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Beating Retreat 2026: ‘वंदे मातरम्’ के 150 साल और कर्तव्य पथ पर गूंजी ‘विजय भारत’ की धुन; देखें समारोह की पूरी रिपोर्ट

“राजधानी दिल्ली के कर्तव्य पथ पर गुरुवार शाम सूर्य ढलने के साथ ही अनुशासन, संगीत और राष्ट्रभक्ति का एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया।

[नई दिल्ली] — The Politics Again ब्यूरो: संतोष सेठ की रिपोर्ट 

बीटिंग रिट्रीट समारोह (Beating Retreat Ceremony) के साथ ही इस वर्ष के गणतंत्र दिवस समारोह का औपचारिक समापन हो गया।

इस बार का आयोजन बेहद खास रहा, क्योंकि यह पूरा समारोह राष्ट्र गीत ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ को समर्पित था।

कर्तव्य पथ पर संगीत का महाकुंभ

भारतीय सशस्त्र बलों (सेना, नौसेना, वायु सेना) और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) के बैंडों ने जब वाद्ययंत्र संभाले, तो पूरा वातावरण देशभक्ति के रंग में रंग गया।

  • समारोह की शुरुआत सामूहिक बैंड द्वारा ‘कदम कदम बढ़ाए जा’ की ओजस्वी धुन से हुई।

  • सेना (Army): ‘विजयी भारत’, ‘आरंभ है प्रचंड है’, ‘आनंद मठ’ और ‘सितारे हिंद’ जैसी धुनों ने दर्शकों में जोश भर दिया।

  • वायु सेना (Air Force): ‘ब्रेव वॉरियर’, ‘ट्वाइलाइट’ और ‘फ्लाइंग स्टार’ की धुनों ने आसमान की ऊंचाइयों का अहसास कराया।

  • नौसेना (Navy): ‘सागर पवन’, ‘मातृभूमि’ और ‘जय भारती’ की प्रस्तुति ने समुद्र की लहरों सा अनुशासन दिखाया।

  • CAPF: ‘हथरोही’, ‘जय हो’ और ‘वीर सिपाही’ की धुनों पर कदमताल करते जवानों ने समां बांध दिया।

विशिष्ट अतिथि और अनोखी व्यवस्था

समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित कई गरिमामयी हस्तियां मौजूद थीं।

इस बार दर्शकों के बैठने के स्थानों (Enclosures) के नाम भारतीय वाद्ययंत्रों के नाम पर रखे गए थे। ‘बांसुरी’, ‘डमरू’, ‘मृदंगम’, ‘संतूर’, ‘शहनाई’ और ‘वीणा’ जैसे नाम भारतीय संस्कृति की गहराई को दर्शा रहे थे।

इतिहास और महत्व

‘The Politics Again’ के पाठकों को बता दें कि बीटिंग रिट्रीट की परंपरा 17वीं सदी के इंग्लैंड से शुरू हुई थी, जब सूर्यास्त पर युद्ध विराम की घोषणा के लिए बिगुल बजता था।

भारत में इसकी शुरुआत 1950 के दशक में हुई। जहाँ 26 जनवरी को हम हथियारों और सैन्य शक्ति का प्रदर्शन करते हैं, वहीं 29 जनवरी को बीटिंग रिट्रीट अनुशासन और शांति का संदेश देती है।

निष्कर्ष

जैसे ही ‘सारे जहां से अच्छा’ की धुन के साथ समारोह का समापन हुआ और रायसीना हिल्स रोशनी से नहा उठी, यह संदेश साफ था—भारत युद्धप्रिय नहीं, लेकिन अपनी सुरक्षा के लिए हर पल सक्षम और तैयार है।

Santosh SETH

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