जर्मनी में बजा भारत का डंका: BioFach 2026 में भारत बना ‘कंट्री ऑफ द ईयर’; 14 साल बाद मिला यह सम्मान
“विश्व के जैविक (Organic) बाजार में भारत की धमक अब और मजबूत हो गई है”
नूरेमबर्ग (जर्मनी)/नई दिल्ली:”The Politics Again” संतोष सेठ की रिपोर्ट
जर्मनी के नूरेमबर्ग में आज (10 फरवरी 2026) से शुरू हुए दुनिया के सबसे बड़े जैविक व्यापार मेले ‘बायोफैच 2026’ (BioFach 2026) में भारत को ‘कंट्री ऑफ द ईयर’ (Country of the Year) के रूप में सम्मानित किया गया है।
यह भारतीय कृषि क्षेत्र के लिए एक गौरवशाली क्षण है, क्योंकि 14 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद भारत को यह प्रतिष्ठित दर्जा मिला है।
एपीडा का मेगा शो: 1000 वर्ग मीटर में ‘मिनी इंडिया’
वाणिज्य मंत्रालय के तहत आने वाले एपीडा (APEDA) ने इस आयोजन में भारत की भागीदारी को ऐतिहासिक बना दिया है।
नूरेमबर्ग में 1,074 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला ‘इंडिया पैवेलियन’ बनाया गया है। यहां 67 से अधिक सह-प्रदर्शक, जिनमें किसान उत्पादक संगठन (FPOs), सहकारी समितियां और निर्यातक शामिल हैं, भारतीय जैविक उत्पादों का प्रदर्शन कर रहे हैं।
20 राज्यों की खुशबू और GI टैग का स्वाद
इस मेले में भारत की विविधता साफ नजर आ रही है। असम से लेकर केरल और गुजरात से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक, 20 से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के स्टॉल यहां लगाए गए हैं। विदेशी मेहमानों को लुभाने के लिए भारतीय मंडप में विशेष ‘टेस्टिंग सेशन’ भी रखे गए हैं।
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बिरयानी का जादू: प्रीमियम जैविक बासमती चावल और मसालों से बनी बिरयानी।
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GI टैग चावल: मणिपुर का काला चावल (चक-हाओ), बंगाल का गोविंदभोग, केरल का नवारा, महाराष्ट्र का इंद्रायणी और हिमालयन लाल चावल परोसा जा रहा है।
वैश्विक बाजार में भारत की दावेदारी
बायोफैच में भारत का ‘कंट्री ऑफ द ईयर’ बनना इस बात का सबूत है कि दुनिया अब भारत को केवल एक उत्पादक नहीं, बल्कि जैविक खेती के एक ग्लोबल लीडर के रूप में देख रही है।
एपीडा का लक्ष्य इस मंच के जरिए मसाले, चाय, दालें, काजू और एसेंशियल ऑयल के निर्यात को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है। यह मेला 13 फरवरी तक चलेगा।











