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जीएसटी के 9 वर्ष, कर व्यवस्था में सकरात्मक एवं प्रभावी बदलाव

जीएसटी के 9 वर्ष पूरे: कर प्रणाली हुई आसान, 1.65 करोड़ करदाता और रिकॉर्ड टैक्स संग्रह के साथ नया मुकाम”

नई दिल्ली : द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट

देश में वस्तु एवं सेवा कर (GST) लागू होने के नौ वर्ष पूरे होने पर केंद्र सरकार ने इसे भारत की कर व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव बताया है।

सरकार के अनुसार, 1 जुलाई 2017 से लागू जीएसटी ने विभिन्न केंद्रीय और राज्य करों को एकीकृत कर ‘एक राष्ट्र, एक कर’ की अवधारणा को मजबूत किया है।

पिछले नौ वर्षों में जीएसटी ने डिजिटल तकनीक, कर सुधारों और केंद्र-राज्य समन्वय के माध्यम से कर प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सरल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

सरकार का कहना है कि वर्ष 2025 में लागू किए गए अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधार (GST 2.0) ने कर ढांचे को और अधिक सरल बनाते हुए करदाताओं, एमएसएमई, किसानों, कारीगरों और निर्यातकों को राहत पहुंचाई है।

17 कर और 13 उपकर एक व्यवस्था में शामिल

जीएसटी लागू होने से पहले भारत में केंद्र और राज्यों द्वारा अलग-अलग अप्रत्यक्ष कर लगाए जाते थे, जिससे व्यवसायों पर “कर पर कर” (Tax on Tax) का बोझ पड़ता था।

जीएसटी लागू होने के बाद 17 प्रकार के कर और 13 उपकर एकीकृत व्यवस्था में शामिल किए गए, जिससे पूरे देश में एक समान कर प्रणाली विकसित हुई और व्यापार करने में आसानी बढ़ी।

जीएसटी परिषद बनी सहकारी संघवाद का उदाहरण

सरकार के अनुसार, जीएसटी परिषद ने केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय स्थापित कर सहकारी संघवाद को मजबूती दी है।

परिषद नियमित बैठकों के माध्यम से कर दरों, प्रक्रियाओं और सुधारों पर निर्णय लेकर बदलती आर्थिक जरूरतों के अनुरूप जीएसटी प्रणाली को अपडेट करती रही है।

GST 2.0 से क्या बदला?

2025 में लागू किए गए जीएसटी 2.0 सुधारों के तहत कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए—

  • कर संरचना को सरल बनाया गया।

  • अधिकांश वस्तुओं और सेवाओं को 5% और 18% टैक्स स्लैब में लाया गया।

  • विलासिता और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक वस्तुओं पर 40% कर का प्रावधान किया गया।

  • रजिस्ट्रेशन और रिटर्न फाइलिंग प्रक्रिया को अधिक आसान बनाया गया।

  • टैक्स रिफंड प्रक्रिया को तेज किया गया।

सरकार का दावा है कि इन बदलावों से कारोबार की लागत कम हुई है और अनुपालन आसान बना है।

एमएसएमई और छोटे कारोबारियों को राहत

सरकार ने छोटे व्यापारियों और एमएसएमई के लिए भी कई राहत उपाय लागू किए हैं।

  • जीएसटी पंजीकरण सीमा 20 लाख रुपये से बढ़ाकर 40 लाख रुपये की गई।

  • कंपोजिशन स्कीम की सीमा 75 लाख से बढ़ाकर 1.5 करोड़ रुपये की गई।

  • QRMP योजना के तहत छोटे कारोबारियों को तिमाही रिटर्न दाखिल करने की सुविधा मिली।

  • ई-कॉमर्स विक्रेताओं के लिए भी कई अनुपालन नियमों को सरल बनाया गया।

इन कदमों का उद्देश्य छोटे व्यवसायों के लिए कर प्रणाली को अधिक सुविधाजनक बनाना है।

डिजिटल तकनीक से बढ़ी पारदर्शिता

सरकार के अनुसार, GSTN पोर्टल, ई-इनवॉइसिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग और डेटा एनालिटिक्स के उपयोग से कर प्रशासन अधिक पारदर्शी और तकनीक आधारित हुआ है।

इन तकनीकों की मदद से कर चोरी की पहचान, डेटा विश्लेषण, रिटर्न सत्यापन और अनुपालन निगरानी को अधिक प्रभावी बनाया गया है।

रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा जीएसटी संग्रह

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जीएसटी लागू होने के बाद करदाताओं की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है।

  • वर्ष 2017 में जीएसटी करदाताओं की संख्या लगभग 66.5 लाख थी।

  • मई 2026 तक यह बढ़कर 1.65 करोड़ हो गई।

वहीं सकल जीएसटी संग्रह भी लगातार बढ़ा है।

  • 2017-18 में लगभग 7.4 लाख करोड़ रुपये

  • 2021-22 में लगभग 13.76 लाख करोड़ रुपये

  • 2025-26 में लगभग 22.27 लाख करोड़ रुपये

  • अप्रैल-मई 2026 में ही करीब 4.37 लाख करोड़ रुपये का संग्रह दर्ज किया गया।

विकसित भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

सरकार का कहना है कि जीएसटी केवल कर सुधार नहीं बल्कि आर्थिक सुधारों का महत्वपूर्ण आधार बन चुका है।

सरल कर प्रणाली, डिजिटल अनुपालन, बढ़ते कर संग्रह और व्यापक कर आधार के माध्यम से जीएसटी भारत की अर्थव्यवस्था को अधिक संगठित और पारदर्शी बनाने में योगदान दे रहा है।

सरकार के अनुसार, आने वाले वर्षों में भी जीएसटी प्रणाली में आवश्यक सुधार जारी रहेंगे ताकि नागरिकों और उद्योगों को और अधिक सुविधाजनक तथा प्रभावी कर व्यवस्था उपलब्ध कराई जा सके।

Santosh SETH

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