्पीकर के नियमों के लिए नई गाइडलाइंस जारी की हैं और अवैध टोल वसूली पर कड़ा प्रहार किया है।

सरकार का स्पष्ट संदेश है कि राज्य में हाईकोर्ट के मानकों और कानूनों का उल्लंघन किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

लाउडस्पीकर पर सख्त पहरा: मंदिर-मस्जिद सबके लिए नियम बराबर

ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने और हाईकोर्ट के आदेशों का सख्ती से पालन कराने के लिए सरकार ने पुलिस विभाग को कड़े निर्देश दिए हैं।

  • डेसिबल की निगरानी: पुलिस को निर्देश दिया गया है कि वे सभी इलाकों में बजने वाले लाउडस्पीकरों की आवाज (डेसिबल) की नियमित निगरानी करें।

  • कड़ी कार्रवाई: यदि कहीं भी निर्धारित मानकों से ऊंची आवाज में लाउडस्पीकर बजते पाए गए, तो प्रशासन उल्लंघन करने वालों के खिलाफ तुरंत सख्त कानूनी कार्रवाई करेगा।

  • समानता का नियम: सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि यह नियम सभी पर समान रूप से लागू होगा।

  • चाहे मंदिर हो, मस्जिद हो या कोई अन्य सार्वजनिक/धार्मिक आयोजन, ध्वनि प्रदूषण से जुड़े कानूनों का पालन हर हाल में करना होगा।

अवैध टोल वसूली पर चला ‘डंडा’, तुरंत बंद होंगे सभी अनधिकृत गेट

लाउडस्पीकर के अलावा, बंगाल सरकार ने राज्यभर में चल रहे अवैध वसूली सिंडिकेट पर भी नकेल कस दी है। जिला प्रशासन को अवैध टोल वसूली पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए गए हैं।

  • तत्काल प्रभाव से बंद होंगे केंद्र: सरकार ने कहा है कि राज्य के सभी जिलों में जहां से वाहनों की आवाजाही होती है, वहां मौजूद ऐसे सभी टोल गेट, ड्रॉप गेट, बैरिकेड और वसूली केंद्र जिन्हें राज्य सरकार के सक्षम प्राधिकारी द्वारा अधिकृत नहीं किया गया है, उन्हें तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया जाए।

  • DM को विशेष निर्देश: सभी संबंधित जिला मजिस्ट्रेटों (DM) को अपने अधिकार क्षेत्र में ऐसे अनधिकृत टोल और ड्रॉप गेटों की पहचान करने को कहा गया है।

  • प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि उचित प्राधिकरण के बिना भविष्य में इन्हें दोबारा स्थापित न किया जा सके।

शुभेंदु अधिकारी सरकार के इन शुरुआती और कड़े फैसलों को राज्य में सुशासन और कानून के राज की बहाली की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

Santosh SETH

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