“मौसम विभाग के अनुसार, सौराष्ट्र और कच्छ के ऊपर बना गहरे दबाव का क्षेत्र 30 अगस्त को पूर्वी अरब सागर के ऊपर चक्रवाती तूफान में तब्दील हो सकता है। इसकी वजह से 31 राज्यों-केंद्रशासित प्रदेशों में 30 से 4 दिसंबर के दौरान भारी बारिश होने का अनुमान है”
नई दिल्ली 30 / 08 / 2024 संतोष सेठ की रिपोर्ट
मौसम विभाग के अनुसार, सौराष्ट्र और कच्छ के ऊपर बना गहरे दबाव का क्षेत्र 30 अगस्त को पूर्वी अरब सागर के ऊपर चक्रवाती तूफान में तब्दील हो सकता है।
इसकी वजह से 31 राज्यों-केंद्रशासित प्रदेशों में 30 से 4 सितंबर के दौरान भारी बारिश होने का अनुमान है।
ये राज्य ओडिशा, तटीय कर्नाटक, केरल, उत्तरी तटीय आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, पूर्वी-पश्चिमी उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य महाराष्ट्र, गोवा, पूर्वी-पश्चिमी मध्य प्रदेश, असम, मेघालय, नगालैंड, मणिपुर, त्रिपुरा, अंडमान एवं निकोबार द्वीप, अरुणाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, बिहार, झारखंड, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, उत्तराखंड और राजस्थान हैं।
गुजरात में पिछले दिनों हुई भारी बारिश से कई शहरों में बाढ़ आ गई है। बिजली कनेक्शन टूटने से लोग कई दिनों से अंधेरे में हैं। राज्य में अब तक 28 लोगों की मौत हो चुकी है।
राज्य में 7 राष्ट्रीय राजमार्ग, 66 राज्य राजमार्ग, 92 अन्य सड़कें और 774 पंचायत सड़कें मिलाकर 939 सड़कें बंद हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के सीएम भूपेंंद्र पटेल को फोन कर लगातार दूसरे दिन हालात की जानकारी ली। इस बीच मौसम विभाग ने अगले छह दिनों के दौरान 31 राज्यों-केंद्रशासित प्रदेशों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।
साथ ही शुक्रवार को ओडिशा और तेलंगाना में भारी से अति भारी (20 सेमी से ज्यादा) और छत्तीसगढ़, केरल, तटीय आंध्र प्रदेश, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में भारी बारिश (12 सेमी से ज्यादा) की चेतावनी दी है।
सितंबर के अंत तक जारी रह सकती है बारिश, कई फसलों को होगा नुकसान
इस वर्ष देश में मानसून की बारिश सितंबर के अंत तक जारी रह सकती है। ऐसे में मानसून की देरी से वापसी के कारण सामान्य से अधिक बारिश होने से चावल, कपास, सोयाबीन, मक्का और दालों को नुकसान हो सकता है क्योंकि इन फसलों की कटाई आमतौर पर सितंबर के मध्य से होती है।
फसलों के नुकसान होने खाद्य मुद्रास्फीति बढ़ सकती है। हालांकि बारिश से मिट्टी में नमी बढ़ेगी। इससे सर्दियों में बोई जाने वाली फसलों जैसे गेहूं, रेपसीड और चना की खेती को लाभ होगा।
मानसून आमतौर पर जून में शुरू होता है और 17 सितंबर तक देश के उत्तर-पश्चिमी भागों से वापस लौटना शुरू कर देता है, तथा अक्तूबर के मध्य तक पूरे देश में समाप्त हो जाता है।
लगभग 3.5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा, वार्षिक मानसून भारत को खेतों को पानी देने और जलाशयों और जलभृतों को भरने के लिए आवश्यक लगभग 70% वर्षा लाता है। सिंचाई के बिना, देश की लगभग आधी कृषि भूमि जून से सितंबर तक होने वाली वर्षा पर निर्भर है।
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