दिल्ली – एमसीडी की स्टैंडिंग कमेटी के चुनाव में जीती भाजपा

“दिल्ली नगर निगम की स्थायी समिति के एक सदस्य के लिए उप चुनाव हुआ है। खाली पद के लिए हुए चुनाव में भाजपा की जीत हुई। इसके साथ ही स्थायी समिति में बहुमत पर फैसला भी हो गया। बहुमत वाले दल के हाथों में ही एमसीडी के संबंध में अहम निर्णय लेने की ताकत होती है”

नई दिल्ली 28 / 09 / 2024 संतोष सेठ की रिपोर्ट 

भारी हंगामे के बाद शुक्रवार को दिल्ली नगर निगम की स्थायी समिति की एक सीट पर उप चुनाव हो गया। आखिरी खाली सीट पर हुए मतदान में भाजपा उम्मीदवार सुंदर सिंह तंवर ने जीत दर्ज की।

भाजपा नेता तंवर ने 115 वोट हासिल कर सीट जीती, जबकि आप उम्मीदवार निर्मला कुमारी को शून्य वोट मिले। आप और कांग्रेस दोनों ने शुक्रवार को मतदान से दूरी बनाई।

कई दिनों के दिल्ली में एक बार फिर आप और भाजपा आमने-सामने हैं। एमसीडी की स्थायी समिति सदस्य के उप चुनाव को लेकर दिल्ली सरकार, मेयर और उपराज्यपाल के बीच टकराव हुआ।

बीती रात सदन में हंगामे के बाद शुक्रवार को मतदान कराना पड़ा। यह मुद्दा दिल्ली विधानसभा के मौजूदा सत्र में उठा जहां आप और भाजपा ने एक दूसरे पर आरोप लगाए।

आप ने कहा कि एलजी ने पीछे के रास्ते से चुनाव करवाने की कोशिश की। जबकि चुनाव करवाने की जिम्मेदारी मेयर की होती है। वहीं भाजपा ने कहा कि चुनाव की तारीख पहले ही घोषित हो गई थी। 

दरअसल, एमसीडी के स्थायी समिति के एक सदस्य का पद रिक्त है। इसी खाली पद के लिए शुक्रवार को उपचुनाव हुआ। इस चुनाव से दिल्ली नगर निगम की स्थायी समिति में बहुमत पर फैसला हो जाएगा।

हालांकि, मतदान से पहले आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच एमसीडी सदन से लेकर विधानसभा तक हंगामा देखने को मिला। पहले यह चुनाव गुरुवार को तय था लेकिन दिन भर हुए हंगामे के चलते इसे शुक्रवार को स्थगित करना पड़ा। 

गुरुवार को दिनभर नाटकीय उठापटक के बाद भी एमसीडी के स्थायी समिति के एक सदस्य का चुनाव नहीं हो सका। देर रात तक चले सियासी ड्रॉमा के बीच चुनाव की प्रक्रिया शुरू तक नहीं हो पाई।

इससे पहले चुनाव के दौरान सदन में मोबाइल ले जाने की पाबंदी पर उठे हंगामे के बीच मेयर शैली ओबराय ने करीब 3:50 बजे बैठक 5 अक्तूबर के लिए स्थगित कर दी थी।

हालांकि, उपराज्यपाल ने मेयर के फैसले को पलटते हुए आदेश दिया कि रात 10 बजे तक चुनाव प्रक्रिया शुरू करने की उन्हें रिपोर्ट सौंपी जाए।

इसके बाद निगम ने फिर से तैयारी शुरू की। पार्षदों को बुलावा भेजा गया। भाजपा के पार्षद निगम मुख्यालय पहुंच भी गए, लेकिन आप पार्षद सदन में उपस्थित नहीं हुए। इस पर निगम आयुक्त ने कानूनी सलाह ली और चुनाव स्थगित करने का फैसला लिया। 

विवाद की असली वजह क्या है?

स्थायी समिति के एक सदस्य के चुनाव को लेकर सदन में मेयर और एमसीडी आयुक्त भी आमने-सामने दिखे। आयुक्त की तरफ से पार्षदों पर मोबाइल साथ लाने पर लगाई गई रोक को लेकर दोनों में टकराव हुआ।

आलम यह रहा कि मेयर डॉ. शैली ओबरॉय और आयुक्त अश्वनी कुमार ने एक-दूसरे का ही आदेश नहीं माना। मेयर ने पार्षदों की गरिमा का हवाला देते हुए उनकी जांच न करने और मोबाइल लाने के निर्देश दिए।

जबकि आयुक्त ने चुनाव निष्पक्ष कराने व गोपनीयता बनाए रखने का हवाला देते हुए फोन लाने पर लगाई गई रोक को जायज ठहराया। इस मामले में आदेश न मानने पर मेयर ने चुनाव कराए बिना 5 अक्तूबर तक के लिए सदन की बैठक स्थगित कर दी। 

दोनों दलों में चुनाव से पहले ही आरोप-प्रत्यारोप दौर चल रहा है। दिल्ली भाजपा प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने कहा कि 22 महीने में आप ने निगम में आंतरिक लोकतंत्र को खत्म किया है।
 
स्थायी समिति एवं अन्य सांविधानिक कमेटियों के चुनाव बाधित किए हैं जिससे निगम के सभी प्राथमिक काम रुके हुए हैं। स्थायी समिति का चुनाव बाधित कर अपना चेहरा दर्शाया है। 

स्थायी समिति के चुनाव को लेकर आम आदमी पार्टी ने भाजपा पर निशाना साधा। आप के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया ने कहा कि दिल्ली में लोकतंत्र की हत्या हो रही है।

 
एमसीडी का सदन स्थगित होने के बावजूद एलजी ने एक घंटे के नोटिस पर चुनाव कराने का आदेश जारी करवा दिया, जो गैर सांविधानिक है। 
क्या होती है स्टैंडिंग कमेटी?
 
एमसीडी की सबसे बड़ी चुनौती बजट और प्रशासनिक फैसलों को मंजूरी दिलाने की होती है। विभिन्न स्थानीय निकायों को संचालित करने की ‘कार्यात्मक’ शक्ति ‘स्टैंडिंग कमेटी’ के पास होती है।
 
इसमें 18 सदस्य और एक अध्यक्ष होता है जिनके पास वास्तविक निर्णय लेने की शक्तियां होती हैं। दिल्ली विधानसभा छह सदस्यों का चुनाव करती है और बाकी 12 एमसीडी के दर्जन भर क्षेत्रों से चुने गए पार्षद होते हैं, इस प्रकार स्टैंडिंग कमेटी में कुल 18 सदस्य होते हैं।
 
हर सदन चाहे वह देश की संसद हो, राज्यों की विधानसभा हो या निगम की स्टैंडिंग कमेटी हो बेहद ताकतवर होती है। मालूम हो कि दिल्ली के मेयर और डिप्टी मेयर के पास भी फैसले लेने की उतनी शक्तियां नहीं होतीं जितनी स्टैंडिंग कमेटी के पास होती है।
 
इसकी एक बड़ी वजह ये है कि 18 सदस्यों वाली स्टैंडिंग कमेटी ही निगम के अधिकतर चाहे वो आर्थिक हों या प्रशासनिक फैसले लेती है।
 
इस कमेटी से ही सभी तरह के प्रस्तावों को सदन से पास करवाने के लिए भेजा जाता है। इस तरह एमसीडी की स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन का पद काफी शक्तिशाली हो जाता है और पूरे निगम पर इसका दबदबा होता है।
 
स्टैंडिंग कमेटी का चुनाव कैसे होता है?
स्टैंडिंग कमेटी में कुल 18 सदस्य होते हैं जिनमें से छह का चुनाव तो निगम के पार्षद सदन की पहली बैठक में वोटिंग के माध्यम से करते हैं। यह वोटिंग गुप्त होती है और इनका चुनाव राज्यसभा सदस्यों की तरह वरीयता के आधार पर होता है।
 
दरअसल, पार्षदों को अपने उम्मीदवारों को बैलेट पेपर पर वरीयता के हिसाब से 1,2,3 नंबर देने होते हैं। अगर पहली वरीयता के आधार पर चुनाव नहीं हो पाता तो दूसरे और तीसरे वरीयता के वोट की काउंटिंग आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के आधार पर की जाती है।
 
18 सदस्यों वाली स्थायी समिति में मौजूदा समय में भाजपा के नौ और आप के आठ सदस्य हैं। समिति के एक सदस्य का पद खाली है जिसके लिए उपचुनाव हुआ।
 
खाली पद के लिए सत्तारूढ़ आप की तरफ से निर्मला कुमारी तो मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा के उम्मीदवार सुंदर सिंह थे। स्थायी समिति की आखिरी खाली सीट पर हुए मतदान में भाजपा उम्मीदवार सुंदर सिंह ने जीत दर्ज की। 
 
सुंदर ने 115 वोट हासिल कर सीट जीती, जबकि आप की निर्मला कुमारी को शून्य वोट मिले। आप और कांग्रेस पार्षदों ने इसमें भागीदारी नहीं की।  इस चुनाव परिणाम के साथ ही अब समिति में भाजपा के 10 सदस्य हो गए हैं।
 
जबकि सत्तारूढ़ आप के पास केवल आठ सदस्य हैं। मतदान अतिरिक्त आयुक्त जितेंद्र यादव की मौजूदगी में हुआ, जिन्हें महापौर और उप महापौर की अनुपस्थिति में पीठासीन अधिकारी बनाया गया था। 

समिति के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव में भाजपा की जीत सुनिश्चित दिख रही है। समिति के इन दोनों पदों का चुनाव अगले महीने होने की संभावना है।

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