मंडी के सन्यारड़ में बरसात के कारण 20 घरों पर छाया संकट

“3 मकान गिर गए, चौथा गिरने की कगार पर, सन्यारड़ के 20 घरों पर छाया है संकट, मंडी शहर के सन्यारड़ में 2022 के बाद से शुरू हुआ है जमीन धंसने का सिलसिला, प्रशासन ने 20 लाख की लागत से लगाई थी सुरक्षा दीवार, वो भी हो गई है धराशाई  20 घरों तक पैदल जाने के लिए भी नहीं बचा है रास्ता”
मंडी 23 / 09 / 2024 नीतू कौशल की रिपोर्ट
नगर निगम मंडी के तहत आने वाले सन्यारड़ में बरसात के कारण 3 घर गिर चुके हैं जबकि चौथा घर गिरने की कगार पर है। अगर यह चौथा घर गिर जाता है तो फिर इसके बाद 20 अन्य घरों पर भी गिरने का संकट मंडरा जाएगा।
सन्यारड़ गांव के लोग इन दिनों खतरे के साए में अपना जीवन यापन करने को मजबूर हैं। प्रभावित नर्बदा चौहान, दुर्गा दास, भावना और बी.आर. ठाकुर ने बताया कि वर्ष 2022 की बरसात के दौरान यहां जमीन धंसने का सिलसिला शुरू हुआ।
उसके बाद प्रशासन की तरफ से सुरक्षा दीवार भी लगाई गई। लेकिन 2023 की बरसात में सुरक्षा दीवार भी धराशाई हो गई और 3 घर भी जमींदोज हो गए।
यहां जमीन धंसने का सिलसिला लगातार जारी है जिस कारण अब एक अन्य घर पर भी गिरने का संकट मंडरा गया है। इसके साथ ही 20 अन्य घरों पर भी हर समय खतरा मंडरा रहा है।
इन घरों तक जाने वाला रास्ता भी क्षतिग्रस्त हो गया है जिसके कारण यहां आने-जाने के लिए भी बच्चों और बुजुर्गों को खासी परेशानी से जूझना पड़ रहा है।
स्थानीय रणधीर सिंह और आकाश सर्बवाल ने बताया कि सरकार का कोई नुमाइंदा अभी तक इनकी सुध लेने मौके पर नहीं आया है। इन्होंने बताया कि जिला प्रशासन की तरफ से मदद की गई थी लेकिन वो भी काम नहीं आई।
अब जिला प्रशासन ने इसकी पीपीआर बनाकर सरकार को भेजी है। इन्होंने प्रदेश सरकार से इस पीपीआर को जल्द से जल्द मंजूर करने की गुहार लगाई है ताकि समय रहते यहां पर धंस रही जमीन को बचाने की कवायद की जा सके और लोगों के घरों को सुरक्षित रखा जा सके।
वहीं, जब इस बारे में एडीएम मंडी डा. मदन कुमार से बात की गई तो उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन सन्यारड में धंस रही जमीन के मामले में पूरी संजीदगी से काम कर रहा है।
यहां जमीन धंसने के कारणों का पता लगाने के लिए सर्वे भी करवाया गया है। इसकी एक कंपलीट पीपीआर बनाकर सरकार को भेज दी गई है। प्रभावितों की प्रशासन द्वारा हर संभव मदद की जा रही है।
सन्यारड की पहाड़ी पर बहुत बड़ी संख्या में लोगों ने अपने घर बना रखे हैं और जिस तरह से पहाड़ी की जमीन धंसने का सिलसिला शुरू हुआ है वो एक तरह से भविष्य के लिए खतरनाक संकेत हैं।
यदि समय रहते यहां इसकी रोकथाम के पुख्ता प्रयास नहीं किए गए तो फिर भविष्य में इसके दुरगामी परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
Santosh SETH

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