आजमगढ़ : अजीत राय हत्याकांड में 6 दोषियों को उम्रकैद और जुर्माना

“अजीत राय शिब्ली नेशनल पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज के बीएससी थर्ड ईयर के छात्र थे। वे ABVP से जुड़े हुए थे और 2004 के छात्रसंघ चुनाव में महामंत्री पद के संभावित उम्मीदवार थे”

आजमगढ़ 10 / 09 / 2025 संतोष सेठ की रिपोर्ट 

यूपी के आजमगढ़ में 21 साल पुराने सनसनीखेज अजीत राय हत्याकांड में कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। छात्रसंघ चुनावी रंजिश के चलते हुई इस हत्या के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर 1 के न्यायाधीश अजय कुमार शाही ने छह आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

साथ ही प्रत्येक आरोपी पर 45,000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। अर्थदंड की आधी राशि मृतक अजीत राय के परिजनों को दी जाएगी। यह फैसला मंगलवार को सुनाया गया, जो हत्याकांड की तारीख 9 सितंबर 2004 से ठीक 21 साल बाद आया है। परिजनों ने इस फैसले पर संतोष जताया है। 

अजीत राय हत्याकांड का पूरा मामला

अभियोजन पक्ष के अनुसार आजमगढ़ जिले के निजामाबाद थाना क्षेत्र के टुंडवल गांव के निवासी अजीत राय शिब्ली नेशनल पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज के बीएससी थर्ड ईयर के छात्र थे।

वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े हुए थे और 2004 के छात्रसंघ चुनाव में महामंत्री पद के संभावित उम्मीदवार थे। इसी चुनावी रंजिश के कारण अजीत राय और अन्य छात्रों के बीच पहले से मनमुटाव चल रहा था। 

9 सितंबर 2004 को दोपहर करीब 11 बजे शिब्ली इंटर कॉलेज के गेट पर हमला हुआ। आरोपी मोहम्मद दानिश (पुत्र मुमताज अहमद, नई बस्ती), शाह समर यासीन (पुत्र नसीम, पहाड़पुर), मोहम्मद शारिक और मोहम्मद सादिक (पुत्रगण मोहम्मद साबिर), इरफान (पुत्र लल्लन, निराला नगर), सादिक खान उर्फ रशीद (पुत्र वकील गफ्फार) और रिंकू जकारिया (निवासी बदरका) ने लाठी-डंडों से अजीत पर हमला कर दिया।

रिंकू जकारिया के इशारे पर मोहम्मद दानिश ने कट्टे से फायर कर दिया। हमलावर एक कार से फरार हो गए। अस्पताल ले जाते समय अजीत की मौत हो गई। मृतक के चाचा देवेंद्र राय ने शहर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई। दिनदहाड़े हुई इस घटना से पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई थी। 

योगी आदित्यनाथ का विरोध और राजनीतिक प्रभाव

अजीत राय ABVP से जुड़े होने के कारण मामला राजनीतिक रूप से गंभीर हो गया। तत्कालीन गोरखपुर सांसद योगी आदित्यनाथ ने घटना पर रोष व्यक्त किया और समर्थकों के साथ आजमगढ़ के लिए रवाना हुए।

स्थिति बिगड़ने की आशंका से तत्कालीन जिलाधिकारी राजाराम उपाध्याय और पुलिस अधीक्षक एस के भगत ने उन्हें रौनापार थाना क्षेत्र की मऊ-अजमगढ़ सीमा पर रोक लिया।

हालांकि, योगी आजमगढ़ नहीं पहुंच सके, लेकिन उन्होंने कई जनसभाओं में इस हत्याकांड का जिक्र किया। वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी इस घटना को आजमगढ़ से जोड़कर उल्लेख करते रहे हैं। 

जांच और कोर्ट प्रक्रिया

हत्याकांड के बाद सरकार ने जांच सीबीसीआईडी को सौंप दी। सीबीसीआईडी ने विवेचना के बाद आठ आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया।

कोर्ट में अभियोजन पक्ष की ओर से शमशाद हसन, गंगा शरण और सहायक शासकीय अधिवक्ता गोपाल पांडेय ने बहस की। कुल 16 गवाहों की गवाही दर्ज कराई गई।

दोनों पक्षों की दलीलों के बाद कोर्ट ने मोहम्मद दानिश, शाह समर यासीन, मोहम्मद शारिक, सादिक खान उर्फ रशीद और रिंकू जकारिया को दोषी ठहराया।  दो अन्य आरोपी बरी हो गए। 

परिजनों और स्थानीय प्रतिक्रिया

मृतक के परिजनों ने फैसले पर संतोष जताया है। उन्होंने कहा कि लंबे इंतजार के बाद इंसाफ मिला है। स्थानीय स्तर पर इस फैसले को न्याय की जीत के रूप में देखा जा रहा है, खासकर छात्र राजनीति से जुड़े मामलों में। 

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