राज्यसभा चुनाव: शरद पवार सहित 26 निर्विरोध चुने गए, 16 मार्च को 11 सीटों पर वोटिंग | The Politics Again
राज्यसभा चुनाव: शरद पवार-आठवले समेत 26 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित, अब 11 सीटों के लिए 16 मार्च को ‘महासंग्राम’
नई दिल्ली (The Politics Again): संतोष सेठ की रिपोर्ट
देश के उच्च सदन (राज्यसभा) के द्विवार्षिक चुनावों में सोमवार को एक बड़ा पड़ाव पार हो गया। नामांकन वापसी की समय सीमा समाप्त होने के बाद, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रमुख शरद पवार और केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले समेत कुल 26 उम्मीदवारों को निर्विरोध चुन लिया गया है।
अब देश और राजनीतिक दलों की निगाहें शेष 11 सीटों पर टिक गई हैं, जिनके लिए 16 मार्च को मतदान होगा।
इन 11 सीटों के लिए 14 उम्मीदवार मैदान में हैं और बिहार, हरियाणा तथा ओडिशा में दिलचस्प चुनावी मुकाबला देखने को मिलेगा।
किन राज्यों में है मुकाबला और क्या है सीटों का गणित?
दस राज्यों में कुल 37 सीटों के लिए 40 उम्मीदवारों ने अपना पर्चा दाखिल किया था। 26 उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने के बाद अब असली लड़ाई इन तीन राज्यों में है:
-
बिहार: 5 सीट
-
ओडिशा: 4 सीट
-
हरियाणा: 2 सीट
बिहार: एक दशक बाद मतदान की नौबत, दिलचस्प हुई लड़ाई
बिहार में एक सीट के लिए कड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा। यहां राजद (RJD) ने व्यवसायी से नेता बने सांसद अमरेंद्र धारी सिंह को फिर से मैदान में उतारा है।
वहीं, एनडीए (NDA) की ओर से केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर, उपेन्द्र कुशवाहा और शिवेश कुमार मैदान में हैं।
-
आंकड़ों का खेल: राजद गठबंधन के पास 25 विधायक हैं और उसे एआईएमआईएम (AIMIM) तथा बसपा (BSP) से छह अतिरिक्त वोटों की उम्मीद है।
-
बिहार विधानसभा सचिव ख्याति सिंह के अनुसार, किसी भी उम्मीदवार ने नाम वापस नहीं लिया है, जिसके चलते राज्य में एक दशक से अधिक समय बाद राज्यसभा के लिए मतदान की नौबत आई है।
ओडिशा और हरियाणा: ‘क्रॉस-वोटिंग’ का मंडरा रहा डर
-
ओडिशा: सत्तारूढ़ भाजपा ने राज्य इकाई के अध्यक्ष मनमोहन सामल और मौजूदा राज्यसभा सदस्य सुजीत कुमार को उतारा है।
-
विपक्षी बीजद (BJD) से संतरूप मिश्रा और डॉ. दत्तेश्वर होता मैदान में हैं। दिलचस्प बात यह है कि दिलीप रे ने भाजपा के समर्थन से निर्दलीय के रूप में नामांकन दाखिल किया है, जिससे यहां ‘क्रॉस-वोटिंग’ की प्रबल संभावना बन गई है।
-
हरियाणा: राज्य में पहले भी क्रॉस-वोटिंग का इतिहास रहा है। कांग्रेस के पास 37 विधायक हैं और उसे अपनी एक सीट सुरक्षित करने के लिए प्रथम वरीयता वाले केवल 31 वोटों की जरूरत है, लेकिन भाजपा की रणनीति यहां भी खेल बिगाड़ सकती है।
भाजपा ने नियुक्त किए केंद्रीय पर्यवेक्षक
इस कड़े मुकाबले को देखते हुए भाजपा आलाकमान ने तीनों राज्यों के लिए अपने केंद्रीय पर्यवेक्षकों (Observers) की नियुक्ति कर दी है:
-
बिहार: केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा और छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा।
-
हरियाणा: गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी।
-
ओडिशा: महाराष्ट्र के मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले।












