ईरान के डर से अमेरिका ने हटाए युद्धपोत? मिडिल ईस्ट से मलेशिया पहुंचे
ईरान के खौफ से अमेरिका ने हटाए अपने ‘माइन हंटर’ युद्धपोत? मिडिल ईस्ट छोड़ मलेशिया पहुंचे US जहाज, अरब देशों को ईरान की चेतावनी
वाशिंगटन/तेहरान: द पॉलिटिक्स अगेन
मिडिल ईस्ट में ईरान और इस्राइल के बीच चल रहे भीषण युद्ध के बीच एक ऐसी सैन्य हलचल सामने आई है, जिसने दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों को चौंका दिया है।
अमेरिका ने अचानक अपने दो सबसे अत्याधुनिक ‘माइन काउंटर मेजर’ (बारूदी सुरंग रोधी) जहाजों— यूएसएस तुलसा (USS Tulsa) और यूएसएस सांता बारबरा (USS Santa Barbara) को मिडिल ईस्ट से हटा लिया है।
बहरीन स्थित अपने बेस से 3500 मील दूर इन जहाजों को अब मलेशिया के पेनांग (नॉर्थ बटरवर्थ कंटेनर टर्मिनल) में देखा गया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ा तेल टैंकरों पर खतरा
इन अमेरिकी जहाजों का मुख्य काम समुद्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगों (Mines) को खोजकर नष्ट करना है, ताकि तेल के टैंकर और मालवाहक जहाज सुरक्षित निकल सकें।
होर्मुज की खाड़ी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति की जीवन रेखा है, जहां से वैश्विक तेल का करीब 20% हिस्सा गुजरता है।
ऐसे समय में जब समुद्र में बारूदी सुरंगों का खतरा चरम पर है, इन जहाजों का वहां से हटना तेल सप्लाई पर बड़ा संकट खड़ा कर सकता है।
वर्तमान में मिडिल ईस्ट में केवल एक माइन हंटर जहाज यूएसएस कैनबरा तैनात रह गया है, जो इस विशाल और खतरनाक समुद्री रास्ते के लिए नाकाफी है।
क्यों पीछे हटा अमेरिका? (रणनीतिक चूक या सोची-समझी चाल)
फरवरी 2026 के अंत में ईरान और अमेरिका के बीच शुरू हुई सैन्य झड़पों के बाद बहरीन स्थित अमेरिकी ‘फिफ्थ फ्लीट’ का मुख्यालय ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों और कामिकाजे ड्रोन्स के सीधे निशाने पर आ गया था। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार:
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जहाजों की नाजुक बनावट: ‘इंडिपेंडेंस क्लास’ के ये जहाज एल्यूमीनियम से बने हैं। तकनीक में बेजोड़ होने के बावजूद ये पुराने लकड़ी के माइन स्वीपर्स की तुलना में अधिक नाजुक हैं।
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हमले का डर: अगर ईरान अपनी एंटी-शिप मिसाइलों या विस्फोटक नावों से इन पर हमला करता है, तो इनके डूबने का खतरा बहुत ज्यादा है। माना जा रहा है कि अमेरिका अपने इन महंगे युद्धपोतों को ‘सॉफ्ट टारगेट’ बनने से बचाना चाहता है।
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इंडो-पैसिफिक शिफ्ट: एक तर्क यह भी है कि चीन के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए अमेरिका अपना सैन्य फोकस मिडिल ईस्ट से हटाकर इंडो-पैसिफिक की ओर कर रहा है।
ईरान ने अरब देशों को झकझोरा: “अमेरिका आपका वफादार नहीं”
अमेरिका के इस बैकफुट कदम को ढाल बनाते हुए ईरान की सुप्रीम सिक्योरिटी काउंसिल के चीफ अली लारीजानी ने दुनिया भर के अरब और मुस्लिम बहुल देशों को बड़ी चेतावनी दी है।
उन्होंने कहा, “अमेरिका आपका वफादार नहीं है और इस्राइल आपका दुश्मन है। ये कभी आपके अपने नहीं होंगे, ये सिर्फ एक-दूसरे के इंट्रेस्ट (हित) में काम करेंगे। अब मुसलमानों को तय करना होगा कि उनका मुस्तकबिल (भविष्य) क्या हो।”
इस घटना ने उन खाड़ी देशों और इस्राइल की चिंताएं बढ़ा दी हैं, जो अब तक समुद्र में अमेरिकी सुरक्षा कवच पर निर्भर थे।











