पूर्वांचल / वाराणसी

उपचुनाव: दतिया में 70.25% वोटिंग, बिहार-गुजरात में मतदाताओं की बेरुखी

उपचुनाव 2026: बिहार और गुजरात में मतदाताओं की बेरुखी, एमपी की दतिया सीट पर बंपर 70.25% वोटिंग; 3 अगस्त को आएंगे नतीजे”

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

बिहार, गुजरात और मध्य प्रदेश की तीन अहम विधानसभा सीटों पर हो रहा उपचुनाव शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो गया है।

शाम 6 बजते ही इन तीनों सीटों पर मतदान की प्रक्रिया खत्म हो गई और ईवीएम (EVM) मशीनों को स्ट्रॉन्ग रूम में सील कर दिया गया।

चुनाव आयोग (Election Commission) द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, इन तीनों सीटों पर मतदाताओं का मिला-जुला रुख देखने को मिला है।

जहां मध्य प्रदेश में वोटर्स ने भारी उत्साह दिखाया, वहीं बिहार और गुजरात के शहरी मतदाताओं ने इस उपचुनाव में खास दिलचस्पी नहीं दिखाई।

अब सभी राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों की धड़कनें तेज हो गई हैं, जिन्हें 3 अगस्त को होने वाली मतगणना (Counting) का बेसब्री से इंतजार है।

दतिया में दिखा भारी उत्साह, बांकीपुर सबसे फिसड्डी

मतदान के आंकड़ों पर गौर करें तो मध्य प्रदेश की दतिया सीट पर बंपर वोटिंग हुई है। यहां के मतदाताओं ने लोकतंत्र के इस पर्व में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और सबसे ज्यादा 70.25% मतदान दर्ज किया गया।

इसके उलट, बिहार की राजधानी पटना के अंतर्गत आने वाली बांकीपुर सीट पर मतदाताओं की भारी बेरुखी देखने को मिली। इस सीट पर सबसे कम महज 34.16% वोट ही पड़े।

इसी तरह का हाल गुजरात की मांजलपुर सीट पर भी रहा, जहां चुनाव आयोग की तमाम अपीलों के बावजूद केवल 37.50% मतदाताओं ने ही अपने मताधिकार का प्रयोग किया।

📊 वोटिंग प्रतिशत: एक नज़र में (शाम 5 बजे vs अंतिम आंकड़े)

चुनाव आयोग द्वारा जारी किए गए शाम 5 बजे तक के आंकड़ों और शाम 6 बजे के बाद आए लगभग अंतिम (अनुमानित) आंकड़ों की तुलना यहाँ दी गई है:

राज्य

विधानसभा सीट

वोटिंग (शाम 5 बजे तक)

वोटिंग (अंतिम आंकड़े / 6 बजे तक)

मध्य प्रदेश

दतिया

68.78%

70.25%

गुजरात

मांजलपुर

34.35%

37.50%

बिहार

बांकीपुर

33.57%

34.16%

(नोट: चुनाव आयोग द्वारा सभी मतदान केंद्रों से अंतिम डेटा प्राप्त होने के बाद वोटिंग प्रतिशत में मामूली बदलाव हो सकता है।)

3 अगस्त को खुलेगा किस्मत का पिटारा

इन तीनों सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजे 3 अगस्त 2026 को घोषित किए जाएंगे। दतिया में भारी मतदान से जहां राजनीतिक समीकरणों के पलटने की उम्मीदें लगाई जा रही हैं, वहीं बांकीपुर और मांजलपुर में कम वोटिंग प्रतिशत ने राजनीतिक दलों की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कम वोटिंग अक्सर सत्ताधारी दल के पक्ष में या फिर मतदाताओं की मौजूदा व्यवस्था से निराशा का संकेत होती है। असली तस्वीर 3 अगस्त को मतगणना के बाद ही साफ हो पाएगी।

Santosh SETH

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