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अर्मेनिया : भारत के ब्रह्मास्त्र, पिनाका और आकाश ने उड़ाए अजरबैजान के होश

“अर्मेनिया में गूंजे भारतीय हथियार : येरेवान परेड में दिखा ‘न्यू वर्ल्ड ऑर्डर’, कांप उठे तुर्की-पाकिस्तान और अजरबैजान”

येरेवान (अर्मेनिया) / नई दिल्ली : द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

28 मई 2026—येरेवान की पहाड़ियों से टकराकर जब भारतीय अस्त्र-शस्त्रों की गूंज निकली, तो यह केवल एक सैन्य प्रदर्शन नहीं था, बल्कि एक ‘न्यू वर्ल्ड ऑर्डर’ (New World Order) का शंखनाद था।

दुनिया ने देखा कि जो अर्मेनिया साल 2020 के युद्ध में अपने अस्तित्व की अंतिम सांसें गिन रहा था, वह आज भारत के ‘अजेय अस्त्रों’ के दम पर शेर की तरह दहाड़ रहा है।

अजरबैजान के साथ संघर्ष में अर्मेनिया के लिए सबसे बड़ा खतरा आसमान से बरसती मौत यानी तुर्की के TB2 ड्रोन्स थे। लेकिन अब भारत की ‘स्मार्ट पावर’ ने दुश्मन को उसी के घर में ढेर करने की पूरी बिसात बिछा दी है।

अर्मेनिया की ढाल बने भारत के यह 4 ‘ब्रह्मास्त्र’

येरेवान परेड में शामिल भारतीय हथियारों ने अजरबैजान के खेमे में खौफ पैदा कर दिया है। अर्मेनियाई रक्षा पंक्ति की रीढ़ बने इन हथियारों की ताकत कुछ इस प्रकार है:

  • आकाश-1 एयर डिफेंस सिस्टम (Akash-1): तुर्की के TB2 ड्रोन्स का काल। यह सिर्फ एक मिसाइल नहीं, बल्कि ‘सुपर कंप्यूटर ऑन व्हील्स’ है।

  • यह एक साथ 10 लक्ष्यों को ट्रैक कर सकता है और 30 कि.मी. की रेंज में आने वाले किसी भी दुश्मन को राख बना सकता है। अर्मेनिया का आसमान अब नो-फ्लाइंग ज़ोन बन चुका है।

  • पिनाका रॉकेट लॉन्चर (Pinaka MBRL): कारगिल की चोटियों पर पाकिस्तानियों के परखच्चे उड़ाने वाला यह सिस्टम अब अर्मेनिया के पास है।

  • गाइडेड पिनाका 75 से 90 कि.मी. तक सटीक वार कर सकता है। इसकी एक बैटरी महज 44 सेकंड में 12 रॉकेट दाग कर पूरे दुश्मन एयर बेस को नक्शे से मिटा सकती है।

  • MARG 155 BR और ATAGS तोपें: अर्मेनिया के पहाड़ी भूगोल के लिए भारी रूसी टैंक फेल हो गए थे। भारत ने उन्हें दुनिया की पहली ऐसी 155 मिमी तोप दी है जो 4×4 ट्रक पर तैनात होती है।

  • यह ‘शूट एंड स्कूट’ (गोला दागो और गायब हो जाओ) तकनीक पर काम करती है। इसके साथ ही 48 कि.मी. की मारक क्षमता वाली ATAGS तोपों ने रक्षा पंक्ति को अभेद्य कर दिया है।

  • स्वाति रडार (Swathi Weapon Locating Radar): यह रडार 2 से 3 सेकंड में दुश्मन के दागे गए गोले की ‘जन्म कुंडली’ निकालकर उसकी सटीक लोकेशन बता देता है, जिससे भारतीय तोपें तुरंत और अचूक जवाबी हमला कर सकती हैं।

तुर्की-पाकिस्तान एक्सिस को भारत का ‘चेकमेट’

तुर्की और पाकिस्तान ने मिलकर एक एक्सिस (गठबंधन) बनाने की कोशिश की थी, जिसका मुख्य एजेंडा भारत को घेरना और कॉकेशस (Caucasus) क्षेत्र में अपना दबदबा बनाना था।

लेकिन भारत ने अर्मेनिया को ताकतवर बनाकर उनके सामने ही अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा दी है।

‘मेक इन इंडिया’ का जादू : 34 गुना बढ़ा भारत का रक्षा निर्यात

आज से 12 साल पहले भारत दुनिया का सबसे बड़ा हथियार खरीदार था। लेकिन 2014 के बाद नीतियों में आए बदलाव ने तस्वीर पलट दी।

  • 2013-14 में भारत का रक्षा निर्यात मात्र 686 करोड़ रुपये था।

  • 2025-26 में यह निर्यात बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये ($4.1 बिलियन डॉलर) हो गया है। यह 34 गुना की भारी बढ़ोतरी डीआरडीओ (DRDO) के वैज्ञानिकों की मेहनत और एपीजे अब्दुल कलाम के आत्मनिर्भर भारत के सपने का सच होना है। आज भारत के हथियार 100 से ज्यादा देशों तक पहुंच चुके हैं।

साउथ चाइना सी से कॉकेशस तक भारत का परचम

अर्मेनिया तो केवल एक मोर्चा है। दक्षिण चीन सागर में भारत की ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल (BrahMos) ने चीन की नींद उड़ा दी है।

फिलीपींस को दी गई इस मिसाइल ने साबित किया है कि भारत छोटे देशों का सबसे विश्वसनीय सुरक्षा कवच है। वियतनाम और इंडोनेशिया भी भारत की ओर देख रहे हैं।

खबरें हैं कि अर्मेनिया अब भारत से प्रलय बैलिस्टिक मिसाइल (Pralay) और ब्रह्मोस खरीदने पर विचार कर रहा है।

दुनिया भारतीय हथियारों की ओर इसलिए भाग रही है क्योंकि ये पश्चिमी हथियारों से काफी सस्ते हैं, रूसी हथियारों से ज्यादा घातक हैं, और रेगिस्तान की गर्मी से लेकर पहाड़ों की जमा देने वाली ठंड तक में ‘रग्ड’ (Rugged) तरीके से काम करते हैं।

Santosh SETH

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