कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश उच्च शिक्षा प्रोत्साहन नीति 2024 को दी हरी झंडी

“उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश उच्च शिक्षा प्रोत्साहन नीति 2024 को हरी झंडी दे दी है। उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि प्रदेश में 40 असेवित जिलों व पांच आकांक्षी जिलों में कोई विवि नहीं है। अगर यहां निजी विवि खुलते हैं तो उन्हें विभिन्न प्रकार की छूट दी जाएगी”

उत्तर प्रदेश में असेवित व आकांक्षी (पिछड़े) जिलों में निजी विश्वविद्यालयों को आकर्षित करने के लिए सरकार ने स्टांप ड्यूटी में 50 फीसदी तक और विदेशी विश्वविद्यालयों को कैंपस खोलने पर स्टांप ड्यूटी में 100 फीसदी तक की छूट देगी। कैबिनेट ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश उच्च शिक्षा प्रोत्साहन नीति 2024 को हरी झंडी दे दी है।

उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि प्रदेश में 40 असेवित जिलों व पांच आकांक्षी जिलों में कोई विवि नहीं है। अगर यहां निजी विवि खुलते हैं तो उन्हें विभिन्न प्रकार की छूट दी जाएगी।

इसके तहत 50 करोड़ रुपये तक के निवेश पर स्टांप ड्यूटी में 50 फीसदी, 51 से 150 करोड़ के निवेश पर 30 फीसदी और 151 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश पर 20 फीसदी छूट दी जाएगी। वहीं इनको कैपिटल सब्सिडी में भी क्रमशः 15, 16 व 17 फीसदी की छूट दी जाएगी।

इस तरह प्रदेश में कहीं भी विदेशी विवि या उसका कैंपस खोलने पर कुल निवेश का 20 फीसदी और 100 फीसदी स्टांप ड्यूटी में छूट दी जाएगी।

वहीं, नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) में शीर्ष 50 रैंक पाने वाले विश्वविद्यालयों को भी प्रदेश में कहीं भी कैंपस खोलने के लिए कुल निवेश का 20 फीसदी और 100 फीसदी स्टांप ड्यूटी में छूट दी जाएगी।

मंत्री ने कहा कि इस नीति से उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात में वृद्धि होगी। वहीं, युवाओं के लिए बेहतर शिक्षा के अवसर भी बढ़ेंगे।

आईटी सेक्टर को मिला उद्योग का दर्जा, जमीन से लेकर बिजली तक मिलेगी सस्ती

सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) और सूचना प्रौद्योगिकी जनित सेवाओं को उद्योग का दर्जा दिया जाएगा। इससे संबंधित प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है।

वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि आईटी सेक्टर की तेज वृद्धि में मदद के लिए बड़े सुधारों को लागू करने की जरूरत है। इसके तहत ये फैसला लिया गया है।

इन सुधारों का उद्देश्य आईटी और आईटीएस क्षेत्र को उद्योग का दर्जा देना है। अब आवास विकास प्राधिकरणों और औद्योगिक विकास प्राधिकरणों में औद्योगिक श्रेणी के तहत वर्गीकृत भूमि को आईटी इकाइयों को औद्योगिक दर पर जमीन मिल सकेगी।

आईटी सेक्टर को जमीन का आवंटन तेजी से होगा। इस सेक्टर की नई इकाइयों जिनका न्यूनतम लोड 150 किलोवाट है, उन्हें औद्योगिक दरों पर बिजली उपलब्ध होगी। इससे उनका मुनाफा बढ़ेगा जिसका असर विस्तार और रोजगार सृजन में मिलेगा।

इस फैसले से प्रदेश में आईटी सेक्टर में निवेश बढ़ेगा। साथ ही आईटी सेक्टर में बिजली की लागत में करीब 18 फीसदी की बचत होगी।

बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ सोलर पार्क के लिए एक रुपये में मिलेगी जमीन

बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ सोलर पार्क विकसित करने के प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों को विकसित करने के उद्देश्य से यूपीडा की ओर से तैयार 296 किमी लंबे बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के लिए इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

इस एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ बिल्ड, ऑन एंड ऑपरेट मॉडल पर विकसित किया जाएगा। एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ सोलर पार्क की स्थापना के लिए करीब 1500 हेक्टेयर जमीन उपलब्ध होगी।

योजना के तहत डेवलपर को 25 वर्ष के लिए यूपीडा लीज पर जमीन देगा। जमीन एक रुपये प्रति वर्ष के लीज रेंट पर मिलेगी। बुंदेलखंड का क्षेत्र सोलर ऊर्जा के लिए सबसे उपयुक्त है।

पीक सोलर समय, जो देश में 3 से लेकर 7.5 तक है इसके सापेक्ष बुंदेलखंड में यह 5 से 5.50 के बीच है। इस आधार पर 450 मेगावाट सौर बिजली का उत्पादन होगा।

इस फैसले से प्रदेश में ऊर्जा संकट कम होगा। साथ ही सौर ऊर्जा नीति के तहत वर्ष 2026-27 तक 22 हजार मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य हासिल करने में मदद मिलेगी।

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