बिहार ब्रेकिंग : नीतीश कुमार ने भरा राज्यसभा का पर्चा, BJP का होगा CM
“बिहार में ‘नीतीश युग’ का अंत! राज्यसभा के लिए भरा पर्चा; BJP का होगा CM, बेटे निशांत बनेंगे डिप्टी सीएम; JDU दफ्तर में भारी हंगामा “
पटना : द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
बिहार की राजनीति में जिस बात की सुगबुगाहट थी, वह अब हकीकत में बदल गई है। 75 वर्षीय दिग्गज राजनेता नीतीश कुमार ने राज्यसभा के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया है।
इसके साथ ही बिहार की सियासत में इसे ‘नीतीश युग’ का अंत माना जा रहा है। सत्ता के गलियारों में अब यह चर्चा तेज हो गई है कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री भारतीय जनता पार्टी (BJP) से होगा।
जबकि नीतीश कुमार के करीब 40 वर्षीय बेटे निशांत कुमार को राज्य का नया डिप्टी सीएम (उपमुख्यमंत्री) बनाया जा सकता है।
JDU कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश, दफ्तर में की तोड़फोड़
नीतीश कुमार के इस कदम से जनता दल यूनाइटेड (JDU) के अंदर भूचाल आ गया है। पार्टी कार्यकर्ता इसे अपने नेता का “अपमानजनक प्रस्थान” मान रहे हैं और इसे स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं।
मुख्यमंत्री आवास जाने से रोके जाने पर नाराज JDU कार्यकर्ताओं ने पार्टी कार्यालय में जमकर तोड़फोड़ की।
इस अंदरूनी नाराजगी को समाज कल्याण मंत्री और JDU के वरिष्ठ नेता मदन साहनी के बयान से समझा जा सकता है।
उन्होंने कहा, “जो कुछ हो रहा है, उसे देखकर हम स्तब्ध हैं। यह विश्वास करना मुश्किल है कि यह नीतीश कुमार का अपना फैसला हो सकता है।” कुछ कट्टर समर्थक इसे ‘दरबारी साजिश’ बता रहे हैं।
तेजस्वी का तंज- ‘बिहार में BJP ने किया महाराष्ट्र जैसा खेल’
राज्य के इस बड़े सियासी उलटफेर पर राजद (RJD) नेता और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
तेजस्वी ने कहा, “बीजेपी ने बिहार में महाराष्ट्र जैसा खेल कर दिया है। लेकिन इसके लिए नीतीश कुमार खुद ही जिम्मेदार हैं।
हमारे साथ गठबंधन में अधिक विधायक होने के बावजूद हमने उन्हें मुख्यमंत्री बनाया, लेकिन उन्होंने दो बार हमारा साथ छोड़ दिया।”
जेपी आंदोलन से लेकर ‘पलटूराम’ और अब ‘परिवारवाद’ तक का सफर
इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान 1970 के दशक में ‘जेपी आंदोलन’ से राजनीति शुरू करने वाले नीतीश कुमार का सफर बेहद ऐतिहासिक रहा है।
1985 में पहली बार हरनौत से विधायक और 1989 में बाढ़ से सांसद बनने वाले नीतीश, वी.पी. सिंह और अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में मंत्री रहे।
1995 में जॉर्ज फर्नांडिस के साथ ‘समता पार्टी’ बनाने से लेकर शरद यादव के साथ JDU के गठन तक, उन्होंने एक चतुर रणनीतिकार की भूमिका निभाई।
2005 में BJP के साथ मिलकर सत्ता में आने के बाद से नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री पद पर सबसे लंबे समय तक काबिज रहे।
हालांकि उनका शासनकाल कानून-व्यवस्था और विकास के लिए सराहा गया, लेकिन बार-बार गठबंधन बदलने के कारण विरोधियों ने उन्हें “पलटूराम” का टैग दे दिया। अ
ब जब उनके बेटे निशांत राजनीति में प्रवेश कर रहे हैं, तो लंबे समय तक “परिवारवाद” की आलोचना करने वाले नीतीश कुमार की नैतिक ऊंचाई पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।












