AI इम्पैक्ट समिट 2026: पीएम मोदी की ऐतिहासिक ‘फैमिली फोटो’ में दिखा भारत का ‘सॉफ्ट पावर’; विज़ुअल डिप्लोमेसी से दिया बड़ा संदेश
“राष्ट्रीय राजधानी में चल रहे ‘इंडिया एआई-इम्पैक्ट समिट 2026’ के चौथे दिन (गुरुवार) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्षों और तकनीकी दिग्गजों के साथ एक ऐतिहासिक ‘फैमिली फोटो’ (Family Photo) साझा की”
नई दिल्ली : THE POLITICS AGAIN : शिल्पा की रिपोर्ट
पहली नजर में यह केवल एक औपचारिक समूह तस्वीर लग सकती है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय संबंधों के जानकारों के लिए यह भारत की ‘विज़ुअल डिप्लोमेसी’ (Visual Diplomacy) और बढ़ती कूटनीतिक हैसियत का सबसे बड़ा प्रमाण है।
मंच के मध्य में खड़े पीएम मोदी और उनके इर्द-गिर्द एशिया, यूरोप, अमेरिका और अफ्रीका के नेताओं की मौजूदगी यह स्पष्ट करती है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब केवल एक तकनीकी विषय नहीं, बल्कि वैश्विक कूटनीति (Global Diplomacy) का नया केंद्र बन चुका है।
विज़ुअल डिप्लोमेसी: तस्वीर जो बहुत कुछ कहती है
विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में खींची गई तस्वीरें महज औपचारिकता नहीं होतीं। अमेरिकी विद्वान डेविड डी. पर्किन्स इसे ‘विजुअल स्टेटमेंट’ मानते हैं।
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संदेश: अमेरिका और चीन जैसी महाशक्तियों के बीच तकनीकी वर्चस्व की होड़ (Tech War) के दौर में, इस मंच पर विकसित और विकासशील देशों का एक साथ खड़ा होना यह दर्शाता है कि भारत एआई के वैश्विक एजेंडे में एक ‘केंद्रीय और संतुलित’ भूमिका निभा रहा है।
जोसेफ नाए की ‘सॉफ्ट पावर’ का सटीक उदाहरण
प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय सिद्धांतकार जोसेफ एस. नाए ने अपनी पुस्तक ‘सॉफ्ट पावर’ में कहा है कि किसी देश का आकर्षण और उसकी सार्वजनिक प्रस्तुति ही उसकी वैश्विक शक्ति को तय करती है।
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भारत ने अपने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (आधार, UPI) और अब ‘जिम्मेदार एवं मानव-केंद्रित एआई’ के विजन के जरिए इस ‘सॉफ्ट पावर’ को मजबूती से पेश किया है। यह तस्वीर इस बात का दृश्य प्रमाण है कि दुनिया भारत के नेतृत्व को स्वीकार कर रही है।
ग्लोबल साउथ की आवाज
तस्वीर में अफ्रीकी और एशियाई देशों के प्रतिनिधियों की मजबूत उपस्थिति यह स्थापित करती है कि एआई केवल अमीर देशों की बपौती नहीं है।
भारत मजबूती से ग्लोबल साउथ (Global South) के लिए एआई के अवसरों और डेटा सुरक्षा की वकालत कर रहा है।
प्रतीकवाद से आगे की राह
हालांकि, यह ‘फैमिली फोटो’ एक बेहतरीन कूटनीतिक शुरुआत है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इस समिट की असली सफलता उन भावी समझौतों पर निर्भर करेगी जो डेटा शेयरिंग, साइबर सुरक्षा, अनुसंधान निवेश और एआई के नैतिक ढांचे (Ethical Framework) को लेकर आकार लेंगे।











