Bastar Pandum 2026 President Murmu

बस्तर पैंडम 2026: राष्ट्रपति मुर्मू का ऐतिहासिक संबोधन- ‘चार दशकों का माओवादी भय खत्म, अब बस्तर में विकास का उत्सव’

“भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने आज (7 फरवरी, 2026) छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में ‘बस्तर पैंडम 2026’ का उद्घाटन करते हुए क्षेत्र में आए ऐतिहासिक बदलावों को रेखांकित किया”

जगदलपुर/छत्तीसगढ़ | संतोष सेठ की रिपोर्ट : The Politics Again ब्यूरो

उन्होंने बस्तर को न केवल प्राकृतिक सौंदर्य की भूमि बताया, बल्कि इसे माओवाद के अंधेरे से निकलकर विकास की रोशनी में कदम रखने वाला एक नया अध्याय करार दिया।

“बस्तर का उत्सव: जीवन जीने की कला”

राष्ट्रपति ने अपने संबोधन की शुरुआत बस्तर की समृद्ध संस्कृति की प्रशंसा के साथ की। उन्होंने कहा,

“जब किसान बीज बोते हैं, जब आम का मौसम आता है, तब यहाँ पैंडम (उत्सव) का मौसम होता है। बस्तर के लोग जीवन के हर पहलू का उत्सव मनाते हैं और दुनिया को उनसे जीवन जीने का तरीका सीखना चाहिए।”

माओवाद पर प्रहार: ‘भय और अविश्वास का अंत’

क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति पर बात करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि बस्तर ने पिछले चार दशकों तक माओवाद का दंश झेला है, जिससे आदिवासी और दलित समुदाय सबसे अधिक प्रभावित हुए।

लेकिन अब केंद्र सरकार के निर्णायक कदमों के कारण असुरक्षा और भय का माहौल समाप्त हो रहा है।

उन्होंने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटे लोगों की प्रशंसा की और कहा,

“हिंसा त्यागकर लोकतंत्र में विश्वास जताने वालों का स्वागत है। सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि वे हथियार डालकर सम्मानजनक जीवन जी सकें।”

विकास की नई इबारत: ‘नियाद नेल्लानार’ और ‘एकलव्य विद्यालय’

राष्ट्रपति मुर्मू ने राज्य सरकार की ‘नियाद नेल्लानार योजना’ (Niyad Nellanar Yojna) की सराहना की, जो ग्रामीणों को सशक्त बना रही है।

उन्होंने खुशी जताई कि वर्षों से बंद पड़े स्कूल फिर से खुल रहे हैं, और गांवों में सड़क, बिजली व पानी पहुंच रहा है।

शिक्षा पर जोर देते हुए उन्होंने एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों (EMRS) की भूमिका को अहम बताया और अभिभावकों से बच्चों को शिक्षित करने का आग्रह किया।

विकसित भारत में बस्तर की भूमिका

अंत में, राष्ट्रपति ने कहा कि बस्तर के लोग मेहनती हैं और यहाँ प्राकृतिक संसाधनों का भंडार है। उन्होंने ‘प्रधानमंत्री-जनमान योजना’ और ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ का उल्लेख करते हुए युवाओं से अपील की कि वे इन योजनाओं का लाभ उठाएं। उनकी प्रगति ही ‘विकसित भारत’ की नींव रखेगी।

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