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वायनाड में रातों-रात पुल बनाकर हजारों जान बचाने वाली ‘लेडी अफसर’ को देश का सलाम, मिला सुभाष चंद्र बोस पुरस्कार

“केंद्र सरकार ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती (पराक्रम दिवस) के अवसर पर आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में देश के सर्वोच्च सम्मान ‘सुभाष चंद्र बोस आपदा प्रबंधन पुरस्कार – 2026’ की घोषणा कर दी है”

नई दिल्ली | The Politics Again संतोष सेठ की रिपोर्ट 

इस वर्ष यह प्रतिष्ठित पुरस्कार अदम्य साहस और उत्कृष्ट संस्थागत प्रबंधन के लिए लेफ्टिनेंट कर्नल सीता अशोक शेल्के (व्यक्तिगत श्रेणी) और सिक्किम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (संस्थागत श्रेणी) को दिया गया है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व में भारत सरकार द्वारा स्थापित इस पुरस्कार का उद्देश्य उन नायकों और संस्थाओं को पहचानना है, जो आपदा के समय निस्वार्थ भाव से देश की सेवा करते हैं।

वायनाड की ‘तारणहार’: लेफ्टिनेंट कर्नल सीता अशोक शेल्के

व्यक्तिगत श्रेणी में पुरस्कार पाने वालीं भारतीय सेना की लेफ्टिनेंट कर्नल सीता अशोक शेल्के का चयन उनके अभूतपूर्व साहस और इंजीनियरिंग कौशल के लिए किया गया है।

2024 में केरल के वायनाड में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के दौरान उनकी भूमिका किसी चमत्कार से कम नहीं थी।

ले. कर्नल शेल्के की प्रमुख उपलब्धियां:

  • 190 फुट लंबा बेली ब्रिज: चूरलमाला (वायनाड) में जब संपर्क पूरी तरह टूट गया था, तब उनके नेतृत्व में सेना ने रिकॉर्ड समय में 190 फुट लंबे बेली ब्रिज का निर्माण किया।

  • इनोवेटिव इंजीनियरिंग: उन्होंने कोमात्सु PC210 एक्सकेवेटर का उपयोग ‘काउंटरवेट’ के रूप में करके रात के अंधेरे में केवल 4 घंटे के भीतर एक अस्थायी फुटब्रिज तैयार कर दिया, जो इंजीनियरिंग का एक नायाब नमूना बना।

  • हजारों की जान बचाई: 150 टन भारी उपकरणों और 2,300 से अधिक कर्मियों को मोबिलाइज़ करके उन्होंने रेस्क्यू ऑपरेशन का नेतृत्व किया। उनके त्वरित निर्णयों ने खराब मौसम के बीच भी सैकड़ों नागरिकों की जान बचाई।

  • महिला नेतृत्व: उनका कार्य आपदा जोखिम न्यूनीकरण (DRR) में महिलाओं की बढ़ती और निर्णायक भूमिका का प्रतीक है।

हिमालय का रक्षक: सिक्किम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SSDMA)

संस्थागत श्रेणी में सिक्किम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SSDMA) को उनके ‘कम्युनिटी-फर्स्ट’ मॉडल के लिए सम्मानित किया गया है। 2005 में स्थापित SSDMA ने पहाड़ी राज्य में आपदा प्रबंधन की परिभाषा बदल दी है।

SSDMA का मॉडल क्यों है खास?

  • त्रि-स्तरीय सुरक्षा चक्र: प्राधिकरण ने 1,185 प्रशिक्षित ‘आपदा मित्रों’ का एक जाल बिछाया है। इसमें गांव स्तर पर ‘आपदा प्रबंधन सहायक’, ब्लॉक स्तर पर ‘पर्यवेक्षक’ और जिला स्तर पर ‘समन्वयक’ शामिल हैं।

  • तीस्ता बाढ़ में भूमिका: 2016 के मंतम भूस्खलन और 2023 की तीस्ता नदी बाढ़ जैसी विभीषिकाओं में SSDMA के रियल-टाइम कोआर्डिनेशन ने 2,563 लोगों की जान बचाई।

  • स्थानीय भागीदारी: इनका मॉडल पूरी तरह से स्थानीय समुदाय की भागीदारी पर आधारित है, जो अन्य हिमालयी और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए एक ‘रोल मॉडल’ बन गया है।

271 नामांकनों में से हुआ चयन

गृह मंत्रालय के अनुसार, वर्ष 2026 के पुरस्कार के लिए देश भर से संस्थानों और व्यक्तियों की ओर से कुल 271 नामांकन प्राप्त हुए थे। एक उच्च-स्तरीय जूरी ने इन नामांकनों की गहन समीक्षा के बाद विजेताओं का चयन किया।

गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में देश में ‘जीरो कैजुअल्टी’ (शून्य मृत्यु दर) के लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए, यह पुरस्कार उन प्रयासों को प्रोत्साहित करता है जो आपदा के समय भारत को सुरक्षित रखते हैं।

Santosh SETH

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