गांधीनगर शिखर सम्मेलन: भारत-जर्मनी साझेदारी का ‘लिमिटलेस’ युग शुरू, मोदी-मर्ज ने लिखी दोस्ती की नई इबारत
“भारत और जर्मनी के बीच रणनीतिक संबंधों ने कल सोमवार को एक ऐतिहासिक मोड़ लिया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने गुजरात के गांधीनगर में गहन द्विपक्षीय वार्ता की”
यह मुलाकात न केवल दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों के 75 गौरवशाली वर्षों और रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्षों का प्रतीक बनी, बल्कि इसने भविष्य के लिए एक ‘लिमिटलेस’ (असीमित) रोडमैप भी तैयार किया।
सांस्कृतिक मेलजोल से कूटनीति की शुरुआत
चांसलर मर्ज की यह एशिया की पहली आधिकारिक यात्रा है। वार्ता से पूर्व, दोनों नेताओं ने अहमदाबाद के साबरमती आश्रम में महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की।
संबंधों की प्रगाढ़ता तब दिखी जब दोनों नेताओं ने साबरमती रिवरफ्रंट पर आयोजित ‘अंतर्राष्ट्रीय पतंग महोत्सव 2026’ में हिस्सा लिया और भगवान हनुमान की तस्वीर वाली पतंग उड़ाई। प्रधानमंत्री मोदी ने खुद चांसलर को अपनी कार में बैठाकर कार्यक्रम स्थल तक ले जाकर व्यक्तिगत मित्रता का संदेश दिया।
19 महत्वपूर्ण समझौतों पर मुहर: रक्षा और तकनीक बने मुख्य स्तंभ
दोनों देशों ने कुल 19 समझौतों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए, जो रक्षा से लेकर सेमीकंडक्टर तक फैले हुए हैं:
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रक्षा सहयोग: ‘रक्षा औद्योगिक सहयोग रोडमैप’ पर हस्ताक्षर किए गए, जो सह-विकास और सह-उत्पादन (Co-production) पर केंद्रित है। थिसनक्रुप (Thyssenkrupp) द्वारा भारतीय नौसेना के लिए 6 पनडुब्बियों के निर्माण का मुद्दा भी चर्चा के केंद्र में रहा।
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आर्थिक छलांग: द्विपक्षीय व्यापार 50 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर को पार कर गया है। प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि अब भारत-जर्मनी आर्थिक साझेदारी को ‘लिमिटलेस’ बनाया जाएगा।
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तकनीक और नवाचार: सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम, क्रिटिकल मिनरल्स और ग्रीन हाइड्रोजन के लिए विशेष समझौतों पर सहमति बनी। ‘भारत-जर्मनी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ की स्थापना अक्षय ऊर्जा में नवाचार को बढ़ावा देगी।
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भारतीयों के लिए बड़ी सौगात: जर्मनी ने भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए ‘वीजा-मुक्त ट्रांजिट’ (Visa-free transit) की सुविधा की घोषणा की, जिससे यात्रा सुगम होगी।
आतंकवाद पर कड़ा प्रहार: दिल्ली और पहलगाम हमलों की निंदा
संयुक्त बयान में दोनों नेताओं ने आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति दोहराई। विशेष रूप से 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम और 10 नवंबर 2025 को दिल्ली में हुए आतंकी हमलों की कड़ी निंदा की गई।
नेताओं ने सीमा पार आतंकवाद को समाप्त करने और आतंकी वित्तपोषण के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए वैश्विक सहयोग का आह्वान किया।
इंडो-पैसिफिक और वैश्विक स्थिरता
क्षेत्रीय सुरक्षा पर चर्चा करते हुए, एक नए ‘इंडो-पैसिफिक परामर्श तंत्र’ (Indo-Pacific Consultation Mechanism) की घोषणा की गई। पीएम मोदी ने कहा कि भारत और जर्मनी का सहयोग केवल दो देशों के लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए आवश्यक है। यूक्रेन और गाजा के संघर्षों पर भी दोनों नेताओं ने शांतिपूर्ण समाधान और अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान की बात कही।
“चांसलर मर्ज की एशिया में पहली यात्रा के लिए भारत को चुनना हमारे मजबूत संबंधों के प्रति उनकी व्यक्तिगत प्रतिबद्धता को दर्शाता है। हम साझा विरासत को आधुनिक और भविष्योन्मुखी साझेदारी में बदल रहे हैं।” — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
The Politics Again विश्लेषण: चांसलर मर्ज की यह यात्रा दर्शाती है कि बदलती वैश्विक भू-राजनीति में जर्मनी अब चीन के विकल्प के रूप में भारत को अपने सबसे विश्वसनीय भागीदार के रूप में देख रहा है।
“इस ऐतिहासिक भारत-जर्मनी शिखर सम्मेलन 2026 (India-Germany Summit 2026) के दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने रक्षा (Defense), अंतरिक्ष (Space), और क्रिटिकल टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। चांसलर मर्ज की यह पहली भारत यात्रा भारत-जर्मनी के 75 साल के राजनयिक संबंधों का जश्न है।”











