जौनपुर राष्ट्रीय लोक अदालत

जौनपुर न्यूज़: आज दीवानी न्यायालय में राष्ट्रीय लोक अदालत, जानें किन मुकदमों का होगा निपटारा | The Politics Again

‘जौनपुर न्यूज़: आज लगेगी ‘राष्ट्रीय लोक अदालत’, ई-चालान, बिजली बिल से लेकर पारिवारिक विवादों का होगा तुरंत निपटारा ‘

जौनपुर (The Politics Again): संतोष सेठ की रिपोर्ट 

जौनपुर जिले के वादकारियों (Litigants) और आम जनता के लिए एक राहत भरी खबर है। छोटे-मोटे विवादों और वर्षों से लंबित मुकदमों से निजात पाने का आज सुनहरा मौका है।

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA), नई दिल्ली और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (UPSLSA), लखनऊ के निर्देशानुसार आज, 14 मार्च 2026 (शनिवार) को जौनपुर में ‘राष्ट्रीय लोक अदालत’ (National Lok Adalat) का भव्य आयोजन किया जा रहा है।

माननीय जनपद न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जौनपुर श्री सुशील कुमार शशि के कुशल निर्देशन में यह लोक अदालत दीवानी न्यायालय परिसर सहित जिले की सभी तहसीलों में आयोजित की जा रही है।

कब और कहाँ लगेगी लोक अदालत?

सिविल जज (सीनियर डिवीज़न)/सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्री सुशील कुमार सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि:

  • समय: आज प्रातः 10:00 बजे से।

  • स्थान: दीवानी न्यायालय परिसर (Civil Court), जौनपुर और जनपद के सभी तहसील मुख्यालयों पर।

लोक अदालत में किन-किन मुकदमों का होगा निस्तारण?

इस राष्ट्रीय लोक अदालत में आपसी सुलह-समझौते के आधार पर कई प्रकार के वादों का त्वरित निस्तारण किया जाएगा। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • प्री-लिटिगेशन (वाद-पूर्व) स्तर के मामले: बैंक ऋण वसूली, पारिवारिक/दाम्पत्य विवाद, भरण-पोषण वाद आदि।

  • लंबित मामले: विभिन्न न्यायालयों में लंबित आपराधिक शमनीय (कम्पाउंडेबल) वाद और सिविल वाद।

  • बिल और चालान: ई-चालान (Traffic Challans), विद्युत (बिजली) और जल बिल के विवाद (चोरी से संबंधित वादों सहित)।

  • अन्य प्रमुख वाद: धारा 138 (चेक बाउंस) वाद, मोटर दुर्घटना प्रतिकर (MACT) याचिकाएं, श्रम एवं सेवायोजन विवाद, भूमि अधिग्रहण वाद, और सेवानिवृत्ति परिलाभों से जुड़े मामले। (नोट: विवाह विच्छेद/तलाक से संबंधित वादों को इसमें शामिल नहीं किया जाएगा।)

वादकारियों और अधिवक्ताओं से विशेष अपील

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने सभी वादकारियों और अधिवक्तागण से अपील की है कि वे अपने-अपने वादों से संबंधित न्यायालयों में तत्काल संपर्क स्थापित करें।

अपने मुकदमों को राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए संदर्भित कराएं और आपसी सुलह के जरिए मामलों का अंतिम रूप से निस्तारण कराकर समय और धन दोनों की बचत करें।

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