“हिमाचल प्रदेश में वन्यप्राणी सप्ताह 2 अक्तूबर से 8 अक्तूबर तक मनाया जायेगा। इस दौरान कई कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा”
शिमला 28 / 09 / 2024 संतोष प्रजापति की रिपोर्ट
इस बार ये सप्ताह मानव वन्यजीव सह-अस्तित्व थीम पर मनाया जाएगा। जिसके अन्तर्गत शिमला के पॉटर-हिल-कंजरवेशन रिजर्व में स्वच्छता अभियान, ठियोग क्षेत्र के शिल्ली मेहला में चैहड पक्षियों को उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ना , पोटर हिल में विशेषज्ञों द्वारा वन्य जीवों पर आधारित गहन चर्चाओं के सत्र का आयोजन किया जाएगा।
इसके आलावा ढली में साईकल रैली का आयोजन, रिज मैदान से समरहिल तक मिनि-मैराथन का आयोजन, वन मुख्यालय शिमला में मानव वन्य जीव सह-अस्तित्व पर संगोष्ठी का भी आयोजन किया जाएगा।
प्रधान मुख्य अरण्यपाल अमिताभ गौतम(पीसीसीए) ने बताया कि कार्यक्रम का शुभारम्भ लोक निर्माण मंत्री विकमादित्य सिंह 2 अक्तूबर को शिमला के पौटर हिल में स्वच्छता अभियान को हरी झण्डी दिखाकर करेंगे और समापन समारोह में मुख्यमंत्री सुखविन्दर सिंह सुक्खु गेयटी थियेटर में शिरकत करेंगे।
इसके अतिरिक्त वन कर्मियों व अन्य लोगों के लिए वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी, वृत्तचित्र चित्रकारी वन्यप्राणी समूहगान प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया है।
उन्होंने बताया कि हिमाचल में 2004 में तीन लाख 17 हजार बंदर थे । जिनकी संख्या अब 1लाख 81 हज़ार रह गईं है। 2019 से प्रदेश में 1लाख 86 हज़ार बंदरो की नसबंदी की गई।
हिमाचल में बंदरों की नसबंदी पर 28 करोड़ रुपए की मोटी रकम अब तक खर्च हो चुकी है। इस भारी भरकम बजट से एक लाख 86 हजार 501 बंदरों की नसबंदी हो पाई है।
वन्य प्राणी विभाग ने 17 साल पहले इस प्रोजेक्ट को लांच किया था और अभी तक 43 फीसदी बंदरों की ही नसबंदी हो पाई है, जबकि 57 फीसदी बंदर अब भी बिना नसबंदी हैं और इस लंबे अरसे में नसबंदी से छूटे बंदरों की वजह से इनकी आबादी लगातार बढ़ रही है।
अभी तक राज्य के शत-प्रतिशत बंदर इस योजना के दायरे में नहीं आ पाए हैं। 2019 में आखिरी बार वन्य प्राणी विभाग ने बंदरों की गिनती पूरी की थी। वन्य प्राणी विभाग एक बंदर की नसबंदी पर डेढ़ से दो हजार रुपए खर्च कर रहा है।
वन्य प्राणी विभाग ने इस प्रोजेक्ट को लांच करने से ठीक पहले वर्ष 2004 में बंदरों की गिनती की थी। उस समय प्रदेश में बंदरों की तादाद तीन लाख 17 हजार थी।
इसके बाद वन्य प्राणी विभाग ने 2019 में अभियान के बीच बंदरों की गिनती पूरी की तो यह संख्या एक लाख 36 हजार पर ठहर गई। जबकि नसबंदी का अभियान 2007 में शुरू किया गया था।
इसके लिए वन्य प्राणी विभाग ने सात नसबंदी केंद्र स्थापित किए थे। लेकिन इन नसबंदी केंद्रों का भी ज्यादा फायदा विभाग नहीं उठा पाया है। हाल के वर्षों में बंदरों की तादाद शहरी क्षेत्रों में ज्यादा बढ़ी है।
बड़ा सवाल अब भी यही है कि जीरो से 43 फीसदी पहुंचने में विभाग को 17 साल लग गए, तो 100 फीसदी तक पहुंचने में कितना समय लगेगा।
इस अवधि के दौरान बिना नसबंदी के घूम रहे 57 फीसदी बंदरों को नियंत्रित करने के लिए वन्य प्राणी विभाग के पास क्या योजना रहेगी।
मुख्य अरण्यपाल बोले – बंदरों को मारेंगे नहीं, नसबंदी करेंगे
प्रधान मुख्य अरण्यपाल वन्यप्राणी विभाग अमिताभ गौतम ने बताया कि बंदरों को सार्वजनिक जगह खाना डालना अपराध की श्रेणी में आता है। ऐसा करते पाए जाने पर विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।
प्रदेश के सभी शहरी इलाकों में वन्य प्राणी विभाग की तरफ से पत्र जारी किए हैं। बंदरों पर काबू पाने के लिए आगामी समय में स्थानीय लोगों और संस्थाओं की भी मदद ली जाएगी।
हिमाचल प्रदेश में 73 बर्फानी तेंदुए
वन्य प्राणी विभाग बर्फानी तेंदुए की तादाद का पता लगा रहा है। इसके लिए विशेष कैमरे स्थापित किए हैं। बर्फानी तेंदुए की पहली गिनती वन्य प्राणी विभाग ने 2019 में पूरी की थी। उस समय प्रदेश में तेंदुए की तादाद 51 से 73 के बीच पाई गई थी।
जबकि इसके बाद बीते पांच सालों में संख्या बढऩे की संभावना जागृत हो गई है। इसके अलावा वन्य प्राणी विभाग भूरे भालू की गिनती भी कर रहा है। साल के अंत तक भूरे भालू की गिनती पूरी करने की संभावना जताई है।