नई दिल्ली में सीमांत जिला पुलिस अधीक्षक सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह

अमित शाह ने दिल्ली में कहा, घुसपैठ रोककर सीमा सुरक्षा मजबूत करेंगे

अमित शाह का कड़ा संदेश: सीमांत इलाकों में डेमोग्राफी बदलने का मूल कारण घुसपैठ, म्यांमार बॉर्डर पर होगी 1610 KM लंबी बाड़बंदी”

नई दिल्ली : THE POLITICS AGAIN डेस्क (नेशनल/डिफेंस रिपोर्ट): श्रीमती शिल्पा की रिपोर्ट

देश की सीमाओं को अभेद्य और पूरी तरह से सुरक्षित बनाने की दिशा में मोदी सरकार कड़े कदम उठा रही है।

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह (Amit Shah) ने शुक्रवार को नई दिल्ली में आयोजित ‘सीमांत जिला पुलिस अधीक्षक सम्मेलन-2026’ को संबोधित करते हुए सीमा सुरक्षा, घुसपैठ और जनसांख्यिकी (Demography) बदलाव पर बेहद सख्त रुख अपनाया है।

सम्मेलन में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय, बंडी संजय कुमार, गृह सचिव, आईबी (IB) के निदेशक और सीमांत राज्यों के पुलिस महानिदेशकों (DGP) ने हिस्सा लिया।

गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि ‘स्मार्ट बॉर्डर’ की कल्पना पर आधारित भारत की बॉर्डर सुरक्षा व्यवस्था आने वाले समय में विश्व में सबसे आधुनिक होगी।

जनसांख्यिकी बदलाव का कारण घुसपैठ: ‘रूथलेस अप्रोच’ अपनाएगी सरकार

अपने संबोधन में अमित शाह ने सीमावर्ती इलाकों में हो रहे असामान्य बदलावों पर गहरी चिंता व्यक्त की।

  • उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि सीमांत क्षेत्रों में हो रहे जनसांख्यिकी परिवर्तन (Demographic Change) का मूल कारण घुसपैठ है।

  • इसे रोकने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में ‘डेमोग्राफी मिशन’ की शुरुआत की गई है। यह मिशन असामान्य बदलावों का अध्ययन करेगा और इसे रोकने के उपाय सुझाएगा।

  • गृह मंत्री ने जोर देकर कहा कि इस समस्या से निपटने के लिए सरकार ‘रूथलेस अप्रोच’ (कठोर रवैया) के साथ काम करेगी।

  • उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि इन बदलावों की सूचना निचले स्तर से उच्चतम स्तर तक जल्द से जल्द पहुंचनी चाहिए।

31 हजार करोड़ से म्यांमार बॉर्डर पर बाड़बंदी

सुरक्षा को चाक-चौबंद करने के लिए गृह मंत्री ने एक बड़े प्रोजेक्ट का ऐलान किया। उन्होंने बताया कि प्रॉक्सी वार (Proxy War), कट्टरपंथ और तस्करी को रोकने के लिए मोदी सरकार 31 हज़ार करोड़ रुपये की लागत से 1610 किलोमीटर लंबे म्यांमार बॉर्डर पर बाड़बंदी (Fencing) का काम कर रही है। यह कदम पूर्वोत्तर (North East) की सुरक्षा के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

‘चतुष्कोणीय सुरक्षा ग्रिड’ (Quadruple Security Grid) का निर्माण

गृह मंत्री ने बताया कि भारत अब सीमा सुरक्षा को लेकर ‘रिएक्टिव’ (प्रतिक्रियात्मक) के बजाय ‘प्रोएक्टिव’ (सक्रिय) अप्रोच अपना रहा है। इसके लिए एक मजबूत चतुष्कोणीय सुरक्षा ग्रिड बनाया जा रहा है, जिसमें ये चार स्तंभ शामिल होंगे:

  1. सीमा रक्षक बल (Border Guarding Forces)

  2. राज्य एवं ज़िला प्रशासन

  3. भारत सरकार के संबंधित विभाग/हितधारक

  4. स्थानीय नागरिक

उन्होंने कहा कि सरकार अब आइसोलेटेड (अलग-थलग) सीमा चौकियों की व्यवस्था खत्म कर ‘एकीकृत सुरक्षा ग्रिड’ की तरफ बढ़ रही है।

जल्द ही तटीय सीमा सुरक्षा (Coastal Security) को भी इसी समग्र दृष्टिकोण के साथ मजबूत किया जाएगा।

वाइब्रेंट विलेजेज और 3 साल में नारकोटिक्स पर विजय का लक्ष्य

गृह मंत्री ने सीमांत इलाकों के विकास और वहां से पलायन रोकने के लिए ‘वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम’ (Vibrant Villages Program) की सफलता का जिक्र किया।

  • उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने अंतिम गांव को ‘देश का प्रथम गांव’ माना है। सरकार ने बॉर्डर इन्फ्रास्ट्रक्चर में 400 प्रतिशत की वृद्धि की है।

  • ड्रग्स के खिलाफ युद्ध: अमित शाह ने ऐलान किया कि आने वाले 3 सालों में सरकार नारकोटिक्स (नशे के कारोबार) की समस्या को गंभीर क्षति पहुंचाकर इस पर पूरी तरह से विजय प्राप्त कर लेगी।

सम्मेलन के अंत में गृह मंत्री ने विश्वास जताया कि पीएम मोदी के नेतृत्व में जिस तरह जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर से आतंकवाद और नक्सलवाद का सफाया हुआ है, उसी तरह भारत को पूरी तरह से ‘घुसपैठिया मुक्त’ बनाया जाएगा।

उन्होंने कहा, “पहले समस्याएं स्थायी और समाधान अस्थायी थे, लेकिन अब समस्याओं की जड़ पर प्रहार कर समाधानों को स्थायी बनाया जा रहा है।”