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अंतर्राष्ट्रीय : ईजरायल-लेबनान के बीच 10 दिनों का युद्धविराम लागू

मिडिल ईस्ट में बड़ी कूटनीतिक जीत: इजरायल-लेबनान के बीच 10 दिनों का युद्धविराम लागू; शांति की जगी उम्मीद, लेकिन हिजबुल्लाह के तेवर अब भी तल्ख

बेरूत/यरुशलम: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में कई वर्षों से जारी विनाशकारी युद्ध के बीच एक बड़ी और राहत देने वाली खबर सामने आई है।

इजरायल और लेबनान के बीच 10 दिनों का युद्धविराम (Ceasefire) आधिकारिक तौर पर लागू हो गया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित इस युद्धविराम का मुख्य उद्देश्य पिछले एक महीने से जारी उस भीषण संघर्ष को रोकना है, जिसने 2,000 से अधिक लोगों की जान ले ली है।

इस घोषणा के बाद लेबनान की सड़कों पर जश्न का माहौल है, लेकिन राजनीतिक स्तर पर इस शांति वार्ता को लेकर भारी मतभेद भी उभर कर सामने आए हैं।

नबीह बेरी की शर्त पूरी, लेकिन हिजबुल्लाह का कड़ा विरोध

लेबनान की संसद के प्रभावशाली अध्यक्ष और देश के सबसे वरिष्ठ शिया राजनेता नबीह बेरी ने लंबे समय से यह स्पष्ट शर्त रखी थी कि “गोलीबारी के बीच कोई शांति वार्ता नहीं होनी चाहिए।”

यह 10-दिवसीय युद्धविराम उनकी इस अहम शर्त को पूरा करता है और कूटनीतिक बातचीत का रास्ता साफ करता है।

हालांकि, अमेरिका की मेज़बानी में होने वाली इस संभावित शांति वार्ता के प्रस्ताव पर लेबनान में कई गुट बंटे हुए हैं।

हिजबुल्लाह (Hezbollah) के भीतर अभी भी इसका कड़ा विरोध हो रहा है। हिजबुल्लाह का तर्क है कि जब तक लेबनानी क्षेत्र पर इजरायल का कब्ज़ा बरकरार है, उन्हें जवाबी कार्रवाई का पूरा अधिकार है।

संगठन ने सख्त चेतावनी दी है कि यदि इजरायल ने युद्धविराम का जरा भी उल्लंघन किया, तो यह शांति अधिक समय तक नहीं टिकेगी और वे फिर से हथियार उठा लेंगे।

अमेरिका-ब्रिटेन की नजर ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ पर

इस युद्धविराम के साथ ही वैश्विक कूटनीति भी तेज हो गई है। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रधान उप प्रवक्ता टॉमी पिगोट के अनुसार, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो (Marco Rubio) ने ईरान के साथ युद्धविराम को लेकर आगे के कदमों पर चर्चा करने के लिए ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेट कूपर (Yvette Cooper) से अहम बातचीत की है।

इस चर्चा का मुख्य फोकस ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) में नौवहन की स्वतंत्रता को तत्काल बहाल करना था।

दोनों देशों ने इस बात पर जोर दिया कि वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित हो, ताकि वैश्विक बाजारों तक ऊर्जा (कच्चे तेल) की आपूर्ति बिना किसी बाधा के पहुंच सके।

इसके अलावा, वाशिंगटन और तेहरान के बीच चल रहा मौजूदा युद्धविराम भी 22 अप्रैल को समाप्त होने वाला है, जिसे लेकर आगे की रणनीति पर चर्चा की गई।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने किया जोरदार स्वागत

इस्राइल और लेबनान के बीच हुए इस समझौते का वैश्विक स्तर पर व्यापक स्वागत किया जा रहा है:

  • अरब लीग: महासचिव अहमद अबुल-गीत ने इसे लेबनानी अवाम की पीड़ा को कम करने वाला एक बेहद सकारात्मक कदम बताया और सभी पक्षों से स्थायी शांति के लिए गंभीर बातचीत का आग्रह किया।

  • ईरान: विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघई ने इस कदम का स्वागत किया। उन्होंने यह भी बताया कि यह समझौता दरअसल पाकिस्तान की मध्यस्थता से हुए ईरान-अमेरिका के बीच दो हफ्ते के युद्धविराम समझौते का ही एक हिस्सा है।

  • मिस्र, कतर और UAE: इन देशों ने इसे क्षेत्रीय तनाव कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। मिस्र ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे मानवीय सहायता तेजी से पहुंचाएं और विस्थापित हुए लोगों की सुरक्षित घर वापसी सुनिश्चित करें।

क्या स्थायी हो पाएगी यह शांति? (संघर्ष का बैकग्राउंड)

इस क्षेत्र में शांति स्थापित करने के पिछले प्रयास ज्यादा सफल नहीं रहे हैं। गौरतलब है कि नवंबर 2024 में लागू किया गया पिछला युद्धविराम पूरी तरह विफल रहा था और लगभग रोजाना हमले जारी रहे थे।

यह संघर्ष हाल ही में 2 मार्च को तब फिर से भड़क उठा, जब हिजबुल्लाह ने इजरायल पर रॉकेट दागे और जवाब में इजरायली सेना ने लेबनान पर भारी हवाई हमले किए।

वर्तमान का यह 10-दिवसीय युद्धविराम कूटनीति और स्थायी शांति के लिए एक महत्वपूर्ण ‘विंडो’ (अवसर) प्रदान कर रहा है, लेकिन इसकी अंतिम सफलता पूरी तरह से सभी पक्षों (विशेषकर इजरायल और हिजबुल्लाह) के संयम पर ही निर्भर करेगी।

Santosh SETH

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