प्रशांत विहार धमाके से दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर फिर उठने लगे सवाल !
“स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके में पुलिस की मौजूदगी में ऐसी घटना को फिर से अंजाम देना, पुलिस को खुली चुनौती है। हालांकि, धमाके की आवाज इतनी तेज थी कि पुलिसकर्मी तुरंत घटनास्थल पर पहुंच गए थे”
प्रशांत विहार इलाके में गुरुवार सुबह एक पार्क के पास मिठाई की दुकान के सामने जोरदार धमाका हुआ। धमाके में घटनास्थल पर मौजूद एक टेंपो चालक घायल हो गया। एक माह पहले इसी इलाके में स्थित सीआरपीएफ स्कूल की दीवार के पास जोरदार धमाका हुआ था। इस मामले में अभी तक पुलिस को आरोपियों के बारे में कोई सुराग नहीं मिला है।
इधर, धमाके वाली जगह से बीस मीटर दूर रहने वाली कल्पना शर्मा का टेंपो चालक चेतन कुशवाहा रोज की तरह ब्रेड सप्लाई करने के लिए आया था। कल्पना के दो टेंपो हैं। इनसे वे ब्रेड-दूध की सप्लाई करवाती हैं। कल्पना ने बताया कि सुबह दोनों चालक आए तो पता चला कि एक टेंपो खराब है।
इसके बाद एक चालक मैकेनिक को बुलाने चला गया। इस बीच अचानक जोरदार धमाका हुआ। इससे चेतन घायल हो गया। उसकी आंख और होंठ में काफी चोट लगी। पुलिस ने उसे आंबेडकर अस्पताल में भर्ती कराया, जहां से प्राथमिक इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई।
शुरू हुई राजनैतिक बयानबाजियां
प्रेसवार्ता में केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली में कानून व्यवस्था की बुरी हालत होती जा रही है। खासकर एक-डेढ़ साल से अपराध बढ़ता जा रहा है। व्यापारियों को वसूली के कॉल आ रही हैं। महिलाओं के खिलाफ छेड़छाड़ और हत्याओं के मामले बढ़ते जा रहे हैं। कई वर्षों के बाद दिल्ली में लगातार गैंगवार हो रही हैं।
पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने एक्स पर कहा कि 40 दिन पहले एक धमाका हुआ था। उसके बारे में कुछ पता ही नहीं चला, अब एक और धमाका हो गया। लोग रंगदारी, ड्रग माफिया और अपराधियों के साए में जी रहे हैं। जब देश की राजधानी में लोग सुरक्षित नहीं है तो कहां सुरक्षित होंगे। गृहमंत्री अमित शाह को जिम्मेदारी लेनी चाहिए। अगर उनसे कानून व्यवस्था नहीं संभल रही है तो जिम्मेदारी किसी और को देनी चाहिए।
सीएम आतिशी ने कहा कि जहां धमाका हुआ, वहां से कुछ ही दूरी पर सीआरपीएफ स्कूल के पास भी अक्तूबर में धमाका हुआ था। दिल्ली में लगातार वसूली, गोली चलने और हत्या की घटनाएं सामने आ रही हैं। केंद्र सरकार कानून व्यवस्था को बनाए रखे।
वही प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि केजरीवाल के दिल्ली में विकास व सुशासन के दावे पूरी तरह खोखले हैं। उनके हर दावे के पीछे केवल प्रचार प्रपंच का खेल होता है। केजरीवाल दूसरों से सवाल पूछते हैं, लेकिन दिल्ली की जनता के पास उनकी हर योजना की असफलता एवं भ्रष्टाचार पर अनेकों सवाल हैं।
केजरीवाल बताएं कि दिल्ली में इस वर्ष ठंड लगने, अस्पताल में आग लगने, सरकारी आश्रय गृह में इलाज के अभाव और जलभराव में डूबने व सड़कों पर करंट लगने से हुई मौतों का जिम्मेदार कौन है? दिल्ली की जनता इसका सीधा जवाब चाहती है। आशा किरण होम में हुई 15 मौतों के साथ ही जनवरी में हुई 180 बेघरों की ठंड से मौत पर केजरीवाल और सीएम को दिल्ली वालों के प्रति जवाबदेही बनती है।
केजरीवाल ने दिल्ली की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े किए, जबकि वे जानते हैं कि अधिकांश मामलों में दिल्ली पुलिस 24 से 48 घंटे में अपराधियों दबोच लेती है। इसके बावजूद केजरीवाल अपनी सरकार की विफलताओं को छुपाने के लिए ध्यान भटका रहे हैं।











