पश्चिम बंगाल में दिखा ‘योगी मॉडल’, माफिया को कच्छे में घुमाया
पश्चिम बंगाल में ‘योगी मॉडल’ की दस्तक: शुभेन्दु अधिकारी के नेतृत्व में माफियाओं पर कसा शिकंजा, दहशत में अपराधी”
कोलकाता: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
पश्चिम बंगाल की राजनीति और कानून-व्यवस्था में इन दिनों एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल रहा है।
राज्य में सत्ता और प्रशासन के बदलते समीकरणों के बीच अपराधियों और माफियाओं की हालत अब ठीक वैसी ही नजर आने लगी है, जैसी उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में देखी जाती है।
दशकों तक राजनीतिक संरक्षण में पलने-बढ़ने वाले गुंडों, रंगदारों और सिंडिकेट चलाने वालों को अब यह स्पष्ट संदेश मिल चुका है कि राज्य में अब ‘कानून से ऊपर कोई नहीं’ है।
शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में बदला प्रशासनिक माहौल
राज्य में दिग्गज नेता शुभेन्दु अधिकारी के नेतृत्व में जिस प्रकार का कठोर प्रशासनिक वातावरण बनता दिखाई दे रहा है, उसने पूरे अपराध जगत की नींद उड़ा दी है।
जो अपराधी कभी सड़कों पर सरेआम दहशत फैलाते थे और खुद को कानून की पहुंच से कोसों दूर मानते थे, वे अब या तो अंडरग्राउंड होने को मजबूर हो गए हैं या फिर सलाखों के पीछे अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं।
राज्य की पुलिस भी अब एक नई रणनीति और आक्रामक रुख के तहत काम कर रही है। पकड़े गए अपराधियों को सड़कों पर घुमाकर जनता के बीच यह कड़ा संदेश दिया जा रहा है कि अपराध का अंत केवल सार्वजनिक अपमान और जेल की सलाखें हैं।
हावड़ा का आकाश सिंह: अपराध तंत्र के खात्मे का बना प्रतीक
पश्चिम बंगाल में पुलिस के इस नए और सख्त ‘जीरो टॉलरेंस’ अभियान का सबसे बड़ा उदाहरण हावड़ा जिले में देखने को मिला है।
पुलिस ने हावड़ा में रंगदारी और दहशत का पर्याय बन चुके कुख्यात अपराधी आकाश सिंह पर कड़ा शिकंजा कस दिया है।
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गंभीर आरोपों की फेहरिस्त: आकाश सिंह पर इलाके में रंगदारी का बड़ा गिरोह चलाने, आम लोगों और व्यापारियों को धमकाने तथा पुलिस अधिकारी पर जानलेवा फायरिंग करने जैसे बेहद संगीन मामले दर्ज हैं।
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खुलीं पुरानी फाइलें: पुलिस की कार्रवाई अब केवल हालिया मामलों तक सीमित नहीं है। आकाश सिंह के पुराने काले कारनामों की फाइलें भी खंगाली जा रही हैं।
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पूरे नेटवर्क (सिंडिकेट) पर प्रहार: प्रशासन की कोशिश केवल एक अपराधी को पकड़ने तक सीमित नहीं है।
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पुलिस अपराध स्थलों का बारीकी से मुआयना कर रही है और कड़ियों को जोड़कर पूरे ‘सिंडिकेट’ को जड़ से उखाड़ फेंकने के अभियान में जुटी है।
जनता में छाई खुशी की लहर, विपक्ष उठा रहा सवाल
प्रशासन की इस ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। राज्य का विपक्ष और कुछ तथाकथित बुद्धिजीवी पुलिस की इस सख्त कार्रवाई और तौर-तरीकों (विशेषकर अपराधियों के सार्वजनिक जुलूस) पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
हालांकि, आम जनता के बीच इस कदम का भारी स्वागत हो रहा है। बंगाल की आम जनता, जो वर्षों से अपराधियों और राजनीतिक संरक्षण प्राप्त गुंडों के भय और असुरक्षा के माहौल में जीने को मजबूर थी, इसे राज्य में ‘कानून के राज’ की वापसी मान रही है।
बंगाल में ‘कठोर शासन’ की हुई वापसी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जिस प्रकार उत्तर प्रदेश में ‘योगी मॉडल’ ने माफियाओं की कमर तोड़ी है, उसी तर्ज पर अब पश्चिम बंगाल में भी कठोर शासन की झलक दिखाई दे रही है।
यह महज एक सामान्य पुलिस कार्रवाई नहीं है, बल्कि उस ‘सिंडिकेट मानसिकता’ पर सीधा प्रहार है जिसने लंबे समय तक बंगाल को अराजकता की आग में झोंके रखा था।
बड़े-बड़े माफियाओं की हेकड़ी अब शांत हो चुकी है, और बंगाल की सड़कों पर आज यही नई सच्चाई नजर आ रही है।











