हिमाचल समाचार – मंडी के तेरंग में मलबे से मिला दो बच्चों का शव, मलाणा टनल से छह किए रेस्क्यू, 46 अभी लापता

मंडी 02/08/2024 नीतू कौशल के साथ संतोष सेठ की रिपोर्ट
चौहार घाटी के तेरंग में बादल फटने से हुई तबाही को लेकर शुक्रवार को एनडीआरएफ, एसडीआरएफ व अन्य टीमों द्वारा सर्च अभियान जारी है।
सर्च अभियान के दौरान शुक्रवार दोपहर को दो और शव बच्चों के बरामद हुए हैं। इसमें एक शव आठ वर्षीय आर्यन और दूसरा शव नौ वर्षीय अमन का है। दो दिनों से अब तक कुल पांच शव मिले चुके हैं, जबकि पांच अभी लापता है।
समस्त टीमों द्वारा लापता लोगों की तलाश में लगातार सर्च अभियान जारी है। बता दें कि बुधवार देर रात्रि चौहार घाटी के तेरंग में बादल फटने से दस लोग चपेट में आ गए हैं।
एनडीआरएफ, एसडीआरएफ व अन्य टीमों द्वारा गुरुवार से राहत बचाव कार्य जोरों पर जारी है। पहले दिन केवल तीन लोगों के शव मलबे से निकाले गए हैं, जबकि दूसरे दिन दो नन्हें बच्चों के शव मलबे से निकाले गए।
दर्दनाक मंजर को देखकर हर किसी का दिन पसीज उठा है। शव मिलते ही क्षेत्र में चीखो-पुकार से गूंज उठा। इस बारे में एसपी मंडी साक्षी वर्मा ने बताया कि चौहार घाटी के तेरंग में बादल फटने के दौरान चपेट में आए लोगों की तलाश के लिए सर्च अभियान जारी है। अभी तक पांच शव मिल चुके है। टीमों द्वारा अभियान लगातार जारी है।
मलाणा टनल से छह किए रेस्क्यू, 46 अभी लापता
मलाणा टनल में फंसे दो इंजीनियरों समेत छह लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया। रामपुर के समेज में 36 लोगों समेत 46 लोग अभी लापता हैं।
समेज, बागीपुल, राजबन में सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस और होमगार्ड जवानों ने दिनभर सर्च ऑपरेशन चलाया। राजबन में अभी पांच लोग लापता हैं।
लापता लोगों के परिजन और रिश्तेदार खुद भी अपनों को मलबे में ढूंढ रहे हैं।
11 घंटे बंद रहा चंडीगढ़-मनाली एनएच
चंडीगढ़-मनाली राष्ट्रीय राजमार्ग मंडी से पंडोह-पनारसा तक तेज बारिश के कारण बड़ी-बड़ी चट्टानें और मलबा गिरने से बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हुआ है। लगभग 11 घंट के बाद मार्ग यातायात के लिए बहाल किया जा सका।
सडक़ मार्ग रात 1 बजे से बंद से बंद हो गया था। बारिश इतनी तेज थी कि बाहर निकलना मुश्किल था। पहला स्लिप मंडी के 4 मील पर बड़ी बड़ी चट्टानों के रूप में गिरा।
दूसरा स्लिप सबसे डेंजरस प्वाइंट 6 मील के पास, तीसरा स्लिप नौ मील के पास पहाड़ी से बड़े बड़े पथर और मलबे के रूप में आया। जिसने सडक़ मार्ग को ब्यास नदी की साइड से 1 फुट नीचे धंसा दिया।
अब यह प्वाइंट पहले से ज्यादा खतरनाक हो रहा है। क्योंकि बारिश के दौरान यह सडक़ मार्ग कभी भी धंस सकता है।चौथा स्लिप जागर नाले के आने से पत्थर मिट्टी के रूप में सडक़ पर बिखर गया।
नाले का पानी नदी की तरह सडक़ से मलबे के साथ बहने से सडक़ पूरी तरह तबाह हो गई। सडक़ गहरे नाले में परिवर्तित हो गई। डयोड् नाले ने भी खूब तबाही मचाई है।
वहीं दवाड़ा व पनारसा में भी सडक़ मार्ग क्षतिग्रस्त हो गया था। इस दौरान सडक़ के दोनों छोर पर सैकड़ों गाडिय़ों का जाम लग गया। गनीमत रही कि किसी भी वाहन को कोई क्षति नहीं पहुंची।
जैसे ही सुबह 5:30 बजे बारिश भी कुछ कम हुई तो केएमसी कंपनी की मशीनें चलने लगी। मात्र 4 घंटों में बदहाल सडक़ मार्ग को वाहनों के चलने योग्य बना दिया गया।
जागर नाले में फंस गई एचआरटीसी की बस
एचआरटीसी की एक बस जागर नाले में पत्थरों के बीच फंंस गई। जिसने परे 35 मिनटों तक खूब पसीना निकला। बता दें कि जिला प्रशासन एनएचएआई से पिछली बरसात से सडक़ मार्ग पर गिरे मलबे को नहीं हटा सका। जो बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है।
एडिशनल एसपी मंडी सागर चंद्र ने कहा कि हमने बहुत कम समय में सडक़ बहाल की है। जिसके लिए हमारी पुलिस टीम व के एमसी कंपनी के वर्कर्ज व मशीन ऑपरेटर्स बधाई के पात्र हैं। 11 बजे प्रात: सडक़ मार्ग पुन: सुचारू हो सका है।












