अमेरिका-ईरान तनाव: सीजफायर टूटने का खतरा, 48 घंटे का अल्टीमेटम
अमेरिका-ईरान तनाव: सीजफायर टूटने की कगार पर, तेहरान का 48 घंटे का अल्टीमेटम; ट्रंप बोले- बिना डील नहीं खुलेगा होर्मुज
वाशिंगटन/तेहरान: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में लागू हुआ सीजफायर (संघर्षविराम) अब टूटने की कगार पर पहुंच गया है।
दोनों देशों के बीच दूसरे दौर की शांति वार्ता की तारीख और समय अभी तक तय नहीं हो पाया है, जिससे तनाव एक बार फिर चरम पर है। ईरान ने वार्ता में हो रही इस देरी का ठीकरा अमेरिका पर फोड़ा है।
🚨“The Strait of Hormuz will remain blocked until $11 trillion in frozen Iranian assets are released. If no proposal is presented within the next 48 hours, the ceasefire may end.” Abbas Araghchi pic.twitter.com/QGcLyzas8j
— Daily Iran News (@DailyIranNews) April 24, 2026
तेहरान का आरोप है कि अमेरिकी नौसेना द्वारा ईरानी बंदरगाहों पर की गई नाकेबंदी (ब्लॉकेड) और उसकी 11 ट्रिलियन डॉलर की संपत्तियों को सीज किया जाना इस गतिरोध की मुख्य वजह है। बौखलाए ईरान ने अब अमेरिका को सीजफायर तोड़ने की खुली और सख्त चेतावनी दे दी है।
अब्बास अराघची का 48 घंटे का अल्टीमेटम
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका को सीधी चेतावनी देते हुए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है।
‘ईरान डेली न्यूज’ द्वारा जारी किए गए एक वीडियो बयान में अराघची ने स्पष्ट किया है कि यदि अगले 48 घंटों के भीतर अमेरिका ने ईरान की सीज की गई संपत्तियों को छोड़ने का प्रस्ताव पेश नहीं किया, तो सीजफायर खत्म कर दिया जाएगा।
अराघची ने सख्त लहजे में कहा, “होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) तब तक बंद रहेगा, जब तक कि ईरान की 11 ट्रिलियन डॉलर की ‘फ्रोजन एसेट्स’ (जब्त संपत्तियों) को पूरी तरह से रिलीज नहीं कर दिया जाता।”
डोनाल्ड ट्रंप का पलटवार: ‘रोजाना 500 मिलियन डॉलर नहीं कमाने दूंगा’
ईरान की इस धमकी और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी करारा जवाब दिया है।
ट्रंप ने दावा किया है कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर अमेरिका का पूरा नियंत्रण है और वे बिना किसी ठोस डील के इसे नहीं खोलेंगे।
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, “हम होर्मुज जलडमरूमध्य को खोल देंगे, लेकिन अभी हमने इसे बंद कर रखा है।
हमारा जलडमरूमध्य पर पूरा नियंत्रण है। हम इसे तीन दिन पहले ही खोल देते, क्योंकि उन्होंने (ईरान ने) हमसे संपर्क किया और कहा था कि ‘हम जलडमरूमध्य खोलने पर सहमत हैं।’ मेरे सारे लोग इस बात से खुश हो गए थे, सिवाय मेरे।”
ट्रंप ने अपनी रणनीति स्पष्ट करते हुए आगे कहा, “मैंने अपनी टीम से कहा- ‘एक मिनट रुको, अगर हम जलडमरूमध्य खोलते हैं तो इसका सीधा मतलब है कि वे (ईरान) रोजाना 500 मिलियन डॉलर कमाने लगेंगे।’
मैं उन्हें इस मामले के पूरी तरह सुलझने तक रोजाना 500 मिलियन डॉलर कमाने नहीं देना चाहता। इसलिए इसे बंद रखने वाला शख्स मैं ही हूं। जब वे कोई डील कर लेंगे या कोई बहुत सकारात्मक घटना होगी, तभी यह मार्ग खुलेगा।”
शांति वार्ता पर मंडराया संकट
दोनों देशों के शीर्ष नेताओं की इस तल्ख बयानबाजी से स्पष्ट है कि इस्लामाबाद या किसी अन्य तटस्थ स्थान पर प्रस्तावित दूसरे दौर की शांति वार्ता खटाई में पड़ गई है।
एक तरफ ईरान अपनी संपत्तियों की बहाली के बिना पीछे हटने को तैयार नहीं है, तो दूसरी तरफ अमेरिका आर्थिक दबाव बनाकर ईरान को एक नई और व्यापक डील के लिए मजबूर करना चाहता है। पूरी दुनिया की नजरें अब अगले 48 घंटों के घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं।











