Ghooskhor Pandat Web Series Controversy

‘घूसखोर पंडत’ पर ‘बाबा’ का एक्शन: वेब सीरीज पर FIR दर्ज, मनोज बाजपेयी की फिल्म फंसी विवादों में; निर्देशक ने हटाए पोस्टर

“बॉलीवुड के दिग्गज निर्देशक नीरज पांडे और अभिनेता मनोज बाजपेयी की आगामी वेब सीरीज ‘घूसखोर पंडत’ (Ghooskhor Pandat) रिलीज से पहले ही कानूनी पचड़े में फंस गई है”

लखनऊ “The Politics Again” संतोष सेठ की रिपोर्ट 

शीर्षक को लेकर बढ़ते जनाक्रोश के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर लखनऊ के हजरतगंज थाने में निर्माताओं और निर्देशक के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है।

विवाद की जड़: नाम में ‘अपमान’?

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि ‘घूसखोर’ (भ्रष्ट) शब्द को ‘पंडत’ (पंडित/ब्राह्मण समुदाय के लिए प्रचलित शब्द) के साथ जोड़ना पूरे समाज पर कीचड़ उछालने जैसा है। प्रशासन का कहना है कि इससे सामाजिक सद्भाव बिगड़ सकता है।

मुख्यमंत्री ने कानून व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जन भावनाओं को आहत करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा, जिसके बाद इंस्पेक्टर विक्रम सिंह की तहरीर पर मामला दर्ज हुआ।

कहानी और किरदार

इस सीरीज में मनोज बाजपेयी एक भ्रष्ट पुलिस अधिकारी ‘अजय दीक्षित’ का किरदार निभा रहे हैं, जिसे उपनाम (Nickname) ‘पंडत’ से बुलाया जाता है।

कहानी एक रात की घटनाओं पर आधारित है। इसमें नुसरत भरुचा और साकिब सलीम भी हैं।

निर्देशक की सफाई और बैकफुट पर मेकर्स

विवाद बढ़ता देख निर्देशक नीरज पांडे ने सफाई दी है:

  1. “यह पूरी तरह काल्पनिक कहानी है। ‘पंडत’ सिर्फ किरदार का प्रचलित नाम है, इसका किसी जाति या समुदाय से संबंध नहीं है।”

  2. विरोध को देखते हुए निर्माण दल ने फिलहाल प्रचार सामग्री (Promotional Material) वापस ले ली है।

इंडस्ट्री भी साथ नहीं

वेब सीरीज निर्माता संघ ने भी इस शीर्षक पर आपत्ति जताई है। संघ का कहना है कि मेकर्स ने इस शीर्षक (‘घूसखोर पंडत’) के लिए अनिवार्य अनुमति नहीं ली थी, जो नियमों का उल्लंघन है।

बड़ा सवाल

यह प्रकरण फिर से सवाल उठाता है— क्या रचनात्मक स्वतंत्रता के नाम पर किसी समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाई जा सकती है? या फिर नाम में ही बदलाव कर विवाद को खत्म किया जाएगा?

PREMIUM NEWS

अपनी Premium Membership चुनें

Premium articles बिना restriction पढ़ें।

Monthly

₹99/month

30 days Premium access

You have successfully subscribed to the newsletter

There was an error while trying to send your request. Please try again.

The Politics Again will use the information you provide on this form to be in touch with you and to provide updates and marketing.