POCSO court in Ballia sentences a father to life imprisonment for raping his minor daughter.

बलिया: नाबालिग बेटी से दुष्कर्म करने वाले पिता को उम्रकैद की सजा

बलिया: रक्षक बना भक्षक, नाबालिग बेटी से दुष्कर्म के मामले में कलयुगी पिता को उम्रकैद, 46 दिन में आया फैसला”

बलिया (उत्तर प्रदेश): द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

रिश्तों को कलंकित करने वाले एक बेहद शर्मनाक मामले में बलिया की एक अदालत ने कड़ा संदेश दिया है।

नाबालिग बेटी से दुष्कर्म के मामले में दोषी पिता को अदालत ने उम्रकैद (आजीवन कारावास) की सजा सुनाई है।

अपर सत्र एवं विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट (प्रथम) कांत की अदालत ने मामले की तेज व लगातार सुनवाई करते हुए मात्र 46 दिनों के अंदर यह ऐतिहासिक फैसला सुना दिया है।

उम्रकैद के साथ 50 हजार रुपये का जुर्माना

न्यायालय ने दोषी पिता पर उम्रकैद की सजा के साथ-साथ 50 हजार रुपये का अर्थदंड (जुर्माना) भी लगाया है।

  • अदालत के आदेशानुसार, यदि दोषी जुर्माना राशि अदा नहीं करता है, तो उसे एक साल की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।

  • जुर्माने के रूप में जमा होने वाली 50 हजार रुपये की राशि में से 25 हजार रुपये पीड़िता के पुनर्वास के लिए उसे दिए जाएंगे।

क्या है पूरा मामला?

यह सनसनीखेज मामला बलिया के सुखपुरा थाना क्षेत्र के एक गांव का है।

  • 15 वर्षीय नाबालिग पीड़िता ने अपनी चाची के साथ थाने पहुंचकर पुलिस को तहरीर दी थी।

  • पीड़िता ने पुलिस को बताया कि 11 अप्रैल 2026 की रात उसके सगे पिता ने ही उसके साथ दुष्कर्म जैसी घिनौनी वारदात को अंजाम दिया।

  • घटना के बाद सुखपुरा पुलिस ने दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट की गंभीर धाराओं में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर तुरंत आरोपी पिता को गिरफ्तार कर लिया और उसे जेल भेज दिया।

अभियोजन की दलील: ‘विश्वास को तार-तार किया’

अदालत में इस मामले की कार्यवाही बेहद तेज गति से चली। 18 जून 2026 को आरोपी पर आरोप तय किए गए और 2 जुलाई से साक्ष्य पेश करने की कार्रवाई शुरू हुई।

  • अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में चार गवाह पेश किए गए, जबकि बचाव पक्ष ने केवल एक गवाह पेश किया।

  • अभियोजन पक्ष ने अदालत में कड़ी दलील देते हुए कहा कि एक पिता ने अपनी ही बेटी के विश्वास को तार-तार किया है, जो अत्यंत गंभीर और जघन्य सामाजिक अपराध है। समाज में एक सख्त संदेश देने के लिए आरोपी को अधिकतम दंड मिलना चाहिए।

दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने और साक्ष्यों को बारीकी से परखने के बाद अदालत ने पिता को दोषी करार देते हुए उसे जीवन भर के लिए सलाखों के पीछे भेज दिया है।