रायपुर: सपेरा बस्ती में लगी ‘बाल चौपाल’, बच्चों के अधिकारों और शिक्षा पर जोर
रायपुर: सपेरा बस्ती में सजी ‘बाल चौपाल’, घुमंतू बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने की अनूठी पहल”
रायपुर: द पॉलिटिक्स अगेन : कृष्णा सोनी की रिपोर्ट
छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने समाज के अंतिम छोर पर बैठे बच्चों को उनके अधिकार दिलाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है।
आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा की अध्यक्षता में तिल्दा-नेवरा के सिनोधा स्थित सपेरा बस्ती में ‘बाल चौपाल’ का सफल आयोजन किया गया।
इस चौपाल का मुख्य उद्देश्य घुमंतू और सपेरा समुदाय के बच्चों की समस्याओं को समझना और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना था।
मूलभूत सुविधाओं और दस्तावेजों का अभाव
बाल चौपाल में बातचीत के दौरान कई चौंकाने वाले और जमीनी तथ्य सामने आए।
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घुमंतू जीवनशैली और मुख्यधारा से अलग निवास करने के कारण सपेरा बस्ती के अनेक बच्चे शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं से अछूते हैं।
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अधिकांश बच्चों का जन्म अस्पतालों में न होने की वजह से उनका जन्म प्रमाण पत्र, नियमित टीकाकरण और आधार कार्ड जैसे अति-आवश्यक दस्तावेज नहीं बन पाए हैं।
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इन दस्तावेजों के अभाव में बस्ती के बच्चे शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हो रहे हैं।
सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने की अपील
आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने बस्ती के निवासियों से शासन की योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रशासन का सहयोग करने की भावुक अपील की।
उन्होंने समझाया कि यदि आवश्यक दस्तावेज तैयार हो जाएं, तो न केवल बच्चों को बल्कि पूरे परिवार को सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिल सकेगा।
इस पहल का स्थानीय नागरिकों ने भी स्वागत किया और प्रशासन को पूरा सहयोग देने का भरोसा दिलाया।
स्कूली बच्चों ने बेबाकी से रखी अपनी बात
इस विशेष कार्यक्रम में सिनोधा के शासकीय मिडिल स्कूल के विद्यार्थियों ने भी पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया।
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बच्चों ने विद्यालय में कंप्यूटर शिक्षा की सुविधा उपलब्ध कराने की जोरदार मांग रखी।
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इसके साथ ही बाल श्रम, बाल विवाह और ‘गुड टच-बैड टच’ (Good Touch-Bad Touch) जैसे गंभीर विषयों पर खुलकर चर्चा की।
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चौपाल में यह बात भी सामने आई कि सपेरा समुदाय के कुछ परिवारों में आज भी बाल विवाह की कुप्रथा प्रचलित है।
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इस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए डॉ. शर्मा ने मौजूद अधिकारियों को बाल विवाह रोकने और विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए।
सांप-सीढ़ी के खेल से सिखाए जिंदगी के सबक
कार्यक्रम का सबसे आकर्षक हिस्सा बच्चों की प्रस्तुतियां और खेल-खेल में दी गई शिक्षा रही। बजरंगी मरावी ने हिप-हॉप नृत्य, जानवी यादव ने जस गीत और चार वर्षीय नन्ही सुनीता ने कहानी सुनाकर सभी का दिल जीत लिया।
इस दौरान बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता लाने के लिए सपेरा बस्ती की जीवनप्रणाली से जोड़कर एक ‘सांप-सीढ़ी’ का विशेष खेल खिलाया गया।
बच्चों को समझाया गया कि जिस तरह खेल में सीढ़ी (अच्छी चाल) आगे बढ़ाती है और सांप (बुरी चाल) पीछे ले जाता है।
ठीक उसी तरह जीवन में अच्छे संस्कार, शिक्षा और सही निर्णय सफलता की ओर ले जाते हैं, जबकि बुरी आदतें भविष्य अंधकारमय कर देती हैं।
निरंतर जारी रहेगा ‘बाल चौपाल 2.0’
कार्यक्रम के अंत में डॉ. वर्णिका शर्मा ने स्पष्ट किया कि ‘बाल चौपाल 2.0’ का यह अभियान यहीं नहीं रुकेगा।
इस अनूठी यात्रा के जरिए बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाने और जमीनी स्तर की समस्याओं को सुलझाने का प्रयास निरंतर जारी रहेगा।











