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भारत-अफगान के बीच ₹400 करोड़ की डील, पाकिस्तान में खलबली

भारत-अफगानिस्तान की ₹400 करोड़ की ऐतिहासिक डील ने उड़ा दी पाकिस्तान की नींद, 5 साल के लिए बिछेगा हाईटेक लैब्स का जाल”

नई दिल्ली/काबुल: द  पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

जब पूरी दुनिया ने अफगानिस्तान को उसके हाल पर छोड़ दिया और खुद को ‘मुस्लिम उम्मा’ का रहनुमा बताने वाले पड़ोसी देश पाकिस्तान ने पीठ में छुरा घोंपा, तब भारत ने एक ऐसा कदम उठाया है जिसने पूरे दक्षिण एशिया की राजनीति को हिलाकर रख दिया है।

भारत और तालिबान शासित अफगानिस्तान के बीच 46 मिलियन डॉलर (करीब ₹400 करोड़) की एक ऐतिहासिक डील साइन हुई है।

कूटनीतिक जानकारों के मुताबिक, यह सिर्फ कोई व्यापारिक समझौता नहीं है, बल्कि अफगानिस्तान में पाकिस्तान की दादागिरी का अंत है।

क्या है यह ₹400 करोड़ की ‘मेगा डील’?

इस समझौते के तहत भारतीय कंपनी TCRC (TCRC Group) ने ‘अफगान नेशनल स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी’ (ANSA) के साथ एक मेगा कॉन्ट्रैक्ट साइन किया है:

  • 5 साल का प्रोजेक्ट: अगले 5 सालों में भारत, राजधानी काबुल समेत अफगानिस्तान के नौ सबसे महत्वपूर्ण बॉर्डर पॉइंट्स पर हाईटेक और अत्याधुनिक लेबोरेटरीज़ (Labs) का जाल बिछाएगा।

  • क्वालिटी कंट्रोल: अब तक अफगानिस्तान में आयात-निर्यात होने वाले सामान की गुणवत्ता जांचने का कोई पुख्ता सिस्टम नहीं था।

  • अब भारत की तकनीक से वहां भोजन, दवाएं, कंस्ट्रक्शन मटेरियल, टेक्सटाइल और बिजली के सामानों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जांच होगी।

  • ट्रेनिंग और सर्टिफिकेशन: भारतीय कंपनी सिर्फ मशीनें नहीं लगाएगी, बल्कि अफगान स्टाफ को ट्रेनिंग देकर उन्हें ISO सर्टिफिकेशन के स्तर तक लेकर जाएगी।

पाकिस्तान की आर्थिक नाकेबंदी का भारत ने दिया करारा जवाब

यह डील ऐसे नाजुक समय में हुई है जब पाकिस्तान ने ‘तोरखम’ और ‘स्पिन बोल्डक’ जैसे प्रमुख रास्तों को पूरी तरह से बंद कर रखा है।

हजारों अफगान ट्रक सड़कों पर सड़ रहे हैं और किसानों के फल-सब्जियां मिट्टी में मिल रहे हैं। विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) भी अफगानिस्तान पर भारी दबाव की चेतावनी दे रहा है।

पाकिस्तान का मकसद साफ है—अफगानिस्तान की आर्थिक नाकेबंदी कर उसे घुटनों पर लाना ताकि वह हमेशा पाकिस्तान पर निर्भर रहे।

लेकिन भारत ने खामोश न बैठते हुए चाबहार पोर्ट और अब इन क्वालिटी लैब्स के जरिए पाकिस्तान के ‘ट्रांजिट रूट’ के घमंड को मिट्टी में मिला दिया है।

अब अफगान माल को रिजेक्ट नहीं कर पाएगी दुनिया

ANSA के प्रमुख फैजुल्लाह तमीम ने कैमरे पर आकर इस डील के लिए भारत का शुक्रिया अदा किया है।

उन्होंने साफ कहा कि यह डील अफगानिस्तान को घटिया आयात से बचाएगी और घरेलू उत्पादन को ग्लोबल बनाएगी।

अब जब किसी अफगान किसान का केसर (Saffron) या ड्राई फ्रूट्स भारत द्वारा लगाई गई लैब से पास होकर यूरोप या दुनिया के बाजारों में जाएगा, तो उसकी कीमत चार गुना बढ़ जाएगी। कोई भी देश अब अफगान माल को ‘लो क्वालिटी’ कहकर रिजेक्ट नहीं कर पाएगा।

भारत ने कोई राजनीतिक शर्त थोपे बिना दोस्ती का हाथ बढ़ाया है, जो सच्चे मित्र और पाकिस्तान जैसे झूठे पड़ोसी के बीच का सबसे बड़ा फर्क है।

Santosh SETH

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