वंदे मातरम् और राष्ट्रीय ध्वज की प्रतीकात्मक तस्वीर

वंदे मातरम्’ के अपमान पर 3 साल की जेल! संसद से पास हुआ नया विधेयक

‘वंदे मातरम्’ के अपमान पर अब होगी 3 साल की जेल! संसद से पास हुआ नया ‘राष्ट्रीय सम्मान (संशोधन) विधेयक 2026’, जानें क्या बदला?

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : श्रीमती शिल्पा की रिपोर्ट 

‘वंदे मातरम्’ सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा है। इस राष्ट्रीय गीत को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान कानूनी संरक्षण और सम्मान दिलाने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा ऐतिहासिक कदम उठाया है।

लोकसभा ने ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026’ को सफलतापूर्वक पारित कर दिया है।

यह विधेयक 29 जुलाई को राज्यसभा से पहले ही पास हो चुका था। अब राष्ट्रपति की मंजूरी मिलते ही यह एक सख्त कानून बन जाएगा।

इस कानून के लागू होने के बाद, राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ का अपमान करने या इसके गायन में बाधा डालने वालों को सीधे जेल की हवा खानी पड़ेगी।

विधेयक में क्या है नया प्रस्ताव?

इस नए विधेयक के जरिए मूल ‘राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम, 1971’ की धारा 3 में संशोधन किया गया है।

नए नियम के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर:

  • राष्ट्रीय गान (जन गण मन) या राष्ट्रीय गीत (वंदे मातरम्) का गायन रोकता है।

  • दोनों में से किसी भी गीत को गा रही सभा में जानबूझकर व्यवधान (Disturbance) उत्पन्न करता है।

तो ऐसे व्यक्ति को अधिकतम 3 वर्ष का कारावास (जेल), जुर्माना या दोनों से दंडित किया जाएगा।

नोट (धारा 3A): यदि कोई व्यक्ति एक बार दोषी ठहराए जाने के बाद दोबारा यही अपराध करता है, तो दूसरी बार उसे कम-से-कम 1 वर्ष की जेल की सजा अवश्य काटनी होगी।

इस संशोधन की जरूरत क्यों पड़ी?

24 जनवरी 1950 को संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने घोषणा की थी कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित ‘वंदे मातरम्’ को ‘जन गण मन’ के समान ही सम्मान और दर्जा प्राप्त होगा।

लेकिन, विडंबना यह थी कि 1971 में बने मूल कानून में राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा), संविधान और राष्ट्रीय गान का तो जिक्र था, लेकिन राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को इसमें शामिल नहीं किया गया था।

यानी, पहले इसके अपमान पर कोई विशिष्ट कानूनी सजा का प्रावधान नहीं था। इसी कानूनी खामी को दूर करने के लिए यह संशोधन विधेयक लाया गया है।

📊 एक नज़र में समझें: क्या था और क्या बदला?

विषय

1971 का मूल कानून

2026 का नया संशोधन

संरक्षण का दायरा

राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान

राष्ट्रीय गीत (वंदे मातरम्) को भी शामिल किया गया

गायन में बाधा डालने पर सजा

केवल राष्ट्रगान (जन गण मन) पर लागू

राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत दोनों पर लागू

सजा का प्रावधान

अधिकतम 3 वर्ष जेल या जुर्माना

अधिकतम 3 वर्ष जेल या जुर्माना

 

गृह मंत्रालय की नई गाइडलाइंस: किस क्रम में गाए जाएंगे गीत?

विधेयक आने से पहले 9 जुलाई 2026 को गृह मंत्रालय ने एक विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किया था। इसके तहत स्पष्ट किया गया है कि:

  1. गायन का क्रम: यदि किसी सरकारी या सार्वजनिक कार्यक्रम में दोनों गीत प्रस्तुत किए जाने हैं, तो पहले राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ गाया जाएगा और उसके बाद राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ प्रस्तुत किया जाएगा।

  2. आधिकारिक समय: राष्ट्रीय गीत (वंदे मातरम्) का आधिकारिक संस्करण लगभग 3 मिनट 10 सेकंड का है।

  3. सम्मान: जब भी राष्ट्रीय गीत या राष्ट्रीय गान बजाया या गाया जाए, तो उपस्थित सभी लोगों को सम्मान में ‘सावधान’ की मुद्रा में खड़ा होना अनिवार्य है।

पश्चिम बंगाल विवाद और राजनीतिक पृष्ठभूमि

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, यह संशोधन ऐसे समय में आया है जब पिछले साल (2025) वंदे मातरम् की रचना के 150 वर्ष पूरे हुए थे।

इसके अलावा, पश्चिम बंगाल में सरकारी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ गाए जाने को लेकर भाजपा और टीएमसी (TMC) के बीच लंबा राजनीतिक विवाद चला था।

पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बनने के बाद हाल ही में राज्य के सभी स्कूलों और मदरसों की प्रार्थना सभा में ‘वंदे मातरम’ का गायन अनिवार्य कर दिया गया है।

PREMIUM NEWS

अपनी Premium Membership चुनें

Premium articles बिना restriction पढ़ें।

Monthly

₹99/month

30 days Premium access

You have successfully subscribed to the newsletter

There was an error while trying to send your request. Please try again.

The Politics Again will use the information you provide on this form to be in touch with you and to provide updates and marketing.